नवरात्रि आते ही गुजरात का कच्छ उत्सव, संस्कृति और परंपराओं के रंग में पूरी तरह रंग जाता है. दिन ढलते ही गांवों, कस्बों और शहरों में गरबा और डांडिया की धुनें गूंजने लगती हैं. पारंपरिक कच्छी परिधान, लोक संगीत और रंग-बिरंगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पूरे क्षेत्र को जीवंत बना देती हैं. यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान कच्छ न सिर्फ देश बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है.
सफेद रण और लोककला का अनोखा संगम
कच्छ की पहचान सिर्फ धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है. यहां का सफेद रण, ऐतिहासिक विरासत, पारंपरिक कारीगरी और लोक संस्कृति इसे खास बनाती है. कच्छी कढ़ाई, रोगन कला, हस्तशिल्प और लोक संगीत यहां की पहचान हैं. पर्यटक इन कलाओं को करीब से देखने और स्थानीय कलाकारों से मिलने के लिए दूर-दूर से आते हैं.

ग्रामीण जीवन को करीब से देखने का मौका
विदेशी पर्यटकों को कच्छ का ग्रामीण जीवन विशेष रूप से आकर्षित करता है. पारंपरिक गांव, कारीगर बस्तियां, ऊंट सफारी और रेगिस्तानी नजारे उन्हें एक अलग अनुभव देते हैं. यहां आने वाले मेहमान स्थानीय लोगों के बीच समय बिताकर भारतीय जीवनशैली और संस्कृति को समझने की कोशिश करते हैं. उनकी नजर में कच्छ आधुनिकता और परंपरा का अनोखा मेल है.

धोलावीरा से मांडवी तक पर्यटन की खास पहचान
कच्छ में कई ऐसे स्थल हैं जो विदेशी सैलानियों की पसंदीदा सूची में शामिल रहते हैं. यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल धोलावीरा, ग्रेट रण ऑफ कच्छ, काला डूंगर, मांडवी और हस्तशिल्प गांव हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. नवरात्रि और पर्यटन सीजन के दौरान यहां विदेशी मेहमानों की मौजूदगी और अधिक बढ़ जाती है.
कच्छ की यात्रा भारतीय खान-पान के बिना अधूरी मानी जाती है. गुजराती थाली, ढोकला, थेपला, फाफड़ा, जलेबी, खिचड़ी-कढ़ी और बाजरे की रोटली विदेशी मेहमानों को खूब पसंद आती है. कई पर्यटक भारतीय मसालों और शाकाहारी व्यंजनों को अपने सफर का यादगार हिस्सा बताते हैं.

दर्शक नहीं बल्कि संस्कृति के सहभागी बनते हैं पर्यटक
नवरात्रि के दौरान सबसे दिलचस्प बात यह होती है कि पर्यटक केवल कार्यक्रम देखने तक सीमित नहीं रहते. वे गरबा और डांडिया में हिस्सा लेते हैं और स्थानीय लोगों के साथ उत्सव का आनंद उठाते हैं. यही अनुभव उन्हें भारतीय संस्कृति से गहराई से जोड़ता है. कुल मिलाकर नवरात्रि के दौरान कच्छ केवल एक पर्यटन स्थल नहीं रह जाता बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा, कला, स्वाद और मेहमाननवाजी का जीवंत परिचय बन जाता है. यही वजह है कि यहां आने वाले विदेशी सैलानी बार-बार इस क्षेत्र की ओर खिंचे चले आते हैं.
यह भी पढ़ें- '500 रुपये में 1 घंटे का गरबा नाइट पार्टनर', कानपुर में वायरल हुआ अनोखा पोस्टर
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं