यासीन भटकल की फाइल तस्वीर
- हैदराबाद के दिलसुखनगर में हुए धमाकों में 18 लोगों की मौत हुई थी
- पहली बार इंडियन मुजाहिदीन के शीर्ष आतंकियों को सजा दी गई है
- मामले की सुनवाई शुरू होने के बाद करीब 150 गवाहों से पूछताछ की गई
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हैदराबाद:
इंडियन मुजाहिदीन के सह-संस्थापक यासीन भटकल और चार अन्य को साल 2013 में हैदराबाद के दिलसुखनगर में हुए दोहरे बम धमाके के मामले में मौत की सजा सुनाई गई है.
दिलसुखनगर के भीड़ भरे बाजार वाले इलाके में हुए इन धमाकों में 18 लोगों की मौत हो गई थी और 130 घायल हो गए थे. यह पहली बार है जब यासीन भटकल सहित इसके शीर्ष आतंकियों को किसी आतंकी हमले में दोषी ठहराया गया.
साल 2010 में इंडियन मुजाहिदीन को आतंकी संगठन घोषित कर उसे प्रतिबंधित कर दिया गया था.
साल 2013 में ही भटकल को बिहार में नेपाल से लगती सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया था. इंडियन मुजाहिदीन का एक अन्य शीर्ष आतंकी रियाज भटकल भारत के मोस्टवांटेड लिस्ट में है और समझा जाता है कि वह पाकिस्तान में रह रहा है.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के प्रमुख शरद कुमार ने पिछले हफ्ते एनडीटीवी को बताया था. 'यह पहली बार है जब इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों को दोषी ठहराया गया. वे (इंडियन मुजाहिदीन) देशभर में हमलों की साजिश रच रहे थे.'
एनआईए ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि इंडियन मुजाहिदीन देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रच रहा था.
हैदराबाद के दोहरे घातक बम धमाकों से पहले इन पांचों ने कथित तौर पर शहर के बाहरी इलाके में एक पहाड़ी पर टेस्ट के तौर पर भी धमाका किया था. उन्होंने इन धमाकों की साजिश रचने के दौरान इंटरनेट पर लंबी बातचीत के लिए प्रॉक्सी सर्वरों को इस्तेमाल किया था. पिछले साल मामले की सुनवाई शुरू होने के बाद करीब 150 गवाहों से पूछताछ की गई.
दिलसुखनगर के भीड़ भरे बाजार वाले इलाके में हुए इन धमाकों में 18 लोगों की मौत हो गई थी और 130 घायल हो गए थे. यह पहली बार है जब यासीन भटकल सहित इसके शीर्ष आतंकियों को किसी आतंकी हमले में दोषी ठहराया गया.
साल 2010 में इंडियन मुजाहिदीन को आतंकी संगठन घोषित कर उसे प्रतिबंधित कर दिया गया था.
साल 2013 में ही भटकल को बिहार में नेपाल से लगती सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया था. इंडियन मुजाहिदीन का एक अन्य शीर्ष आतंकी रियाज भटकल भारत के मोस्टवांटेड लिस्ट में है और समझा जाता है कि वह पाकिस्तान में रह रहा है.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के प्रमुख शरद कुमार ने पिछले हफ्ते एनडीटीवी को बताया था. 'यह पहली बार है जब इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों को दोषी ठहराया गया. वे (इंडियन मुजाहिदीन) देशभर में हमलों की साजिश रच रहे थे.'
एनआईए ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि इंडियन मुजाहिदीन देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रच रहा था.
हैदराबाद के दोहरे घातक बम धमाकों से पहले इन पांचों ने कथित तौर पर शहर के बाहरी इलाके में एक पहाड़ी पर टेस्ट के तौर पर भी धमाका किया था. उन्होंने इन धमाकों की साजिश रचने के दौरान इंटरनेट पर लंबी बातचीत के लिए प्रॉक्सी सर्वरों को इस्तेमाल किया था. पिछले साल मामले की सुनवाई शुरू होने के बाद करीब 150 गवाहों से पूछताछ की गई.
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