Chaitra Navratri Puja Ka Vastu Niyam: जिस शक्ति के बगैर देवता भी अधूरे माने जाते हैं, उसकी साधना के लिए नवरात्रि के 09 दिन अत्यंत ही पवित्र और पुण्यदायी माने गये हैं. यही कारण है कि शक्ति के साधकों को नवरात्रि पूजा का पूरे साल इंतजार बना रहता है. इस साल चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च 2026 प्रारंभ होकर 27 मार्च 2026 को पूर्ण होगा. यदि आप भी चैत्र नवरात्रि में देवी दुर्गा की विशेष पूजा और व्रत रखने जा रहे हैं तो आपको उनका आशीर्वाद पाने के लिए कलश स्थापना से लेकर अखंड दीप जलाने से जुड़ा वास्तु नियम जरूर पता होना चाहिए. आइए नवरात्रि पूजा का वास्तु नियम विस्तार से जानते हैं.
किस दिशा में बैठकर करें नवरात्रि की पूजा?

हिंदू मान्यता के अनुसार यदि कोई कार्य सही समय पर सही दिशा में किया जाए तो उसमें जरूर सफलता प्राप्त होती है. ऐसे में नवरात्रि की पूजा भी शुभ मुहूर्त में करने के साथ ही साथ सही दिशा में बैठकर करनी चाहिए. वास्तु शास्त्र के अनुसार साधक को हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में बैठकर ही नवरात्रि की पूजा करनी चाहिए. वास्तु नियमों के अनुसार ईशान कोण देवी पूजा के लिए अत्यधिक शुभ और फलदायी माना गया है. इसी प्रकार पूजा करते समय आपका मुख भी उत्तर, पूर्व या फिर उत्तर-पूर्व दिशा की ओर होना सबसे उत्तम होता है.
किस दिशा में करें कलश की स्थापना?

सनातन परंपरा में कलश को सुख-सौभाग्य-समृद्धि दिलाने वाले एक मंगल प्रतीक के रूप में जाना जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार नवरात्रि में देवी पूजा के जिस कलश की स्थापना की जाती है, उसमें सभी नवग्रह, नक्षत्र और तीर्थों का वास होता है. ऐसे में इसे स्थापित करने से पहले सही दिशा जरूर जान लेना चाहिए. वास्तु के अनुसार नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए ईशान कोण यानि उत्तर-पूर्व दिशा सबसे ज्यादा शुभ होती है. ऐसे में कलश को शुभ मुहूर्त में शुभ दिशा में ही स्थापित करें.
नवरात्रि पूजा में कहां जलाएं अखंड दीप?

नवरात्रि में की जाने वाली शक्ति साधना में अखंड दीप का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार नवरात्रि के 09 दिनों तक लगातार जलने वाले इस अखंड दीप से पूजा स्थान समेत पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और शक्ति की साधना में आने वाले बाधा और नकारात्मक उर्जा का नाश होता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार देवी दुर्गा की पूजा के लिए जलाए जाने वाले इस अखंड दीप को हमेशा आग्नेय कोण यानि दक्षिण-पूर्व दिशा मे जलाना चाहिए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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