विज्ञापन
This Article is From Jun 06, 2014

गैर-कांग्रेसवाद अब हमारे लिए समाप्त हो गया है : जदयू नेता केसी त्यागी

गैर-कांग्रेसवाद अब हमारे लिए समाप्त हो गया है : जदयू नेता केसी त्यागी
फाइल फोटो
नई दिल्ली:

जदयू महासचिव केसी त्यागी ने शुक्रवार को कहा कि गैर-कांग्रेसवाद अब हमारे लिए खत्म हो चुका है और साथ ही दोनों दलों के बीच गठबंधन की संभावनाओं का संकेत दिया।

त्यागी ने कहा, 'गैर-कांग्रेसवाद हमारे लिए अब समाप्त हो गया है। यह रुख अपनाए रखने का अब क्या तुक है जब कांग्रेस का अनेक राज्यों में वजूद ही नहीं रह गया है। गैर-कांग्रेसवाद के दिन चले गए। हमारे लिए ये दिन गैर-भाजपावाद के हैं। हम कांग्रेस, वाम और क्षेत्रीय दलों सहित सभी गैर-भाजपा दलों के साथ काम करने को तैयार हैं।'

सूत्रों ने कहा कि जदयू की मदद से कांग्रेस महासचिव शकील अहमद को राज्यसभा में लाने सहित संभावनाओं पर चर्चा करने के लिए कांग्रेस और जदयू के दूसरी पंक्ति के नेताओं के बीच बातचीत हुई है।

बिहार से राज्यसभा की तीन सीटें रिक्त हुई हैं। लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान, भाजपा महासचिव राजीव प्रताप रूढ़ी और राजद छोड़कर भाजपा में शामिल हुए रामकृपाल यादव के इस्तीफे के कारण ये तीनों सीटें रिक्त हुई हैं। ये तीनों नेता हाल में लोकसभा के लिए चुने गए हैं।

राज्यसभा की इन सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल यू तीनों सीटें जीत सकती है। राज्यसभा के लिए पार्टी अध्यक्ष शरद यादव का नाम भी चर्चा में है जो हाल के लोकसभा चुनाव में राजद के राजेश रंजन उर्फ पप्पु यादव से पराजित हुए हैं।

ऐसा समझा जाता है कि अहमद ने बिहार में नीतीश कुमार और उसके बाद जीतन राम मांझी सरकार को समर्थन देने के कांग्रेस के फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह बिहार में अगले साल होने वाले चुनाव में जदयू के साथ गठबंधन के भी पक्षधर बताए जाते हैं।

राज्यसभा के लिए कांग्रेस नेता को जदयू के समर्थन की संभावना के बारे में पूछे जाने त्यागी ने कहा कि इस तरह की कोई पहल या प्रस्ताव कांग्रेस की तरफ से अभी तक हमारे पास नहीं आया है। अगर यह आता है तो हमारा नेतृत्व नीतीश कुमार और शरद यादव निर्णय करेंगे।

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
जनता दल यूनाइटेड, केसी त्यागी, गैर-कांग्रेसवाद, Janta Dal United, K C Tyag, Anti Congressism