
फिल्म 'सोनाली केबल' एक लड़की सोनाली की कहानी है, जो मुंबई के एक इलाके में ब्रॉडबैंड के जरिये 3,000 घरों को इंटरनेट कनेक्शन देती है... सोनाली की भूमिका निभाई है रिया चक्रवर्ती ने, और इस केबल नेटवर्क को चलाने में उनका साथ दे रहे उनके ब्वॉयफ्रेंड बने हैं अली फज़ल... मगर एक दिन एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी 'सोनाली केबल' को खत्म कर अपना नेटवर्क फैलाना चाहती है, और फिल्म में कंपनी का नाम है शाइनिंग इंडिया... इसके बाद शुरू होती है 'सोनाली केबल' और शाइनिंग इंडिया की टक्कर...
फिल्म में विषय अच्छा उठाया गया है, कि बड़े कॉरपोरेट हाउसों ने पैसों के दम पर किस तरह लघु उद्योगों का सफाया किया है... बड़ी कंपनियां किस तरह अपना जाल फैलाती हैं, छोटी कंपनियों को खत्म करने के लिए... किस तरह कॉरपोरेट हाउस साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाते हैं, और अपने पैसों के दम पर 'लीडर से लेकर लेजर सिस्टम तक' सबको खरीद लेते हैं...
मगर अफसोस यह रहा कि विषय जितना गंभीर और अच्छा है, फिल्म की कहानी उतनी ही बिखरी हुई है... इतने गंभीर विषय को लेकर बनाई गई फिल्म में बहुत बड़ी कंपनी के मालिक को कॉमेडियन बना दिया गया है, और वह भूमिका निभाई है दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने... फिल्म में रोमांस का हिस्सा अच्छा है... सोनाली केबल को बचाने की जद्दोजहद भी अच्छी है और रिया चक्रवर्ती और अली फज़ल का अभिनय भी ठीक है, लेकिन कहानी काफी अजीब मोड़ों से गुज़रती है, जिसकी दरअसल ज़रूरत ही नहीं थी... या यूं कहिए, कहानी बिना वजह इधर-उधर भटकती है... फिल्म में सोनाली के पिता का किरदार क्यों है, यह भी समझ से पूरी तरह बाहर है... अचानक स्टिंग ऑपरेशन का टेप कहां से आया, वह भी समझना संभव नहीं... ऐसी कई चीज़ें हैं, जो फिल्म को उसके मूल मुद्दे और उसकी कहानी से भटकाती रहती हैं...
'सोनाली केबल' की कहानी चुनी गई है, मुंबई मंत्रा सुन्दान्स इंस्टीट्यूट स्क्रीन राइटर्स लैब के जरिये, जहां ढेरों कहानियों में से इस कहानी को चुना गया, फिल्म बनाने के लिए... हां, फिल्म में एक बात बताई गई है कि छोटी-सी चींटी भी हाथी से तांडव करवा सकती है, जो सच भी है। मेरे नजरिये से 'सोनाली केबल' एक अच्छे सब्जेक्ट के साथ कमज़ोर कहानी पर बनी है, इसलिए इस फिल्म के लिए मेरी रेटिंग है - 2 स्टार...
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