
मुंबई:
इस शुक्रवार रिलीज़ हुई है 'ABCD 2' जो 2013 में आई ABCD की सीक्वेल है। इसे डायरेक्ट किया है, रेमो डिसूज़ा ने, जिनके इशारों पर नाचते नज़र आएंगे वरुण धवन, श्रद्धा कपूर। प्रभु देवा मेहमान भूमिका में हैं, इन्हें जज करते हुए खुद रेमो और उनके साथ हैं टेरेंस लुईस। फ़िल्म डांस पर आधारित है ये आपको भी पता है। इससे ज़्यादा कुछ बता पाना मुश्किल है। बात खामियों और खूबियों की।
इस फिल्म की सबसे बड़ी खामी है, इसकी कमजोर कहानी, जिसमें आपको बिलकुल नयापन नहीं दिखेगा और शायद इसलिए मुझे निर्देशक रेमो का निर्देशन समझने में ज़रा दिक्कत पेश आई। वो कहानी को घिसी-पिटी हुई शुरुआत तो देते हैं और इससे पहले कि वह फ़िल्म के लिए घातक हो जाए फ़ौरन इससे बाहर भी निकल आते हैं पर सवाल है ऐसा करने की उन्हें क्या ज़रूरत थी, क्योंकि इसके कारण फिल्म का मजा खराब होता है।
हालांकि ये बात भी सही है कि ऐसी फिल्मों में कहानी के लिए ज्यादा जगह नहीं होती। बात फिल्म की लंबाई की करें तो फिल्म लंबी है पर आपको खलेगी नहीं, हां पर कुछ सीन्स काटे जा सकते थे, जिसका फिल्म पर इसका कोई ख़ास असर नहीं पड़ता।
बात खूबियों की करें तो 'ABCD 2' हिन्दी सिनेमा की इकलौती फिल्म है, जो पूरी तरह डांस को समर्पित है। डायरेक्टर ने भले ही फिल्म की स्क्रिप्ट पर ज्यादा जोर नहीं दिया हो पर वह अपनी फिल्म में डांस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले गए हैं।
डांस के दौरान वरुण की ऊर्जा और श्रद्धा की पूर्णता यानी परफ़ेक्शन कमाल की है। इनकी मेहनत पर्दे पर साफ नजर आती है। वहीं प्रभु देवा का डांस और उनके वरुण के साथ किए गए डांस स्टेप्स आपके चेहरे पर मुस्कान बिखेरेंगे। डांस को खूबसूरती से उभारने वाली सिनेमेटोग्राफ़ी और उम्दा संगीत, गाने कमाल हैं।
तारीफ यहां निर्देशक रेमो डिसूजा की करनी जरूरी है, जिन्होंने बड़ी खूबसूरती से गणेश स्तुति और देशभक्ति गीत पर हिप हॉप शैली में डांस कंपोज़ किया है। इस फिल्म की प्रोडक्शन क्वॉलिटी पहली ABCD के मुक़ाबले भव्य है। अगर आपको डांस पसंद है तो फिल्म जरूर देखें। हां, पर फिल्म से कॉमेडी या पक्की कहानी की उम्मीद मत रखिएगा। मेरी ओर से फ़िल्म को 3.5 स्टार्स।
इस फिल्म की सबसे बड़ी खामी है, इसकी कमजोर कहानी, जिसमें आपको बिलकुल नयापन नहीं दिखेगा और शायद इसलिए मुझे निर्देशक रेमो का निर्देशन समझने में ज़रा दिक्कत पेश आई। वो कहानी को घिसी-पिटी हुई शुरुआत तो देते हैं और इससे पहले कि वह फ़िल्म के लिए घातक हो जाए फ़ौरन इससे बाहर भी निकल आते हैं पर सवाल है ऐसा करने की उन्हें क्या ज़रूरत थी, क्योंकि इसके कारण फिल्म का मजा खराब होता है।
हालांकि ये बात भी सही है कि ऐसी फिल्मों में कहानी के लिए ज्यादा जगह नहीं होती। बात फिल्म की लंबाई की करें तो फिल्म लंबी है पर आपको खलेगी नहीं, हां पर कुछ सीन्स काटे जा सकते थे, जिसका फिल्म पर इसका कोई ख़ास असर नहीं पड़ता।
बात खूबियों की करें तो 'ABCD 2' हिन्दी सिनेमा की इकलौती फिल्म है, जो पूरी तरह डांस को समर्पित है। डायरेक्टर ने भले ही फिल्म की स्क्रिप्ट पर ज्यादा जोर नहीं दिया हो पर वह अपनी फिल्म में डांस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले गए हैं।
डांस के दौरान वरुण की ऊर्जा और श्रद्धा की पूर्णता यानी परफ़ेक्शन कमाल की है। इनकी मेहनत पर्दे पर साफ नजर आती है। वहीं प्रभु देवा का डांस और उनके वरुण के साथ किए गए डांस स्टेप्स आपके चेहरे पर मुस्कान बिखेरेंगे। डांस को खूबसूरती से उभारने वाली सिनेमेटोग्राफ़ी और उम्दा संगीत, गाने कमाल हैं।
तारीफ यहां निर्देशक रेमो डिसूजा की करनी जरूरी है, जिन्होंने बड़ी खूबसूरती से गणेश स्तुति और देशभक्ति गीत पर हिप हॉप शैली में डांस कंपोज़ किया है। इस फिल्म की प्रोडक्शन क्वॉलिटी पहली ABCD के मुक़ाबले भव्य है। अगर आपको डांस पसंद है तो फिल्म जरूर देखें। हां, पर फिल्म से कॉमेडी या पक्की कहानी की उम्मीद मत रखिएगा। मेरी ओर से फ़िल्म को 3.5 स्टार्स।
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