भारतीय समय के अनुसार ग्रहण की अवधि करीब सुबह 6:53 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक थी. हालांकि यह भारत में दिखाई नहीं दिया. इसलिए यहां सूतक मान्य नहीं था और पूजा-पाठ या राखी के पर्व पर कोई रोक नहीं थी. आचार्य मदन मोहन ने बताया कि धार्मिक मान्यता में ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक प्रभाव बढ़ने की बात कही जाती है. जहां ग्रहण दिखाई देता है, वहां मोक्ष के बाद स्नान, सफाई और गंगाजल छिड़कने की परंपरा है. इसका उद्देश्य भय नहीं, बल्कि शुद्धि और सकारात्मक भाव से जुड़ा माना जाता है.
घर में ऐसे करें गंगाजल का छिड़काव
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि ग्रहण दिखाई देने वाले स्थानों पर मोक्ष के बाद स्नान कर साफ कपड़े पहनने की परंपरा है. इसके बाद साफ पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थान, कमरों और रसोई में हल्काा छिड़काव किया जा सकता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इसके बाद पूजा या भोजन शुरू किया जाता है.
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मंदिर में क्या होता है जानिए
उन्होंने आगे बताया कि जहां ग्रहण दिखाई देताा है वहां परंपरा के अनुसार मोक्ष के बाद मंदिर की सफाई की जाती है. इसके बाद देवी-देवताओं का पवित्र जल या गंगाजल से अभिषेक कर नियमित पूजा और आरती शुरू की जााती है.
भारत में नहीं है कोई अनिवार्यता
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि 28 अगस्त का ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इसलिए यहां सूतक या ग्रहण बाद की शुद्धि अनिवार्य नहीं है. फिर भी आस्था रखने वाले लोग गंगाजल का छिड़काव शुद्धि और शुभ शुरुआत के भााव से कर सकते हैं.
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