यूं तो श्रद्धा और भक्ति से जो भी व्रत किया जाता है वह बहुत फलदायी होता है लेकिन कहते हैं सत्यनारायण व्रत हिन्दू धर्म से सबसे श्रेष्ठ फलदायी व्रत माना गया है. सत्यनारायण पूजा भारत के गुजरात, बंगाल, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई हिस्सों में एक बहुत लोकप्रिय है. इस दिन भगवान विष्णु के नारायण रूप की पूजा-अर्चना की जाती है. मान्यता है कि हर महीने की पूर्णिमा को सत्यनारायण की पूजा करने का विधान है. अगर आप इस बार सत्यनारायण व्रत रखना चाहते हैं तो आइए आपको बताते हैं इसकी विधि के बारे में.
जानिए क्या है इसकी विधि:
भविष्यपुराण के अनुसार सत्यनारायण व्रत रखने वाले व्यक्ति को सबसे पहले स्नान करना चाहिए. इसके बाद हाथ में फूल और तुलसी लेकर सत्यनारायण भगवान के मंत्र का जाप किया जाता है.
व्रत की विधि
इस व्रत को किसी भी उम्र में रखा जा सकता है. आप चाहें बच्चे हों या बुजुर्ग, इस व्रत का कोई भी कर सकता है. इसके लिए सबसे पहले भगवान सत्यनारायण का पाठ करें. भगवान विष्णु की पूजा में केले के पत्ते, फल, मोली, रोली, कुमकुम का इस्तेमाल किया जाता है. अब दूध, केला, शहद, तुलसी का पत्ता मिलाकर पंचामृत तैयार कर लें. इस पूजा में पंजीरी का भोग लगाया जाता है. इसके लिए गेहूं के आटे को भूनकर उसमें चीनी मिलाकर प्रसाद तैयार करें. अब सत्यनारायण भगवान की कथा सुनाई या सुनी जाती है. अंत में पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाया जाता है.
जानिए क्या है इसकी विधि:
भविष्यपुराण के अनुसार सत्यनारायण व्रत रखने वाले व्यक्ति को सबसे पहले स्नान करना चाहिए. इसके बाद हाथ में फूल और तुलसी लेकर सत्यनारायण भगवान के मंत्र का जाप किया जाता है.
व्रत की विधि
इस व्रत को किसी भी उम्र में रखा जा सकता है. आप चाहें बच्चे हों या बुजुर्ग, इस व्रत का कोई भी कर सकता है. इसके लिए सबसे पहले भगवान सत्यनारायण का पाठ करें. भगवान विष्णु की पूजा में केले के पत्ते, फल, मोली, रोली, कुमकुम का इस्तेमाल किया जाता है. अब दूध, केला, शहद, तुलसी का पत्ता मिलाकर पंचामृत तैयार कर लें. इस पूजा में पंजीरी का भोग लगाया जाता है. इसके लिए गेहूं के आटे को भूनकर उसमें चीनी मिलाकर प्रसाद तैयार करें. अब सत्यनारायण भगवान की कथा सुनाई या सुनी जाती है. अंत में पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाया जाता है.
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