हिंदू धर्म में संतान सप्तमी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से यह व्रत रखती हैं. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है. इस बार सप्तमी तिथि दो दिनों में पड़ने के कारण व्रत की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम है. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि उदया तिथि के आधार पर 18 सितंबर 2026 को संतान सप्तमी व्रत रखना उत्तम रहेगा.
18 सितंबर को रखना शुभ रहेगा व्रत
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि 17 सितंबर को सुबह 10:49 बजे शुरू होगी और 18 सितंबर को दोपहर 1:01 बजे समाप्त होगी. धार्मिक मान्यताओं में सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है. इसलिए उदया तिथि के आधार पर 18 सितंबर को व्रत रखना शुभ माना जाएगा.
संतान सप्तमी पूजा का शुभ मुहूर्त
18 सितंबर को पूजा के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:59 से 6:45 बजे तक रहेगा. अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:19 से 2:09 बजे तक रहेगा. इसके अलाावा अमृत काल सुबह 9:24 से 11:11 बजे, विजय मुहूर्त दोपहर 3:49 से शाम 4:38 बजे और गोधूलि मुहूर्त शाम 7:57 से 8:20 बजे तक रहेगा.
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पूजा में बांधें सात गांठों वाला डोरा
आचार्य के अनुसार, पूजा के दौरान सात गांठों वाला सूती डोरा या कलावा भगवान शिव के सामने रखकर पूजन करें. पूजा पूरी होने के बाद माताएं इसे अपने दाहिने हाथ की कलााई पर बांध सकती हैं. इसे संतान की रक्षा, लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जोड़ा जाताा है.
संतान सप्तमी पूजा विधि
सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें. चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थाापित करें. सात गांठों वाले धागे को हल्दी या केसर से रंगकर भगवान के साामने रखें. शिव-पार्वती को रोली, चंदन, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें.
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