
शिवसेना ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता है...
नई दिल्ली/मुंबई:
एनडीए सहयोगी शिवसेना का मिजाज भांपना टेढ़ा काम है. अभी चार दिन पहले मोदी सरकार की तारीफों के बुल बांधे थे लेकिन अब फिर से सुर बदल गए हैं. एयर इंडिया का विनिवेश किए जाने का मोदी सरकार का फैसला पार्टी को रास नहीं आया. पार्टी ने सरकार का मजाक उड़ाते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली से पूछा कि वह यह बताएं कि महाराजा (एयर इंडिया) भिखारी कैसे बन गया.
एयर इंडिया का विनिवेश करने के सरकार के फैसले की राजग सहयोगी शिवसेना समेत कई दलों ने आलोचना की. शिवसेना ने यह कहते हुए इस फैसले का मजाक उड़ाया कि सरकार इस आधार पर कश्मीर भी नीलाम कर सकती है कि वह उस पर आने वाला सुरक्षा व्यय नहीं उठा सकती. शिवसेना ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता है, यदि वह एयरलाइन नहीं चला सकती तो वह देश कैसे चलाएगी. माकपा और तृणमूल कांग्रेस ने भी इस फैसले पर हमला किया और इसे तत्काल रोकने की मांग की.
अपने मुखपत्र 'सामना' में शिवसेना ने लिखा, "आज विमानन कंपनी बेची जा रही है क्योंकि उस पर 50,000 करोड़ रुपये का कर्ज है. कल सरकार कहेगी कि वह कश्मीर घाटी का सुरक्षा व्यय उठाने में असमर्थ है, इसलिए वह इसे नीलाम करेगी. उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है." भाजपा पर प्रहार करते हुए शिवसेना ने कहा कि यदि यही फैसला पिछली संप्रग सरकार ने किया होता तो भाजपा ने उसे नहीं बख्शा होता.
उधर माकपा ने एक बयान में कहा कि एयर इंडिया की बिक्री को मोदी की संपूर्ण निजीकरण अभियान का हिस्सा है जो राष्ट्रहित के विरद्ध है. इसे तत्काल रोका जाए. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी इस फैसले का विरोध किया. दो दिन पहले ही जेटली ने घोषणा की थी कि मंत्रीमंडल ने एयर इंडिया का विनिवेश करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है.
उधर, एयर इंडिया को खरीदे जाने की खबरों की बीच निजी विमानन कंपनी इंडियो ने स्पष्ट किया कि कंपनी फायदे का सौदा होने पर ही एयर इंडिया को खरीदेगी.
एयर इंडिया का विनिवेश करने के सरकार के फैसले की राजग सहयोगी शिवसेना समेत कई दलों ने आलोचना की. शिवसेना ने यह कहते हुए इस फैसले का मजाक उड़ाया कि सरकार इस आधार पर कश्मीर भी नीलाम कर सकती है कि वह उस पर आने वाला सुरक्षा व्यय नहीं उठा सकती. शिवसेना ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता है, यदि वह एयरलाइन नहीं चला सकती तो वह देश कैसे चलाएगी. माकपा और तृणमूल कांग्रेस ने भी इस फैसले पर हमला किया और इसे तत्काल रोकने की मांग की.
अपने मुखपत्र 'सामना' में शिवसेना ने लिखा, "आज विमानन कंपनी बेची जा रही है क्योंकि उस पर 50,000 करोड़ रुपये का कर्ज है. कल सरकार कहेगी कि वह कश्मीर घाटी का सुरक्षा व्यय उठाने में असमर्थ है, इसलिए वह इसे नीलाम करेगी. उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है." भाजपा पर प्रहार करते हुए शिवसेना ने कहा कि यदि यही फैसला पिछली संप्रग सरकार ने किया होता तो भाजपा ने उसे नहीं बख्शा होता.
उधर माकपा ने एक बयान में कहा कि एयर इंडिया की बिक्री को मोदी की संपूर्ण निजीकरण अभियान का हिस्सा है जो राष्ट्रहित के विरद्ध है. इसे तत्काल रोका जाए. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी इस फैसले का विरोध किया. दो दिन पहले ही जेटली ने घोषणा की थी कि मंत्रीमंडल ने एयर इंडिया का विनिवेश करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है.
उधर, एयर इंडिया को खरीदे जाने की खबरों की बीच निजी विमानन कंपनी इंडियो ने स्पष्ट किया कि कंपनी फायदे का सौदा होने पर ही एयर इंडिया को खरीदेगी.
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