चंद्र ग्रहण 2018: मान्यता है कि मंत्र जाप से दुष्प्रभाव दूर होता है
- मान्यता है कि चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ दुष्परिणाम भी होते हैं
- माना जाता है कि मंत्र जाप करने से बुरे प्रभाव से बचा जा सकता है
- मान्यता के मुताबिक इस दौरान अक्षय पुण्य अर्जित किया जा सकता है
नई दिल्ली:
भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में चंद्र ग्रहण शुरू हो चुका है. चंद्रग्रहण 4 बजकर 21 मिनट पर शुरू हुआ. यही वो समय था जब चांद ने पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश किया. इस बार का चंद्रग्रहण बेहद खास है क्योंकि आज एक साथ तीन-तीन खगोलीय घटनाएं हो रही हैं- सुपरमून, ब्लडमून, ब्लूमून. वैसे तो वैज्ञानिक अपने तरीके से इस दुर्लभ घटना का विश्लेषण करेंगे लेकिन लोक मान्यता के अनुसार चंद्रग्रहण राशियों के हिसाब से अलग-अलग प्रभाव डालता है. माना जाता है कि कुछ मंत्र ऐसे हैं जिनका जाप करने से ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचा जा सकता है.
चंद्र ग्रहण के दौरान न करें ये काम
ज्योतिषियों की मानें तो ग्रहण काल में गायत्री मंत्र का जाप करते रहने से प्रत्येक राशि के सभी दोषों का निवारण हो जाता है. इस दौरान हनुमान चालीसा और हनुमान जी के मंत्रोच्चारण का भी विशेष महत्व है. ज्योतिष शास्त्रियों का कहना है कि चंद्र ग्रहण क प्रभाव 108 दिनों तक रहता है, इसीलिए यह बहुत जरूरी है कि चंद्र ग्रहण के दौरान जाप किया जाए.
जानिए देश में किस शहर में कब शुरू हुआ ग्रहण
इस दौरान 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम:' या 'ॐ सों सोमाय नम:' का जाप करना शुभ होता है. माना जाता है कि इस वैदिक मंत्र का जाप जितनी श्रद्धा से किया जाएगा यह उतना ही फलदायक होगा. ग्रहण के दौरान दुर्गा सप्तशती कवच मंत्र का पाठ करना चाहिए. जो इस प्रकार है- ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै.
भूकंप के बाद इन मंत्रों को लेकर बढ़ी जिज्ञास
मान्यताओं के मुताबिक ग्रहण के दौरान पूरी तन्मयता और संयम से मंत्र जाप करने से विशेष लाभ मिलता है. इस दौरान अर्जित किया गया पुण्य अक्षय होता है. कहा जाता है इस दौरान किया गया जाप और दान, सालभर में किए गए दान और जाप के बराबर होता है.
चंद्र ग्रहण के दौरान न करें ये काम
ज्योतिषियों की मानें तो ग्रहण काल में गायत्री मंत्र का जाप करते रहने से प्रत्येक राशि के सभी दोषों का निवारण हो जाता है. इस दौरान हनुमान चालीसा और हनुमान जी के मंत्रोच्चारण का भी विशेष महत्व है. ज्योतिष शास्त्रियों का कहना है कि चंद्र ग्रहण क प्रभाव 108 दिनों तक रहता है, इसीलिए यह बहुत जरूरी है कि चंद्र ग्रहण के दौरान जाप किया जाए.
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इस दौरान 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम:' या 'ॐ सों सोमाय नम:' का जाप करना शुभ होता है. माना जाता है कि इस वैदिक मंत्र का जाप जितनी श्रद्धा से किया जाएगा यह उतना ही फलदायक होगा. ग्रहण के दौरान दुर्गा सप्तशती कवच मंत्र का पाठ करना चाहिए. जो इस प्रकार है- ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै.
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मान्यताओं के मुताबिक ग्रहण के दौरान पूरी तन्मयता और संयम से मंत्र जाप करने से विशेष लाभ मिलता है. इस दौरान अर्जित किया गया पुण्य अक्षय होता है. कहा जाता है इस दौरान किया गया जाप और दान, सालभर में किए गए दान और जाप के बराबर होता है.
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