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This Article is From Dec 16, 2018

मोदी सरकार की SC से गुहार: राफेल के आदेश में 'तथ्यात्मक गलती' को सुधार दीजिए, जानें 10 बड़ी बातें

राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और इस पर मचे सियासी घमासान के बीच मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची और अपने हलफनामे में 'तथ्यात्मक गलती' को माना है.

मोदी सरकार की SC से गुहार: राफेल के आदेश में 'तथ्यात्मक गलती' को सुधार दीजिए, जानें 10 बड़ी बातें
राफेल पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची केंद्र सरकार (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
  1. राफेल पर केंद्र सरकार ने आनन-फानन में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख कर राफेल करार से जुड़े शीर्ष अदालत के फैसले के उस हिस्से में सुधार की गुहार लगाई जिसमें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) और लोक लेखा समिति (पीएसी) का जिक्र है. सरकार को लगा कि यदि फैसले में सुधार कराने में देरी हुई तो विपक्ष को उस पर हमलावर होने का बड़ा मौका मिल जाएगा. 
  2. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसके आदेश में जहां सीएजी रिपोर्ट और पीएसी का जिक्र है, वहां उसके नोट की ‘गलत व्याख्या' की गई और ‘नतीजतन, सार्वजनिक तौर पर विवाद पैदा हो गया.' सूत्रों ने बताया कि रक्षा एवं कानून मंत्रालयों के आला अधिकारियों और अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल के बीच शनिवार को एक मैराथन बैठक हुई, जिसमें तय किया गया कि उच्चतम न्यायालय में आज ही एक अर्जी दायर कर फैसले में सुधार की गुजारिश की जाए.     उन्होंने बताया कि शीर्ष अदालत का रुख करने में जरा भी देरी से भ्रम बढ़ेगा और विपक्ष को संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार पर हमलावर होने का बड़ा मौका मिल जाएगा. 
  3. शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि करार में विमानों की कीमत का ब्योरा सीएजी से साझा किया जा रहा है और सीएजी ने अपनी रिपोर्ट संसद की पीएसी से साझा की है. अपनी अर्जी में केंद्र ने कहा कि फैसले के 25वें पैरा में दो वाक्य उसकी ओर से एक सीलबंद कवर में दिए गए कीमतों के ब्योरे के साथ सौंपे गए एक नोट पर आधारित लग रहे हैं. लेकिन सरकार ने संकेत दिए कि अदालत की ओर से इस्तेमाल किए गए शब्द इसे एक अलग अर्थ दे रहे हैं.    
  4. केंद्र ने साफ किया कि उसने यह नहीं कहा कि पीएसी ने सीएजी की रिपोर्ट का परीक्षण किया या कोई संपादित हिस्सा संसद के समक्ष रखा गया है.सरकार ने साफ किया कि नोट में कहा गया था कि सरकार सीएजी के साथ कीमतों का ब्योरा ‘पहले ही साझा कर चुकी' है. यह नोट भूतकाल में लिखा गया था और ‘तथ्यात्मक तौर पर सही' है. 
  5. याचिका के मुताबिक, वाक्य का दूसरा हिस्सा पीएसी के संबंध में है. इसमें कहा गया है कि कैग की रिपोर्ट का पीएसी परीक्षण कर रही है. फैसले में ‘इज' की जगह ‘हैज बीन' का इस्तेमाल हुआ है. केंद्र ने शीर्ष अदालत के आदेश में आवश्यक संशोधन की मांग करते हुए कहा कि इसी तरह फैसले में यह कथन है कि रिपोर्ट का संपादित हिस्सा संसद के सामने रखा गया. इस बारे में कहा गया कि रिपोर्ट का संपादित हिस्सा संसद के सामने रखा गया और यह सार्वजनिक है.
  6. कैग और पीएसी के मुद्दे के बारे में शीर्ष अदालत के फैसले के पैराग्राफ 25 में इसका जिक्र है. फैसले में कहा गया था कि फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीदारी में किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई. फैसले में कहा गया कि उसके सामने रखे गए साक्ष्य से पता चलता है कि केंद्र ने राफेल लड़ाकू विमान पर मूल्य के विवरणों का संसद में खुलासा नहीं किया, लेकिन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के सामने इसे उजागर किया गया. शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद कांग्रेस नेता और पीएसी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनके सामने इस तरह की रिपोर्ट नहीं आयी थी.
  7. राफेल मामले से जुड़े फैसले में कैग रिपोर्ट के उल्लेख के संदर्भ में संशोधन के लिए सरकार की ओर से उच्चतम न्यायालय में आवेदन दायर करने की पृष्ठभूमि में कांग्रेस ने शनिवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि यह कदम 'जालसाजी की स्वीकारोक्ति' है. प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक बयान में कहा, ''उच्चतम न्यायालय में मोदी सरकार का आवेदन जानबूझकर गलत जानकारी देकर अदालत के साथ की गई जालसाजी की स्वीकारोक्ति है."   कांग्रेस ने मोदी सरकार पर सुप्रीम कोर्ट से झूठ बोलने और देश को गुमराह करने का आरोप मोदी सरकार पर लगाया है.
  8. शनिवार की सुबह पीएसी के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार पर हमला बोला और कहा कि उन्हें न तो कोई रिपोर्ट मिली है और न ही यह पब्लिक डोमेन में है. खड़गे ने कहा, "सरकार ने अदालत में यह झूठ बोला कि कैग रपट को सदन और पीएसी में पेश किया गया है. उन्होंने अदालत में यह भी कहा कि पीएसी ने इसकी जांच की है. उन्होंने दावा किया कि रपट सार्वजनिक है. यह कहां है? क्या आपने इसे देखा है? मैं पीएसी के अन्य सदस्यों के समक्ष इस मामले को ले जाने वाला हूं."
  9. कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने यहां मीडिया को संबांधित करते हुए कहा कि शुक्रवार का फैसला 'तथ्यात्मक रूप से गलत' था, जिसके लिए मोदी नीत केंद्र सरकार जिम्मेदार है. सिब्बल ने कहा, "फैसले में तथात्मक गलती है, जिसके लिए सरकार जिम्मेदार है, न कि अदालत. अगर आप अदालत को गलत तथ्य देंगे और उस आधार पर अदालत तथ्यात्मक दावे करती है, तो इस मामले में सरकार जिम्मेदार है."
  10. इस बीच कांग्रेस मामले के संबंध में महान्यायवादी और कैग को लोक लेखा समिति(पीएसी) के समक्ष तलब करने का दबाव बना रही है, वहीं केंद्र ने सर्वोच्च न्यायाल में याचिका दाखिल कर कहा है कि वह 'फैसले में गलतियों को सही करवाना चाहती है' और इसके साथ ही उसने दावा किया कि 'गलती शायद गलत व्याख्या की वजह से हुई है.'
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