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Hanuman Jayanti 2026: किन 8 बड़ी सिद्धियों के कारण बजरंगी कहलाते हैं महाबली हनुमान?

Hanuman Jayanti 2026, Hanuman Ji Ki Asht Siddhiyan: सनातन परंपरा में हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और 9 निधियों का दाता माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार यदि बजरंगी के आशीर्वाद से इनमें से कोई एक भी किसी व्यक्ति को प्राप्त हो जाए तो उसका जीवन धन्य हो जाता है. जिन सिद्धियों ने बजरंगी को महाबली हनुमान बनाया, उसका धार्मिक महत्व जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख. 

Hanuman Jayanti 2026: किन 8 बड़ी सिद्धियों के कारण बजरंगी कहलाते हैं महाबली हनुमान?
Hanuman Ji Ki Asht Siddhiyan in Hindi
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Hanuman Jayanti 2026: हिंदू धर्म में हनुमान एक ऐसे देवता हैं जो हर युग में पृथ्वी पर मौजूद रहते हैं. अष्टचिरंजीवी में से एक हनुमान जी रामायण काल में जहां भगवान राम के परम भक्त के रूप तो वहीं महाभारत काल में भीम को एक गुरु के रूप में जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं. कलयुग में तो हनुमान जी सबसे शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता माने जाते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार जिन 8 सिद्धियों के कारण बजरंगी को महाबली हनुमान के रूप में पूजा जाता है, वह बड़ी किस्मत वालों को प्राप्त होती है. आइए जानते हैं कि हनुमान जी की कौन सी सिद्धि किस कार्य के लिए जानी जाती है. 

1. अणिमा

हिंदू मान्यता के अनुसार अणिमा वह सिद्धि है, जिसके प्राप्त हो जाने के बाद कोई भी व्यक्ति इस सिद्धि के माध्यम से अणु के समान सूक्ष्म रूप को धारण कर सकता है. रामायण काल में हनुामान जी ने इसी चमत्कारी सिद्धि की मदद से पहले वह सुरसा नाम की रा​क्षसी के मुख में प्रवेश करते हैं और उसके बाद वहां से सुरक्षित बाहर निकल आने में कामयाब होते हैं. इसी प्रकार आणिमा सिद्धि की मदद से ही उन्होंने अपने शरीर को बहुत छोटा करके लंका में प्रवेश किया था. 

2. महिमा

हिंदू मान्यता के अनुसार हनुमान जी की 8 चमत्कारी सिद्धियों में महिमा की मदद से कोई भी व्यक्ति अपने शरीर का आकार बढ़ाकर ब्रह्मांड तक को ढक लेने की क्षमता रखता है. रामायण काल में हनुमान जी ने कई अवसरों पर अपनी इस सिद्धि का प्रयोग किया था. रामायण की कथा के अनुसार हनुमान जी ने लंका को पार करते समय और लंका पहुंचने पर माता सीता को प्रभु श्री राम की वानर सेना की ताकत को दिखाने के लिए इस सिद्धि का प्रयोग किया था. 

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3. गरिमा

हनुमान जी की तीसरी चमत्कारी सिद्धि का नाम गरिमा है, जिसकी मदद से कोई भी व्यक्ति अपने शरीर को उस पर्वत के समान भारी बना सकता है, जिसे कोई हिला भी नहीं सकता है. महाभारत काल में अपनी इसी सिद्धि के जरिए हनुमान जी ने भीम के अभिमान को दूर किया था. महाभारत काल में हनुमान जी ने एक वृद्ध बंदर का रूप धारण करने के बाद गरिमा सिद्धि के माध्यम से अपने पूरे शरीर को इतना भारी बना लिया कि उसे कोई हिला नहीं सकता था. मान्यता है कि कई हाथियों का बल रखने वाले भीम हनुमान जी की पूंछ को हटाना तो दूर उसे हिला भी नहीं पाए थे. 

4. लघिमा

हनुमान जी की चौथी चमत्कारी शक्ति की विशेषता है कि इसकी मदद से कोई भी व्यक्ति अपने शरीर को इतना हल्का बना सकता है कि वह हवा से भी तेज गति से उड़ सकता है. रामायण काल में हनुमान जी ने अपनी इस शक्ति का प्रयोग लंका में राक्षसों और रावण की नजरों से बचने के लिए किया था. हनुमान जी ने अशोक वाटिका में पत्तों के बीच बैठकर अपने को छिपाने के लिए इस सिद्धि का उपयोग किया था. 

5. प्राप्ति

हनुमान जी पांचवी चमत्कारी सिद्धि अपने नाम के अनुरूप फल प्रदान करने वाली है. इस दिव्य सिद्धि के माध्यम से व्यक्ति किसी भी चीज को प्रकट या फिर कहें प्राप्त कर सकता है. इस सिद्धि की मदद से भविष्य के बारे में भी जाना जा सकता है. मान्यता है कि हनुमान जी ने रामायण काल में सीता माता का पता लगाने के लिए पशु-पक्षियों से बात करने के लिए किया था. 

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6. प्राकाम्य

हिंदू मान्यता के अनुसार प्राकाम्य सिद्धि की मदद से इंसान अपनी किसी भी कामना को पूरा कर सकता है. इस सिद्धि के प्राप्त होने के बाद पलक झपकते ही व्यक्ति आकाश लोक से पाताल लोक पहुंच सकता है. यह सिद्धि व्यक्ति को पारलौकिक विषयों का ज्ञान कराते हुए उसका साक्षात्कार कराती है. अपनी इसी शक्ति के माध्यम से हनुमान कभी भी कोई रूप धाकर अपने भक्तों के बीच कभी भी कहीं पहुंच सकते हैं. 

7. ईशित्व

हिंदू मान्यता के अनुसार हनुमान जी की सातवीं चमत्कारी सिद्धि ईशित्व के प्राप्त होने पर व्यक्ति देवता के समान पूजनीय हो जाता है. बजरंगी जो खुद भगवान शिव के रुद्रावतार हैं, उन्होंने पृथ्वी पर अवतार लेने के बाद अपना पूर्ण जीवन प्रभु श्री राम की भक्ति और सेवा में समर्पित कर दिया था. उन्होंने अपनी इसी शक्ति की मदद से लंका युद्ध के दौरान वानर सेना का नेतृत्व किया. 

8. वशित्व

हनुमान जी की आठवीं चमत्कारी सिद्धि वशित्व है, जिसकी मदद से व्यक्ति किसी को भी अपने वश में कर सकता है. इस सिद्धि के माध्यम से व्यक्ति अपनी इंद्रियों को वश में करते हुए खुद को तमाम तरह की मोह-माया आदि से दूर रखने में कामयाब रहता है. हनुमान जी अपनी इन्हीं आठ सिद्धियों और नवनिधियों के कारण अतुलित बल के धाम के रूप में पूजे जाते हैं.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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