
पीएम मोदी और अरविंद केजरीवाल की फाइल फोटो
नई दिल्ली:
केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच महीनों से झगड़े, तल्खियां और आरोप-प्रत्यारोप के बाद अब इन दोनों के संबंधों के अच्छे दिन आ गए हैं।
यमुना नदी को साफ-सुथरा करने के लिए शनिवार सुबह 11.30 बजे उमा भारती दिल्ली सचिवालय की ड्योढ़ी लांघकर बैठक के लिए पहुंची। तो बाहर जमा पत्रकारों को लगा कि यमुना के सफाई पर कुछ नया भले न निकले लेकिन एक नए विवाद का जिन्न तो निकल ही आएगा।
लेकिन आधे घंटे की बैठक के बाद जब जलसंसाधन मंत्री बाहर निकलीं तो हंसते बोलीं कि अरविंद केजरीवाल के बुलावे पर अब उमा भारती के साथ नितिन गडकरी, वेंकैया नायडू भी बैठक करेंगे ताकि यमुना सफाई को ठोस अमलीजामा पहनाया जा सके और गुजरात के साबरमती नदी की तरह यहां भी किसी को झूला झुलाया जा सके।
उन्होंने चुटकी ली, अब यमुना नदी के अच्छे दिन आ गए हैं। ये कहकर उनका काफिला आगे बढ़ गया। प्याज जैसे मुद्दों पर लड़ने वाली सरकारों के संबंधों में अच्छे दिन कैसे आ गए ये एक पहेली है। लेकिन इसके कुछ देर बाद दिल्ली सरकार के कानून मंत्री कपिल मिश्रा निकले। उन्होंने भी हंसते कहा कि 45 दिन में यमुना की सफाई का ब्लू प्रिंट तैयार होगा।
जब उनसे पूछा गया कि 4000 हज़ार करोड़ खर्च होने के बाद जो नदीं साफ नहीं हो पाई वो कैसे साफ होगी। तो उनका कहना था कि केंद्र और राज्य सरकार साथ काम करेंगे और इस बार नदी बिना पैसों के साफ होगी। जानकार कहते हैं कि यमुना की सफाई केंद्र और राज्य सरकार के लिए अहम राजनीतिक मुद्दा है। इसी के वजह से बात-बात में आरोपों की बौछार करने वाली दोनों पार्टियां अब एक पेज पर दिख रही है।
यमुना नदी की साफ-सफाई अभी भले नहीं शुरू हो पाई हो लेकिन इन दोनों राजनीतिक पार्टियों के राजनीतिक दुराग्रहों की सफाई जरूर शुरू हो गई है। जनता को बनावटी विवादों में उलझाकर वास्तिविक समस्याओं से दूर रखने की रणनीति हर पार्टी के लिए कारगर रही है। लेकिन आपको ये समझना होगा कि यमुना नदीं को कोई पार्टी नहीं साफ कर सकती है जब तक आपके अंदर नदियों की सफाई के प्रति चिंता नहीं होगी।
यमुना नदी को साफ-सुथरा करने के लिए शनिवार सुबह 11.30 बजे उमा भारती दिल्ली सचिवालय की ड्योढ़ी लांघकर बैठक के लिए पहुंची। तो बाहर जमा पत्रकारों को लगा कि यमुना के सफाई पर कुछ नया भले न निकले लेकिन एक नए विवाद का जिन्न तो निकल ही आएगा।
लेकिन आधे घंटे की बैठक के बाद जब जलसंसाधन मंत्री बाहर निकलीं तो हंसते बोलीं कि अरविंद केजरीवाल के बुलावे पर अब उमा भारती के साथ नितिन गडकरी, वेंकैया नायडू भी बैठक करेंगे ताकि यमुना सफाई को ठोस अमलीजामा पहनाया जा सके और गुजरात के साबरमती नदी की तरह यहां भी किसी को झूला झुलाया जा सके।
उन्होंने चुटकी ली, अब यमुना नदी के अच्छे दिन आ गए हैं। ये कहकर उनका काफिला आगे बढ़ गया। प्याज जैसे मुद्दों पर लड़ने वाली सरकारों के संबंधों में अच्छे दिन कैसे आ गए ये एक पहेली है। लेकिन इसके कुछ देर बाद दिल्ली सरकार के कानून मंत्री कपिल मिश्रा निकले। उन्होंने भी हंसते कहा कि 45 दिन में यमुना की सफाई का ब्लू प्रिंट तैयार होगा।
जब उनसे पूछा गया कि 4000 हज़ार करोड़ खर्च होने के बाद जो नदीं साफ नहीं हो पाई वो कैसे साफ होगी। तो उनका कहना था कि केंद्र और राज्य सरकार साथ काम करेंगे और इस बार नदी बिना पैसों के साफ होगी। जानकार कहते हैं कि यमुना की सफाई केंद्र और राज्य सरकार के लिए अहम राजनीतिक मुद्दा है। इसी के वजह से बात-बात में आरोपों की बौछार करने वाली दोनों पार्टियां अब एक पेज पर दिख रही है।
यमुना नदी की साफ-सफाई अभी भले नहीं शुरू हो पाई हो लेकिन इन दोनों राजनीतिक पार्टियों के राजनीतिक दुराग्रहों की सफाई जरूर शुरू हो गई है। जनता को बनावटी विवादों में उलझाकर वास्तिविक समस्याओं से दूर रखने की रणनीति हर पार्टी के लिए कारगर रही है। लेकिन आपको ये समझना होगा कि यमुना नदीं को कोई पार्टी नहीं साफ कर सकती है जब तक आपके अंदर नदियों की सफाई के प्रति चिंता नहीं होगी।
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