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चाणक्‍य नीत‍ि के अनुसार अगर आपके पास हैं ये 3 चीजें, तो आप हैं दुन‍िया के सबसे खुश इंसान

चाणक्य नीति के अनुसार अगर किसी व्यक्ति के जीवन में आज्ञाकारी संतान, सहयोगी जीवनसाथी और धन को लेकर संतोष हो, तो उसका जीवन धरती पर ही स्वर्ग जैसा बन सकता है.

चाणक्‍य नीत‍ि के अनुसार अगर आपके पास हैं ये 3 चीजें, तो आप हैं दुन‍िया के सबसे खुश इंसान
चाणक्य कहते हैं कि परिवार की सबसे बड़ी ताकत उसकी संतान होती है.

chanakya niti : आज के समय में लोग अक्सर सोचते हैं कि ज्यादा पैसा, बड़ा घर या ऊंचा पद मिलने से ही जीवन खुशहाल बनता है. लेकिन प्राचीन भारतीय विद्वान चाणक्य की सोच इससे थोड़ी अलग थी. चाणक्य ने अपनी चाणक्य नीति में जीवन को आसान और सुखी बनाने के कई सरल सूत्र बताए हैं. उनकी बातें हजारों साल पहले कही गई थीं, लेकिन आज भी उतनी ही सही लगती हैं. चाणक्य का मानना था कि अगर किसी इंसान के जीवन में तीन खास बातें हों, तो उसका जीवन अपने आप सुखी और शांत हो जाता है. ऐसे व्यक्ति को अलग से स्वर्ग खोजने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि उसका घर और उसका जीवन ही स्वर्ग जैसा बन सकता है.

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चाणक्य नीति का एक प्रसिद्ध श्लोक

चाणक्य नीति में एक श्लोक बताया गया है

“यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी.

विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि.”

इसका सरल मतलब है कि जिस व्यक्ति की संतान आज्ञाकारी हो, पत्नी सहयोग करने वाली हो और जो अपने धन से संतुष्ट रहता हो, उसका जीवन धरती पर ही स्वर्ग जैसा हो जाता है.

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आज्ञाकारी संतान से घर में रहती है शांति

चाणक्य कहते हैं कि परिवार की सबसे बड़ी ताकत उसकी संतान होती है. अगर बच्चे संस्कारी हों और माता-पिता की बात मानते हों, तो घर का माहौल अच्छा बना रहता है. ऐसे घर में झगड़े कम होते हैं और सभी लोग खुशी से रहते हैं. इसलिए चाणक्य ने आज्ञाकारी संतान को परिवार की खुशी की बड़ी वजह बताया है.

समझदार और सहयोगी जीवनसाथी

चाणक्य ने अपने श्लोक में पत्नी के लिए 'छन्दानुगामिनी' शब्द का इस्तेमाल किया है. इसका मतलब है ऐसा जीवनसाथी जो हर स्थिति में परिवार का साथ दे और समझदारी से काम ले. जब पति-पत्नी के बीच समझ और सहयोग होता है, तो घर का माहौल मजबूत और खुशहाल रहता है.

धन से ज्यादा जरूरी है संतोष

चाणक्य का तीसरा और बहुत जरूरी संदेश है संतोष. उनका कहना था कि जो इंसान अपने पास मौजूद धन और साधनों से संतुष्ट रहता है, उसका मन शांत रहता है. ज्यादा लालच इंसान को परेशान कर सकता है, जबकि संतोष इंसान को सुकून देता है. कुल मिलाकर चाणक्य का ये संदेश बहुत साफ है. जीवन का असली सुख सिर्फ धन में नहीं होता. अगर घर में समझदार संतान हो, जीवनसाथी सहयोगी हो और इंसान अपने पास जो है उसमें खुश रहना सीख ले, तो उसका जीवन सच में स्वर्ग जैसा बन सकता है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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