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Tilak Ke Niyam: किस देवता को कौन सा लगाना चाहिए तिलक, जानें इससे जुड़े जरूरी नियम और लाभ

Tilak Significacne: सनातन परंपरा में​ जिस तिलक को ईश्वर का आशीर्वाद और प्रसाद माना जाता है, उसका पूजा-पाठ से लेकर स्नान-दान आदि में क्या महत्व माना जाता है? हिंदू धर्म में किस देवता को कौन सा तिलक लगाना चाहिए? तिलक से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को जानने के लिए पढ़ें ये लेख.

Tilak Ke Niyam: किस देवता को कौन सा लगाना चाहिए तिलक, जानें इससे जुड़े जरूरी नियम और लाभ
How to apply Tilak: तिलक लगाने का नियम और उपाय
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Importance of Tilak in Hindusim: हिंदू धर्म में माथे पर लगाए जाने वाले तिलक का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व माना गया है. आज्ञा चक्र यानि दोनों भौं के बीच लगाया जाने वाला यह तिलक पूरी परंपरा का प्रतीक होता है. यह तिलक जहां किसी व्यक्ति की किसी देवी या देवता से जुड़ी आस्था को प्रदर्शित करता है तो वहीं इसका शुभ प्रभाव उसे जीवन में सही दिशा में कार्य को करने की प्रेरणा देते हुए सुख-सौभाग्य का कारक बनता है. हिंदू धर्म में लोग अपनी आस्था के अनुसार अलग-अलग प्रकार के तिलक का प्रयोग करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि तिलक को लगाने का भी एक नियम होता है. आइए जानते हैं कि किस देवता को ​कौन सा तिलक और किस अंगुली से लगाना चाहिए. 

माथे पर क्यों लगाया जाता है तिलक? 

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Photo Credit: PTI

हिंदू धर्म में जिस प्रकार किसी व्यक्ति की पहचान उसका गोत्र होता है, उसी प्रकार किसी व्यक्ति की आस्था या फिर किसी संत की परंपरा की पहचान उसका तिलक होता है. किसी साधु के लिए तिलक उतना ही मायने रखता है, जितना कि किसी सधवा स्त्री के लिए सिंदूर मायने रखता है. हिंदू मान्यता के अनुसार तिलक के बगैर कोई भी पूजा, यज्ञ, हवन, दान, श्राद्ध आदि कर्म अधूरे माने जाते है. शुभ अवसरों पर लगाया जाने वाला तिलक सम्मान का तो पूजा के दौरान लगाया जाने वाला तिलक ईश्वर के प्रसाद और सौभाग्य का प्रतीक होता है. व्यक्ति के माथे पर लगा तिलक उसके इष्ट देवता का प्रतीक होता है. 

साधुओं का श्रृंगार है तिलक

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सनातन परंपरा में तिलक को साधुओं का श्रृंगार कहा माना जाता है. हर संप्रदाय से जुड़े साधु-संत अपनी-अपनी परंपरा के अनुसार तिलक लगाते हैं. जैसे वैष्णव परंपरा का तिलक उर्ध्वपुंड्र होता है. शैव संप्रदाय अपने माथे पर भस्म से त्रिपुंड लगाते हैं. इसे भगवान शिव के त्रिशूल का प्रतीक भी माना जाता है. शाक्त परंपरा से जुड़े लोग लाल चंदन या रोली का तिलक लगाते हैं.  

किस दिन कौन सा लगाएं तिलक?

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सोमवार : सफेद चंदन का तिलक
मंगलवार : सिंदूर अथवा रोली का तिलक
बुधवार : सिंदूर का तिलक
बृहस्पतिवार : केसर, हल्दी या पीले चंदन का तिलक
शुक्रवार : सफेद चंदन का तिलक
शनिवार : भस्म का तिलक
रविवार : लाल चंदन का तिलक

किस देवता को कौन सा लगाएं तिलक?

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सनातन परंपरा में प्रत्येक देवी-देवता के लिए अलग-अलग प्रकार के तिलक बताए गये हैं. जैसे यदि आप भगवान विष्णु, श्री कृष्ण और देवगुरु बृहस्पति को तिलक लगा रहे हैं तो उन्हें पीले चंदन, केसर, हल्दी या फिर गोपी चंदन का तिलक लगाएं. इसी प्रकार भगवान शिव और भगवान भैरव को भस्म या फिर सफेद चंदन का तिलक लगाएं.

देवी दुर्गा की पूजा में कुंकुम या फिर रोली का तिलक लगाएं. हिंदू मान्यता के अनुसार हनुमान जी और गणपति को सिंदूर का तिलक लगाना चाहिए. धन की देवी माता लक्ष्मी को लाल चंदन या फिर केसर का तिलक लगाएं. सूर्य देवता को भी लाल रंग के चंदन का तिलक लगाना चाहिए. हिंदू मान्यता के अनुसार जब आप देवता के अनुसार तिलक अर्पित करते हैं तो आपकी साधना-आराधना शीघ्र ही पूरी होती है. 

तिलक लगाने का नियम 

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हिंदू मान्यता के अनुसार तिलक जिसे ईश्वर का प्रसाद माना जाता है, उसे हमेशा तन और मन से पवित्र होने के बाद लगाना चाहिए. तिलक को हमेशा अपने आराध्य देवता को अर्पित करने के बाद उसे प्रसाद मानते हुए अपने माथे पर लगाना चाहिए. हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को करने या फिर यात्रा पर निकलने से पहले केसर या रोली का तिलक लगाया जाता है.

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इसी प्रकार सिंदूर का तिलक उत्साह और सकारात्मक उर्जा को बढ़ाने के लिए तो वहीं चंदन का तिलक मन की शीतलता और तमाम तरह के दोषों को दूर करने के लिए लगाया जाता है. भस्म के तिलक से नकारात्मक ऊर्जा से बचने और शिव कृपा पाने के लिए लगाया जाता है. ईश्वर को तिलक अनामिका अंगुली से ही लगाएं. इसी प्रकार रात्रि में सोने से पहले तिलक माथे से हटा देना चाहिए. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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