Shanidev Ke Vrat Ki Vidhi: हिंदू धर्म में नवग्रहों में से एक शनि को न्याय का देवता माना जात है, जो व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार पूरा फल प्रदान करते हैं. ज्योतिष के अनुसार सूर्य पुत्र शनिदेव यदि किसी पर मेहरबान हो जाएं तो उसे जीवन के सभी सुख और सौभाग्य को प्रदान करते हैं, लेकिन यदि नाराज हो जाएं तो उस व्यक्ति के अर्श से फर्श पर आने में जरा देर भी नहीं लगती है. सनातन परंपरा में कर्मफलदाता शनिदेव की पूजा के लिए ज्येष्ठ मास की अमावस्या का दिन अत्यंत ही शुभ माना गया है क्योंकि इसी दिन उनकी जयंती मनाई जाती है. इस दिन बड़ी संख्या में शनि भक्त अपने आराध्य शनिदेव को मनाने के लिए विधि-विधान के साथ व्रत और उपवास रखते हैं. यदि आप भी इस शनि जयंती पर शनिवार का व्रत रखने की योजना बना रहे हैं तो आपको उससे पहले उससे जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातों और नियम को जरूर जान लेना चाहिए.
शनिदेव का व्रत कब शुरू करना चाहिए

हिंदू मान्यता के अनुसार शनि संबंधी कष्टों को दूर करने और कामनाओं को पूरा करने के लिए शनि देवता का व्रत शनि जयंती, श्रावण मास के शनिवार, या फिर किसी भी महीने के शुक्लपक्ष के शनिवार से प्रारंभ किया जा सकता है. शनिदेव का आशीर्वाद पाने के लिए साधक को इस व्रत को कम से कम 7 अथवा 11 या फिर 16 या फिर 19 शनिवार करना चाहिए. इस व्रत को सूर्योदय के पहले से प्रारंभ करके सूर्यास्त तक किया जाता है.
शनि जयंती के व्रत की संपूर्ण विधि

- शनि जयंती पर शनि देवता का व्रत करने के लिए व्यक्ति को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करने के बाद शनिदेव के लिए किए जाने वाले व्रत का संकल्प लेना चाहिए.
- शनि जयंती व्रत की पूजा करने से पहले साधक को आवश्यक सामग्री जैसे सरसों का तेल, काला तिल, काली उड़द की दाल, रुई की बाती, शनि की प्रतिमा या चित्र, शमी पत्र, नीले पुष्प, धूप, कपूर, भोग के लिए काले चने गुड़ आदि रख लेना चाहिए.
- शनि जयंती व्रत की पूजा के लिए सबसे उत्तम स्थान शनि मंदिर है. यदि आप वहां न जा पाएं तो घर के ईशान कोण में शनि देवता का चित्र रखकर विधि-विधान से पूजा करें.
- शनिवार या फिर शनि जयंती के व्रत की पूजा में सबसे पहले शनिदेव के चित्र या मूर्ति पर गंगाजल या पवित्र जल छिड़कें. इसके बाद शनिदेव को सरसों के तेल से शनिदेव का विशेष अभिषेक करें. फिर शनि देवता को धूप, दीप, पुष्प, भोग आदि अर्पित करें.
- शनि जयंती की पूजा में साधक को विशेष रूप से आटे का चौमुखा दीया जलाकर रखना चाहिए. इसके बाद शनिदेव की चालीसा, स्तोत्र आदि का पाठ और उनके मंत्र जैसे - 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' आदि का अधिक से अधिक जप करना चाहिए.
- शनि जयंती व्रत की पूजा के अंत में शनिदेव की विधि-विधान से आरती करें.
शनि जयंती के व्रत में इन बातों का रखें ध्यान

- शनि जयंती व्रत करने वाले साधक को तामसिक चीजों का भूलकर सेवन नहीं करना चाहिए.
- शनि जयंती व्रत वाले दिन साधक को स्त्री प्रसंग से दूर रहते हुए पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
- शनि जयंती व्रत वाले दिन पीपल को जल देने के बाद दीपदान अवश्य करें.
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- शनि जयंती व्रत वाले दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार शनि संबंधी चीजों का दान करना चाहिए.
- शनि जयंती व्रत वाले दिन काली गाय, कुत्ते, कोआ आदि को रोटी खिलानी चाहिए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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