मौजूदा वर्ल्ड कप में केप वेर्दे और कुरासाओ जैसे छोटे देशों ने पहली बार वर्ल्ड कप खेलते हुए धूम मचाई तो सिर्फ़ चौथी बार वर्ल्ड कप खेल रहे नॉर्वे और मैनचेस्टर सिटी के सुपरस्टार हालैंड ने भारतीय खेलप्रेमियों के दिल में ख़ास जगह बना ली है. हालैंड के ख़ाने-पीने, मेडिटेशन-योग, गाने-चिढ़ाने से लेकर तरह-तरह की आदतों-हरकतों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त तरीके से वायरल हैं.
कई भारतीय फ़ुटबॉलर हालैंड की तुलना लियोनेल मेसी, किलियान एमबाप्पे और क्रिस्टियानो रोनाल्डो से भी कर रहे हैं. दुनिया भर में कई फ़ैन्स हालैंड की वजह से नॉर्वे को वर्ल्ड कप ख़िताब का सबसे मज़बूत दावेदार भी मान रहे हैं.
एशिया, भारत से- ‘मेसी की तरह हालैंड को भारत लाने की कोशिश करुंगा'
पिछले साल लियोनेल मेसी को भारत लाने वाले स्पोर्ट्स उद्यमी और फ़ुटबॉल के सुपरफ़ैन सताद्रु दत्ता कहते हैं, “हालैंड भारत में एक नया सेनसेशन हैं. मैंने पिछले साल मैनचेस्टर सिटी के स्टेडियम में चेल्सी के ख़िलाफ़ उन्हें खेलते देखा था. उस मैच में भी उन्होंने गोल किया था. वो मेसी या रोनाल्डो तो नहीं लेकिन गोल मशीन हैं. वो अपने फ़िज़िकल स्टैमिना से ही आधा काम ख़त्म कर देते हैं.”
सताद्रु ये भी कहते हैं, “मैं उन्हें EPL- इंग्लिश प्रीमियर लीग के क्रिसमस ब्रेक में भारत लाने की कोशिश करुंगा. मुझे लगता है फ़ाइनल में फ़्रांस के साथ नॉर्वे भी जाएगा. हालैंड में ग़ज़ब की फ़िज़िकल ताक़त है. वो एक बीस्ट (तगड़ा जानवर) की ताक़त रखते हैं. भारतीय खेलप्रेमी उन्हें बहुत पसंद कर रहे हैं.”
हालैंड को वैसे भारत का खाना ख़ासकर बटर चिकन बहुत पसंद है. वो 2016 में भारत आकर अंडर-16 टीम से खेलते हुए भारत के ख़िलाफ़ गोल भी कर चुके हैं.
यूरोप, हॉलैंड से- ‘नॉर्वे जाकर देखना है वर्ल्ड कप का फ़ाइनल'
अक्षय मोदक नीदरलैंड्स या हॉलैंड में उत्रेक़ (Utrecht) में रहते हैं. मगर नॉर्वे की जीत के बाद फ़ाइनल नॉर्वे जाकर देखने का ही प्लान कर रहे हैं. अक्षय मोदक खुद भी एक जुनूनी फ़ुटबॉलर रहे हैं. अक्षय ने अपने फुटबॉल जीवन पर आधारित एक किताब- The Dreamer: A Journey of Unbecoming लिखी है.
करोड़ों दूसरे भारतीय की तरह अक्षय भी मेसी और रोनाल्डो के दीवाने रहे हैं. मगर हालैंड के खेल ने उनका भी दिल जीत लिया है. वो कहते हैं, “ख़ासकर हॉलैंड (नीदरलैंड्स) के बाहर होने के बाद यहां के लोग मायूस हैं. लेकिन फ़ुटबॉलर हालैंड के खेल ने यहां भी उनकी दीवानगी बढ़ा दी है. अगर नॉर्वे फ़ाइनल में पहुंचता है तो मैं कुछ दोस्तों के साथ नॉर्वे जाकर उनका मै देखने के प्लान बना रहा हूं. नॉर्वे जाकर फ़ैन्स के VIKING ROW देखने का मज़ा ही कुछ अलग होगा.”
34 साल के अक्षय ने 5 साल पहले हॉलैंड के एक क्लब VV Bennekom (हॉलैंड के रिज़र्व डिविज़न का फ़र्स्ट क्लास क्लब) के विंगर के रूप में फ़ुटबॉल खेलना शुरू किया. इससे पहले अक्षय इंजिनियरिंग और एमबीए करके भारत में कॉरपोरेट जॉब करते हुए फ़ुटबॉल खेलने की कोशिश करते रहे. यहां से स्पेन भी गए. लेकिन तीन साल की रगड़ाई के बाद इन्हें आख़िरकार हॉलैंड में सेमी-प्रोफ़ेशनल फ़ुटबॉल खेलने का मौक़ा मिला. अब नॉर्वे की ऐतिहासिक जीत से अक्षय के फ़ुटबॉल की दुनिया में एक नया जोश आ गया है.
अमेरिका, लॉस एंजेल्स से- ‘हालैंड को देखने के लिए कितने भी महंगे टिकट खरीदूंगा!'
अमेरिका के लॉस एंजेल्स में रह रहे फुटबॉलप्रेमी और सॉफ्टवेयर इंजीनियर सौरभ कुमार कहते हैं, “मैंने बिहार के नेतरहाट स्कूल (अब झारखंड) से पढ़ाई की. फिर कानपुर IIT चला गया. सभी दूसरे बच्चों की तरह क्रिकेट, सुनील गावस्कर, कपिलदेव, सचिन तेंदुलकर और एमएस धोनी से लेकर विराट कोहली और रोहित शर्मा तक सभी मेरे भी घर की आदतों में शुमार हैं.”
सौरभ कहते हैं, “क्रिकेट की बात अलग है लेकिन 1986 में पहली बार वर्ल्ड कप फ़ुटबॉल के मैचों को पहली बार टीवी पर देखा तो डिएगो मैराडोना का दीवाना हो गया. फिर प्लाटिनी, कारेका, क्लिन्समैन, लोथार मैथ्यूज़, रोमारियो, बैजियो, रॉजर मिला, मेसी, रोनाल्डो और नेयमार जैसे धुरंधर महान पेले के रेफ़रेंस प्वाइंट बन गए.”
सौरभ बताते हैं कि कैसे अब नॉर्वे के हालैंड की अमेरिका में भी हर जगह ज़ोर-शोर से चर्चा हो रही है. वो कहते हैं, “मौजूदा वर्ल्ड कप में नॉर्वे के जाएंट बीस्ट 6 फ़ीट 5 इंच ऊंचे हालैंड तो कमाल के नज़र आ रहे हैं. क्या कैरेक्टर हैं! वो यहां रह रहे सभी भारतीय फ़ुटबॉल फ़ैन्स के ड्राइंग रूम में चर्चा का विषय बन गए हैं. लगता है उनकी वजह से नॉर्वे वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में पहुंचकर इतिहास बना सकता है. टिकट कितने भी महंगे हुए तो मुझ जैसे कई भारतीय हालैंड को स्टेडियम में देखने का मौक़ा नहीं छोड़ने वाले हैं.”
दक्षिण अमेरिका, पेरू से- ‘कोई भी टीम फ़ाइनल से पहले फ़ुटबॉलर हालैंड से नहीं टकराना चाहती'
पेरू की राजधानी लीमा में 15 साल रहे अनुज कहते हैं, “यहां सब अर्जेन्टीना और ब्राज़ील के ही फ़ैन हैं. ब्राज़ील के बाहर होने से यहां लोगों को बहुत बुरा लग रहा है. लेकिन स्टार फ़ुटबालर हालैंड को लेकर ज़रूर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है. यहां कोई नहीं चाहता कि उसकी फ़ेवरेट टीम की टक्कर नॉर्वे या हालैंड की टीम से फ़ाइनल से पहले हो जाए.”
अफ़्रीका, प्रिटोरिया- ‘यहां भारतीय चाहते हैं कि हालैंड फ़ाइनल खेलें'
दक्षिण अफ़्रीका के कनाडा से राउंड ऑफ़ 32 में हार से वहां भी फ़ैन्स में मायूसी है. मगर दक्षिण अफ़्रीका के प्रिटोरिया में रहने वाले क्रिकेटर और फ़ुटबॉलप्रेमी मुनाफ़ पटेल कहते हैं, “मेरा पहला प्यार तो क्रिकेट ही है. मेरे दोनों बच्चे- बेटा और बेटी दोनों ऊंचे स्तर पर क्रिकेट खेलते हैं. मेरा बेटा कैफ़ पटेल सेकेंड डिविज़न में अच्छा बैट्समैन है. बेटी अलीमा पटेल भी विकेटकीपर और ओपनिंग बैटर है. लेकिन हम सब फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप के लगभग सारे मैच देख रहे हैं. दक्षिण अफ़्रीका के बाहर होने से थोड़ी दिलचस्पी ज़रूर कम हुई है. लेकिन यहां रहनेवाले भारतीय मेसी और रोनाल्डो के साथ हालैंड के भी बड़े फ़ैन बनते जा रहे हैं.”
मुनाफ़ कहते हैं, “हालैंड एक बेहद अच्छे स्ट्राइकर हैं. वो टॉप गोलस्कोरर और इंपैक्टफ़ुल प्लेयर हैं. वो बेहद फ़्रेंडली कैरेक्टर हैं. उनमें घमंड या एटीट्यूड नहीं है. लोग चाहते हैं कि वो फ़ाइनल में पहुंचें और हम उनका मैच एक साथ बड़े स्क्रीन पर देखें.”
ऑस्ट्रेलिया, सिडनी- ‘हालैंड की वजह भारतीय कर रहे हैं पार्टी!'
सिडनी में रह रहे वरुण अचरेजा एक स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कंपनी चलाते हैं. राउंड ऑफ़ 32 में इजिप्ट के हाथों हार के बाद ऑस्ट्रेलिया में रह रहे कई भारतीय खेलप्रेमियोंका दिल भी टूट गया. वरुण कहते हैं कि अब उनकी दिलचस्पी ख़ासकर हालैंड और फ़्रांस को लेकर बनी हुई है.
वरुण कहते हैं, “हालैंड मेरे ख़्याल से आनेवाले वक्त में मैराडोना, मेसी और रोनाल्डो जितने महान खिलाड़ियों में गिने जाएंगे. हालैंड को लेकर यहां फ़ुटबॉलप्रेमियों में फिर से जोश दिखने लगा है. अब कम के कम नॉर्वे के मैच को यहां के भारतीय फिर से एकजुट होकर बड़े स्क्रीन पर मैच देखना चाहते हैं. हालैंड ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीयों के लिए पार्टी की वजह बन गए हैं.”
मुंबई, भारत- ‘नॉर्वे पहुंचा तो फ़ाइनल अमेरिका में ही देखूंगा!'
राहुल एडी मुंबई में एक मार्केटिंग प्रोफ़ेशनल और जुनूनी फ़ुटब़ल फ़ैन हैं जो लीग स्टेज में अमेरिका जाकर वर्ल्ड कप फ़ुटबॉल के मैच देख रहे थे. वो कहते हैं, “मैंने अमेरिका के बॉस्टन स्टेडियम (जिलेट स्टेडियम) में फ़्रांस और नॉर्वे का मैच भी देखा, जहां फ़्रांस ने नॉर्वे को 4-1 से हरा दिया. सच कहूं तो तब नॉर्वे को लेकर ये अंदाज़ा नहीं था.”
वो बताते हैं, “नॉकआउट स्टेज में नॉर्वे अब एक अलग मोमेंटम में नज़र आ रहा है. अगर नॉर्वे फ़ाइनल में पहुंचा तो नतीजा पलट भी सकता है. नॉर्वे को फ़ाइनल का टिकट मिला तो अमेरिका जाकर ही वर्ल्ड कप ट्रॉफ़ी का निर्णायक (फ़ाइनल) मैच देखूंगा.”
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं