Bhadli Navami Kab Hai: हिंदू धर्म में आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि का बहुत ज्यादा धार्मिक माना गया है क्योंकि यह पावन तिथि न सिर्फ गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी पूजा के लिए अत्यंत ही शुभ और सिद्ध मानी जाती है, बल्कि इसी तिथि पर बगैर किसी मुहूर्त को देखे मांगलिक कार्य संपन्न किए जाते हैं. सनातन परंपरा में आषाढ़ मास की जिस नवमी को भड़ली नवमी के नाम से जाना जाता है, वह इस साल कब पड़ेगी? भड़ली नवमी का पर किसकी पूजा की जाती है? भड़ली नवमी की सही तारीख, पूजा विधि और धार्मिक महत्व आदि के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं.
भड्डली नवमी कब है?
हिंदू धर्म में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का जिस दिन समापन होता है, उसी दिन भड्डली नवमी का पर्व मनाया जाता है. पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की यह नवमी 22 जुलाई 2026 को प्रात:काल 05:16 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 23 जुलाई 2026 को प्रात:काल 07:03 बजे तक रहेगी. ऐसे में भड्डली नवमी का पर्व 22 जुलाई 2026, बुधवार को मनाया जाएगा.
भड़ली नवमी का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की नवमी को भड़ली नवमी, भड़रिया नवमी, कंदर्प नवमी आदि के नामों से जाना जाता है. यह साल के उन दिनों में से एक पावन दिन होता है जब आप बगैर मुहूर्त का विचार किए हुए अपने घर में मुंडन, सगाई, तिलक, विवाह और गृह प्रवेश जैसे धार्मिक एवं मांगलिक कार्य कर सकते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार इसी पावन तिथि के बाद चातुर्मास प्रारंभ हो जाता और फिर चार महीने तक भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के कारण कोई भी शुभ कार्य नहीं होता है. ऐसे में मंगल कार्यों को करने के लिए यह बेहद खास दिन होता है.
भड्डली नवमी पर किसकी पूजा करते हैं?

हिंदू मान्यता के अनुसार भड्डली नवमी पर जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है. मान्यता है कि श्री हरि के योगनिद्रा पर जाने से पहले की जाने वाली उनकी यह पूजा अत्यंत ही पुण्यदायी और शुभ फल प्रदान करने वाली होती है. यही कारण है कि वैष्णव परंपरा से जुड़े लोग इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा, हवन और व्रत आदि करते हैं. चूंकि इसी पावन तिथि पर गुप्त नवरात्रि का आखिरी दिन पड़ता है, इसलिए इस दिन देवी दुर्गा की विशेष पूजा और हवन करने पर माता का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है.
Ashadha Amavasya 2026: आषाढ़ अमावस्या कब है? जानें इससे जुड़ा स्नान-दान और पूजा का महाउपाय
भड़ली नवमी का उपाय
हिंदू मान्यता के अनुसार भड़ली नवमी को अबूझ मुहूर्त माना गया है, इसलिए यदि इस पावन दिन बगैर किसी मुहूर्त का विचार किए हुए शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य कना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन विवाह करने पर व्यक्ति के दांपत्य जीवन में कोई दोष नहीं रहता है और उसे सुखी वैवाहिक जीने का आशीर्वाद प्राप्त होता है. भड़ली नवमी के दिन श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से सभी प्रकार के सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. यदि पति-पत्नी के बीच अनबन रहती हो तो रिश्तों में मिठास और आत्मीय लगाव के लिए इस दिन विशेष रूप से शिव-पार्वती या फिर कामदेव की पूजा करनी चाहिए.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं