Kam Sone Ke Nuksan: नींद हमारे शरीर के लिए एक रीसेट बटन की तरह है. यह हमें दोबारा एनर्जी देती है, खराब कोशिकाओं को ठीक करती है और अगले दिन के काम के लिए तैयार करती है. लेकिन अगर हम रोज कम नींद लें तो क्या होता है? हैदराबाद के डॉक्टर सुधीर कुमार ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति लगातार 2 हफ्ते तक हर रात सिर्फ 6 घंटे सोता है, तो इसका दिमाग पर गंभीर असर पड़ता है.
उन्होंने X पर लिखा, “आप 6 घंटे सोकर अगर खुद को ‘ठीक' महसूस कर रहे हैं, तो यही असली समस्या है. कई स्टडी में पाया गया कि जो लोग 2 हफ्तों तक रोज 6 घंटे सोए, उनकी सोचने-समझने की क्षमता वैसी हो गई जैसे वे 24 से 48 घंटे तक जागते रहे हों. सबसे खतरनाक बात यह है कि उन्हें लगा कि वे सामान्य तरीके से काम कर रहे हैं. नींद की कमी आपको नशे में होने जैसा महसूस नहीं कराती, बल्कि आपको बेवजह आत्मविश्वासी बना देती है.”

1. ध्यान कम हो जाता है
कम नींद लेने से ध्यान लगाने की क्षमता घट जाती है. फोकस बनाए रखना मुश्किल हो जाता है, छोटी-छोटी गलतियां बढ़ जाती हैं और सतर्कता कम हो जाती है. लंबे समय तक नींद की कमी याददाश्त, सीखने की क्षमता और काम की प्रोडक्टविटी पर बुरा असर डालती है.
2. रिएक्शन टाइम धीमा हो जाता है
अगर आप 2 हफ्तों तक रोज सिर्फ 6 घंटे सोते हैं, तो आपकी प्रतिक्रिया देने की गति काफी धीमी हो जाती है. यह स्थिति वैसी ही होती है जैसे कोई व्यक्ति 24–48 घंटे से जाग रहा हो. इससे ध्यान, याददाश्त और फैसले लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है, और अक्सर व्यक्ति को इसका एहसास भी नहीं होता.
Sleeping 6 hours and feeling “fine”?
— Dr Sudhir Kumar MD DM (@hyderabaddoctor) February 27, 2026
That's the problem.
🔴In controlled studies, people restricted to 6 hours of sleep per night for 2 weeks performed cognitively like they had stayed awake for 24–48 hours straight.
Read that again.
▶️And here is the dangerous twist:
They… pic.twitter.com/HJK8puHUJP
3. वर्किंग मेमोरी कमजोर पड़ती है
वर्किंग मेमोरी यानी कम समय के लिए जानकारी को दिमाग में रखकर समझना और इस्तेमाल करना. नींद की कमी से नई चीजें सीखना मुश्किल हो जाता है और याद की गई बातें भी स्थिर नहीं रह पातीं.
4. फैसले लेने की क्षमता पर असर
कम नींद लेने वाले लोग सही और गलत का आकलन ठीक से नहीं कर पाते. वे जोखिम भरे फैसले ज्यादा लेने लगते हैं. साथ ही चिड़चिड़ापन, स्ट्रेस और मूड में अचानक बदलाव भी देखने को मिल सकता है.
डॉक्टर का कहना है कि आपको भले ही वीकनेस फील न हो, लेकिन आपका दिमाग जरूर असर झेल रहा होता है. कुछ लोग 6 घंटे की नींद को प्रोडक्टिविटी का तरीका मानते हैं, लेकिन यह दिमाग पर दबाव डालता है. ज्यादातर यंग लोगों को रोज 7 से 9 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है. यह सिर्फ आराम के लिए नहीं, बल्कि दिमाग के सही काम करने के लिए जरूरी है. डॉक्टर का कहना है कि, “नींद कोई ऑप्शन नहीं है, यह हर दिन दिमाग की मरम्मत का काम करती है.”
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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