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This Article is From Sep 20, 2017

Durga Puja 2017: ये हैं भारत में मां दुर्गा के सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध मंदिर, जिन पर लोगों की है अपार श्रद्धा

Durga Puja 2017:देवी दुर्गा के सभी सभी शक्तिपीठों में से कामाख्या शक्तिपीठ को सर्वोत्तम माना गया है. यह असम में गुवाहाटी के पश्चिम में 8 कि.मी. दूर एक पर्वत पर स्थित है.

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Durga Puja 2017: कोलकाता का मां दक्षिणेश्वर काली मंदिर पूर्वी भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में एक है.
भारत में शक्ति पूजा की प्रथा अनादि काल से है, जो मूलतः मातृ पूजा एक प्रकार है. मातृ पूजा के प्रमाण और साक्ष्य सिन्धु घाटी की सभ्यता से भी मिले हैं. यहां प्रस्तुत है शक्ति की परम आराध्य देवी मां दुर्गा के सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध मंदिर, जिस पर लोगों की है अपार श्रद्धा है.

अम्‍बाजी मंदिर, गुजरात
गुजरात-राजस्थान सीमा पर स्थित इस मंदिर के बारे में माना जाता है कि यह लगभग बारह सौ साल पुराना मंदिर है. वर्तमान काल में इस मंदिर के जीर्णोद्धार 1975 से शुरू हुआ, जो अब तक जारी है. सफ़ेद संगमरमर से निर्मित इस भव्य मंदिर का शिखर एक सौ तीन फुट ऊंचा है, जिस पर  358 स्वर्ण कलश सुसज्जित हैं. हालांकि इस मंदिर के गर्भगृह में देवी मां की कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है, बल्कि प्रतिमा के स्थान पर एक श्री-यंत्र स्थापित है.

कामाख्या शक्तिपीठ, असम
देवी दुर्गा के सभी सभी शक्तिपीठों में से कामाख्या शक्तिपीठ को सर्वोत्तम माना गया है. यह असम में गुवाहाटी के पश्चिम में 8 कि.मी. दूर एक पर्वत पर स्थित है. मान्यता है कि यहां माता सती योनि भाग गिरा था, उसी से कामाख्या महापीठ की उत्पत्ति हुई. यहां की एक आश्चर्यजनक बात इसी तथ्य से जुड़ी है कि हर महीने में मंदिर में स्थापित पिंड से रक्ताभ धारा प्रवाहित होती है, जिसे देवी का रजस्वला होना माना जाता हैं
 
दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता
कोलकाता का मां दक्षिणेश्वर काली मंदिर पूर्वी भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में एक है. इस मंदिर का निर्माण सन 1847 में शुरू हुआ था. लोग बताते हैं कि कोलकाता केजान बाजार की एक महारानी रासमणि ने स्वप्न देखा था, जिसके अनुसार देवी काली ने उन्हें निर्देश दिया कि मंदिर का निर्माण किया जाए. इस प्रकार इस भव्य मंदिर में मां की मूर्ति श्रद्धापूर्वक स्थापित की गई.
  ज्वालाजी मंदिर, हिमाचल प्रदेश
ज्वालाजी मंदिर देवभूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कालीधार पहाड़ी के बीच स्थित है. यह तीर्थ स्थल को देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक बहुत ही लोकप्रिय शक्ति पीठ है. शास्त्रों के अनुसार ज्वाला देवी में सती की जिह्वा गिरी थी. यहां की ख़ास बात यह है कि यहां देवी की प्रतिमा के जगह से सदैव अग्नि की ज्वाला निकलती रहती है, जिसका स्रोत क्या है, किसी को पता नहीं है.

करणी माता मंदिर, राजस्थान
मां करणी देवी के मंदिर और तीरथ धाम को चूहे वाले मंदिर के नाम से विख्यात है. यह मंदिर राजस्थान के बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर जोधपुर रोड पर गांव देशनोक की सीमा में स्थित है.

दुर्गा मंदिर, वाराणसी
दुर्गा मंदिर, वाराणसी के के बारे में कहा जाता है कि इसे एक बंगाली महारानी ने 18वीं सदी में बनवाया था. इस मंदिर में एक वर्गाकार आकृति का तालाब बना हुआ है जो दुर्गा कुंड के नाम से जाना जाता है. लाल रंग से रंगी इस मंदिर में गेरू रंग का अर्क से डिजायन बनी है. केवल यही नहीं मंदिर में देवी के वस्‍त्र भी गेरूआ रंग के है. लोगो की मान्‍यता है कि इस मंदिर में स्‍थापित मूर्ति को मनुष्‍यों ने नहीं बनाया है, बल्कि यह मूर्ति स्‍वयं प्रकट हुई थी, जो लोगों की बुरी शक्तियों से बचाने आई थी.
 
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नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश
नैना देवी हिमाचल प्रदेश में नैनादेवी नामक पहाड़ी पर स्थित है. एक यह मंदिर भूस्‍खलन से नष्‍ट हो गया था, जिसे दोबारा बनाया गया. यहां देवी सती के शक्ति रूप की पूजा उनके नेत्र यानी आंख के रूप में की जाती है, क्योंकि लोगों का मानना है कि यहां देवी सती का नेत्र गिरे थे.

श्री महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर
कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर न केवल महाराष्ट बल्कि देश का सबसे प्रसिद्ध लक्ष्मी मंदिर माना जाता है. इतिहास में दर्ज तथ्यों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण सातवीं सदी चालुक्य वंश के शासक कर्णदेव ने करवाया था. प्रचलित जनश्रुति के अनुसार यहां की लक्ष्मी प्रतिमा लगभग 7,000 साल पुरानी है. इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां सूर्य भगवान अपनी किरणों से स्वयं देवी लक्ष्मी का पद-अभिषेक करते हैं. जनवरी और फरवरी के महीने में सूर्य की किरणें देवी की पैरों का वंदन करती हुई मध्य भाग से गुजरते हुए फिर देवी का मुखमंडल को रोशनी करती हैं, जो कि एक अतभुत दृश्य प्रस्तुत करता है.

श्रीसंगी कलिका मंदिर, कर्नाटक
कर्नाटक के बेलगाम में स्थित श्रीसंगी कलिका मंदिर मां काली को समर्पित है. यह यह कर्नाटक का एक सबसे प्रसिद्ध देवी मंदिर है और यहां पर मां दुर्गा के काली रूप की पूजा करने का विधान है.

दंतेश्‍वरी मंदिर, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के दन्तेवाड़ा का प्रसिद्ध दंतेश्‍वरी मंदिर बस्तर क्षेत्र में स्थित है. यह मंदिर देश के सबसे प्राचीन देवी मंदिरों में से एक है. मान्यता है कि यहां देवी सती का दांत गिरा था, जिसके कारण जगह का नाम दंतेश्वरी पड़ा.
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