सच कहें तो, हम सभी का मन जंक फूड खाने का करता है. जब हमारा मूड खराब होता है या फिर दिन खराब जा रहा होता है, तो सबसे पहले जंक फूड खाने का मन करता है. खासकर उन लोगों के लिए जिनकी नौकरी में बहुत ज्यादा प्रेशर रहता है, खाना सिर्फ भूख मिटाने का जरिया नहीं रह जाता. इसी तरह वजन बढ़ता है. ये बदलाव चुपचाप, धीरे-धीरे और लगभग बिना दिखे होता है, और एक दिन आपको एहसास होता है कि आप आईने में दिख रहे इंसान को पहचान ही नहीं पा रहे हैं.
कई दूसरे लोगों की तरह, ADSMITH के फाउंडर नीरज झा भी उसी जाल में फँस गए.
नीरज एक एंटरप्रेन्योर के तौर पर अपने करियर की जरूरतों और दबावों में बुरी तरह उलझे हुए थे. एक फाउंडर होने के नाते उन पर जो उम्मीदें थीं, उनके कारण उन्होंने लंबे समय तक अपनी सेहत को नजरअंदाज़ किया, जिसका नतीजा यह हुआ कि उनकी सेहत पूरी तरह बिगड़ गई. उनका वजन 144 किलो तक पहुँच गया था.
144 किलो वजन के साथ जीने की सच्चाई
जब आपका वजन इतना ज्यादा होता है, तो दुनिया अलग लगती है. यह छोटी लगने लगती है. नीरज के लिए, वजन का बढ़ना धीरे-धीरे हुआ. उन्होंने अपनी वेट लॉस जर्नी अपने इंस्टाग्राम पर शेयर की है. हाल ही में अपलोड एक वीडियो में उन्होंने बताया कि फेलियर प्रॉब्लम नहीं है बल्कि क्विट करना असल दिक्कत है. जब लोग हार मान जाते हैं और छोड़ देते हैं तब परेशानी शुरू होती है.
बिना डायटिशियन और जिम ट्रेनर के घटाया 65 किलो वजन....
नीरज ने पहले भी वजन कम करने की कोशिश की थी. हम सभी के साथ ऐसा होता है. आप सोमवार को पूरे जोश के साथ शुरुआत करते हैं, लेकिन गुरुवार तक जिंदगी की दूसरी चीजें आड़े आ जाती हैं. नीरज के लिए तो यह और भी निराशाजनक था. जब भी वह खुद को आगे बढ़ाने की कोशिश करते, उनका शरीर बुरा रिस्पॉन्स देता. वो बीमार पड़ जाते या उन्हें चोट लग जाती, और उन्हें रुकना पड़ता.
उन्होंने अपनी एक रील को पोस्ट करते हुए लिखा कि 50 साल की उम्र में, मेरा वजन बहुत ज्यादा था, मैं एक ही जगह अटका हुई फील करता था और थका-थका रहता था.
53 साल की उम्र में, मुझमें 30s की उम्र के मुकाबले ज्यादा एनर्जी है.
कोई शॉर्टकट नहीं. कोई बहुत हार्ड डाइट नहीं. बस छोटे-छोटे चेंज, जिन्हें लगातार किया गया. शुरुआत करने के लिए कभी भी देर नहीं होती.
नीरज ने अपनी पोस्ट में बताया कि वो कौन सी 3 चीजें हैं जो आपको हमेशा ओवरवेट बनाए रखेंगी.
चीनी
ब्लड शुगर तेजी से बढ़ाती है → फिर तेजी से गिरता है → क्रेविंग होती है → आप जरूरत से ज्यादा खाते हैं.
बेकरी आइटम
मैदा + चीनी + फैट → पेट भरने का एहसास कम होता है → आसानी से ज्यादा खा लेते हैं → कैलोरी बढ़ जाती है.
पैकेज्ड फूड
इन्हें इस तरह बनाया जाता है कि इनकी लत लग जाए → आप रुकते नहीं → लगातार स्नैकिंग करते रहते हैं → कैलोरी पर कोई कंट्रोल नहीं रहता.
आपको मेटाबॉलिज्म की समस्या नहीं है. आपकी फूड च्वाइस एक प्रॉबल्म है.
इन्हें ठीक करें! और पूरी तरह से बदली हुई लाइफ जिएं.
नीरज ने बताया की खुद को डिसीप्लिन रखने के लिए आपको 3 आदतें जो जरूर अपनानी चाहिए-
1. 5-मिनट का नियम
मोटिवेटेड महसूस करने का इंतजार करना बंद करें. बस शुरू करें... भले ही सिर्फ 5 मिनट के लिए ही क्यों न हो. ज्यादातर दिनों में, शुरुआत करना ही सबसे मुश्किल काम होता है. एक बार जब आप शुरू कर देते हैं, तो आमतौर पर आप इसे जारी रखते हैं. और अगर आप जारी नहीं भी रख पाते, तो भी आपने कोशिश तो की. अनुशासन ऐसे ही बनता है.
2. अपने माहौल को ठीक करें
जब आपका माहौल आपको सपोर्ट करता है, तो अनुशासन बनाए रखना आसान हो जाता है. अपने आस-पास से जंक फूड हटा दें. अपने वर्कआउट के जूते तैयार रखें ताकि बाहर निकलना आसान लगे. सिर्फ विलपॉवर पर निर्भर न रहें. अच्छी आदतों को अपनाना आसान और बुरी आदतों को अपनाना मुश्किल बनाएं.
3. अपनी पहचान बदलें
यह सोचना बंद करें कि "मैं अनुशासित बनने की कोशिश कर रहा हूँ." यह सोचना शुरू करें कि "मैं एक अनुशासित व्यक्ति हूँ." एक अनुशासित व्यक्ति खुद से कोई मोल-भाव नहीं करता. वह वही करता है जो जरूरी है... चाहे उसका मन हो या न हो.
ज्यादातर लोग इसलिए संघर्ष नहीं करते कि उनमें कोशिश की कमी है... बल्कि इसलिए कि वे गलत काम कर रहे होते हैं। इन 3 चीजों को ठीक करें, और सब कुछ बदल जाएगा.
नीरज ने अपनी10 ऐसी आदतों के बारे में बताया जिनसे उन्हें 60 किलो से ज्यादा वजन कम करने में मदद मिली-
1. हर खाने में प्रोटीन को मेन पार्ट बनाया.
2. कार्ब्स को पूरी तरह छोड़ने के बजाय उनकी क्वांटिटी कम की.
3. कैलोरी वाली ड्रिंक्स पीना बंद कर दिया.
4. हर दिन पैदल चले.
5. धीरे-धीरे और ध्यान से खाना खाया.
6. पेट बहुत ज्यादा भरने तक नहीं, बल्कि बैलेंस डाइट ली.
7. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड स्नैक्स को अपनी रूटीन से हटा दिया.
8. मोटिवेशन का इंतजार करने के बजाय डिसिप्लिन (अनुशासन) बनाया.
9. सेहत को रोजाना की एक जरूरी प्राथमिकता बनाया.
10. परफेक्शन के बजाय कंसिस्टेंसी (निरंतरता) पर ध्यान दिया.
नीरज की वेट लॉस जर्नी से ये एक बात साफ समझ में आती है कि वेट लॉस के लिए आपको जिम, डायटिंग से ज्यादा जरूरत होती है खुद के डिसीप्लिन की.
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