Khurja Ki Khurchan Mithai: खुर्जा की खुरचन का नाम सुनते ही दूध की खुशबू, मलाई की परतें और दशकों पुरानी पारंपरिक मिठास की याद ताजा हो जाती है. यही वजह है कि यह मिठाई आज भी लोगों के बीच उतनी ही लोकप्रिय है जितनी सालों पहले थी. उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में स्थित खुर्जा अपनी पॉटरी के साथ-साथ इस खास मिठाई के लिए भी पूरे देश में जाना जाता है. यहां आने वाले पर्यटक अक्सर खुरचन का स्वाद चखे बिना वापस नहीं लौटते.
क्या होती है खुरचन?
खुरचन दूध से बनने वाली एक पारंपरिक मिठाई है. इसे तैयार करने के लिए बड़े कड़ाह में दूध को कई घंटों तक धीमी आंच पर पकाया जाता है. पकने के दौरान दूध की मलाई किनारों पर जमती रहती है, जिसे सावधानी से निकालकर परतों के रूप में जमा किया जाता है. यही मलाई की परतें आगे चलकर खुरचन का रूप लेती हैं.
115 साल पुरानी परंपरा
खुर्जा में कई परिवार दशकों से इसी पारंपरिक तरीके से खुरचन बना रहे हैं. माना जाता है कि यहां खुरचन बनाने की परंपरा 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है. आज भी कई दुकानों पर वही पुराने तरीके अपनाए जाते हैं, जिससे इसका असली स्वाद बरकरार रहता है.
स्वाद में क्यों है खास?
खुरचन का स्वाद इसकी सादगी में छिपा है. इसमें दूध की प्राकृतिक मिठास और मलाई का गाढ़ापन महसूस होता है. यह न ज्यादा मीठी होती है और न ही बहुत भारी. इसकी मुलायम बनावट और दूधिया स्वाद इसे दूसरी मिठाइयों से अलग बनाते हैं.
पॉटरी के साथ बढ़ी पहचान
खुर्जा देशभर में अपनी सिरेमिक और पॉटरी इंडस्ट्री के लिए प्रसिद्ध है. यहां आने वाले पर्यटक अक्सर पॉटरी खरीदने के साथ खुरचन भी जरूर खाते हैं. यही वजह है कि समय के साथ यह मिठाई शहर की पहचान का अहम हिस्सा बन गई.
त्योहार हो, शादी-ब्याह हो या फिर किसी खास मेहमान के लिए मिठाई ले जानी हो, खुर्जा की खुरचन आज भी लोगों की पसंद बनी हुई है.
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