Bakrid 2026 LIVE Updates, Eid-ul-Adha LIVE: 28 मई को भारत में बकरीद का पर्व मनाया जाएगा. बकरीद के त्योहार को ईद-उल-अजहा (Eid-Ul-Adha) के नाम से भी जाना जाता है. यह त्योहार इस्लाम के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जिसे दुनियाभर में बहुत खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है. ये त्योहार पैगंबर इब्राहिम की अल्लाह के प्रति आस्था और कुर्बानी या कहें त्याग की याद में मनाया जाता है. बकरीद की तैयारियां देशभर में जोर-शोर से चल रही हैं. बकरीद की शुरुआत सुबह की नमाज के साथ होती है. इस दिन विशेष सामूहिक नमाज होती है. इसके बाद कुर्बानी दी जाती है और फिर जरूरतमंद लोगों को दान किया जाता है. ये त्योहार इंसानियत, धैर्य, परोपकार का संदेश लेकर आता है.
क्या होता है कुर्बानी का नियम?
बकरीद के त्योहार पर बकरे, भेड़ या किसी जानवर की कुर्बानी दी जाती है. इस कुर्बानी के मांस को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है. इसमें पहला हिस्सा अपने परिवार के लिए, दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों और करीबियों के लिए और तीसरा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए होता है.
इस्लाम के आखिरी महीने में मनाई जाती है बकरीद
बकरीद यानी ईद-उल-अजहा का पर्व इस्लाम कैलेंडर के आखिरी महीने 'जुल-हिज्जा' में आता है. इसी महीने में सऊदी अरब में हज यात्रा भी संपन्न होती है. यह त्योहार दान, समानता और भाईचारे के संदेश को बढ़ावा देता है.
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नोएडा में गोल चक्कर चौक, संदीप पेपर मिल, हरौला चौक, बांस-बल्ली मार्केट तिराहा रास्ते रहेंगे प्रभावित
उद्योग मार्ग पर स्थित जामा मस्जिद सेक्टर-आठ नोएडा के आसपास मार्गों पर यातायात का अत्यधिक दबाव की स्थिति रहेगी. इससे गोल चक्कर चौक, संदीप पेपर मिल, हरौला चौक, बांस-बल्ली मार्केट तिराहा, सेक्टर आठ, दस और 11 और 12 चौक, झुंडपुरा चौक, सेक्टर छह पुलिस चौकी तिराहा प्रभावित रहने की संभावना.
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नोएडा में बकरीद को लेकर आज ट्रैफिक डायवर्जन, बाहर जा रहे हैं तो जान लें अपना रूट
आप आज ईद-उल-जुहा (बकरीद) पर शहर से बाहर कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले यातायात पुलिस का डायवर्जन प्लान जरूर समझ लें. यातायात पुलिस ने सुबह पांच बजे से 11 बजे तक कई स्थानों पर नमाज अदा के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन किया है. विभाग के डीसीपी प्रभारी अभय कुमार मिश्रा ने वाहन चालकों को यातायात संचालन में समस्या में समाधान के लिए यातायात हेल्पलाइन नंबर-9971009001 पर जारी किया है.
धार्मिक सीख
यह दिन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न हो, ईश्वर पर भरोसा बनाए रखना चाहिए. यह निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों की मदद करने का पर्व है.
हज का समापन
यह पर्व इस्लामिक कैलेंडर के अंतिम माह 'जुल-हिज्जा' में आता है, इसी दिन दुनिया भर के जायरीन अपनी हज यात्रा को पूर्ण करते हैं.
नमाज का महत्व
बकरीद की नमाज अल्लाह के प्रति आभार व्यक्त करने का जरिया है. नमाज के बाद पूरी दुनिया में शांति, अमन-चैन और तरक्की की विशेष दुआएं मांगी जाती हैं.
सामाजिक संदेश: आपसी भाईचारा
बकरीद का आध्यात्मिक संदेश समाज में प्रेम और सद्भाव बनाए रखना है. कुर्बानी के दौरान मिलने वाली खुशियां और बांटा जाने वाला भोजन यह सुनिश्चित करता है कि, कोई भी भूखा न रहे और समाज में एकजुटता बनी रहे.
नियम और सक्षमता
इस्लाम में कुर्बानी उन्हीं लोगों पर फर्ज है, जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं, जो लोग कमजोर या असहाय हैं, उन पर यह बाध्यकारी नहीं है. साथ ही, कुर्बानी के लिए चुने गए पशु का स्वस्थ होना अनिवार्य है.
सही बंटवारा: सामाजिक समरसता
कुर्बानी का मांस एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों के लिए होता है. इसे तीन बराबर हिस्सों में बांटने की परंपरा है. एक हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए और तीसरा हिस्सा समाज के गरीब और जरूरतमंदों के लिए.
कुर्बानी का असली भाव: सिर्फ दान नहीं, समर्पण
प्रो. अख्तरुल वासे के अनुसार, कुर्बानी का अर्थ केवल जानवर की बलि देना नहीं है. इसका मुख्य उद्देश्य अपने अहंकार, स्वार्थ और बुराइयों को त्यागना है. अल्लाह के सामने आपकी 'नेक नीयत' और 'नेकी' ही सबसे अधिक मायने रखती है.
मिथुन राशि: करियर और व्यापार में सफलता
कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और वरिष्ठ अधिकारी आपके काम की सराहना करेंगे. यदि आप व्यापारी हैं, तो ग्राहकों और साझेदारों के साथ संबंध प्रगाढ़ होंगे. पुराने प्रोजेक्ट्स से लाभ के योग हैं, बस किसी भी निर्णय को लेने से पहले उसकी बारीकी से जांच अवश्य कर लें.
मिथुन राशि: आज का राशिफल
आज चंद्रमा आपकी राशि से धन भाव में गोचर करेंगे. यह गोचर आपके जीवन में धन, परिवार और आत्मविश्वास से जुड़े मामलों में सकारात्मक प्रभाव लाएगा. आपका संतुलित स्वभाव आज आपको सही निर्णय लेने और रिश्तों में मिठास बढ़ाने में मदद करेगा.
इतिहास: कुर्बानी की परंपरा का सूत्रपात
बकरीद का पर्व पैगंबर हजरत इब्राहिम की अपने पुत्र इस्माइल के प्रति अटूट आस्था की याद दिलाता है. अल्लाह की रजा के लिए दी गई उनकी परीक्षा के प्रतीक के रूप में ही आज के दिन कुर्बानी की परंपरा की शुरुआत हुई, जो हमें ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देती है.
नेक इंसान बनने का पर्व
इकबाल अंसारी ने स्पष्ट किया कि, कुर्बानी केवल एक रस्म नहीं, बल्कि नेक इंसान बनने और सभी धर्मों का सम्मान करने का प्रतीक है. उन्होंने हिंदू-मुसलमानों के बीच एकता और सौहार्द को मजबूत करने की पुरजोर अपील की है.
भाईचारे का संदेश: इकबाल अंसारी की अपील
अयोध्या बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि, 'बकरीद का असल मकसद भाईचारा और आपसी सम्मान है.' उन्होंने संदेश दिया कि, त्योहार तभी सफल है जब पड़ोसी और समाज के सभी लोग खुश हों.
ईदगाह में नमाज और सफाई पर जोर
मौलाना ने अपील की है कि, नमाज ईदगाहों में ही अदा करें और वहां समय से पहुंचें. साथ ही, कुर्बानी के अवशेषों को इधर-उधर न फेंककर नगर निगम द्वारा तय की गई व्यवस्था के तहत ही नष्ट करने की सलाह दी गई है.
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया की 12 सूत्रीय गाइडलाइन
इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने बकरीद के मद्देनजर 12 सूत्रीय सलाह जारी की है. उन्होंने सभी से अपने-अपने राज्यों के नियमों का सख्ती से पालन करने और कुर्बानी के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा है.
इमाम का संदेश
यदि किसी की बात से दूसरे को ठेस पहुंचती हो, तो शांत रहना और संयम बनाए रखना भी एक तरह की कुर्बानी है- 'इमाम शफीक कासमी'
त्योहार की तैयारियां
देशभर में ईद-उल-अजहा को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, ताकि लोग शांति और हर्षोल्लास के साथ त्योहार मना सकें.
परंपराओं का सम्मान
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मौलाना एजाज कश्मीरी ने कहा कि, 'सभी समुदायों को एक-दूसरे के धर्म और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए, जिससे देश में सामाजिक सौहार्द बना रहे.'
कानून का सम्मान
सरकारी नियमों पर बात करते हुए मौलानाओं ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय कानून का सम्मान करता है. शांति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं के साथ त्योहार मनाने की पूरी तैयारी है.
शांतिपूर्ण उत्सव की अपील
इमाम ने जोर दिया कि ईद-उल-अजहा त्याग, सेवा और भाईचारे का पर्व है. उन्होंने लोगों से अपील की कि समाज में दिखावे के बजाय इंसानियत और आपसी प्रेम को बढ़ावा दें.
सच्ची कुर्बानी का संदेश
नखोदा मस्जिद के इमाम शफीक कासमी ने कहा कि, बकरीद केवल मवेशियों की कुर्बानी का नाम नहीं है, बल्कि असली कुर्बानी अपने अहंकार, स्वार्थ और बुराइयों को त्यागने में है.
बकरीद पर धार्मिक गुरुओं ने दी शुभकामनाएं
देशभर में आज ईद-उल-अजहा के मौके पर विभिन्न धार्मिक नेताओं और समुदायों के प्रतिनिधियों ने लोगों को भाईचारे, त्याग और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया है. कोलकाता स्थित नखोदा मस्जिद के इमाम शफीक कासमी ने ईद-उल-अजहा के अवसर पर सभी धर्मों के लोगों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि ईद और बकरीद केवल धार्मिक त्योहार नहीं हैं, बल्कि त्याग, सेवा और भाईचारे का संदेश का पर्व है.
ईद-उल-अजहा मुबारक हो
ईद-उल-अजहा मुबारक हो
मुबारक मौला अल्लाह ने अता फरमाया,
एक बार फिर बंदगी की राह पर चलाया।
अदा करना अपना फर्ज खुदा के लिए,
मुबारक आपको ईद-उल-अजहा!
इस ईद-उल-अजहा पर नफरतों को मिटाएं
इन खूबसूरत दुआओं के साथ खुशियां बांटें।
आपको और आपके परिवार को हमारी ओर से ईद मुबारक!
बकरीद पर मुफ्त में कर सकेंगे ताजमहल का दीदार, जानिए कितने बजे से होगी फ्री एंट्री
28 मई को ताजमहल में एंट्री 3 घंटे के लिए बिल्कुल फ्री रहेगी. इस दौरान भारतीयों के 50 रुपए और विदेशियों के 1100 रुपए का टिकट नहीं लगेगा, लेकिन मुख्य मकबरे तक जाना चाहते हैं, तो टिकट लेना पड़ेगा.
बकरीद पर ताजमहल में बिल्कुल फ्री एंट्री
सरकार की तरफ से बकरीद के दिन ताजमहल में बिल्कुल फ्री एंट्री का ऐलान किया गया है. हालांकि, यह छूट पूरे दिन के लिए नहीं है. इसके लिए एक टाइम फिक्स किया गया है. अगर आप भी बिना टिकट लिए ताजमहल देखना चाहते हैं, तो जाने से पहले समय और नियम जरूर जान लें, ताकि वहां जाकर आपको कोई परेशानी न हो.
नमाज कितने बजे होगी
ईद-उल-अजहा की नमाज गुरुवार 28 मई को सुबह 5:30 से 10:30 बजे तक शहर की सभी ईदगाह व मस्जिदों में अदा की जाएगी. नमाज को लेकर ईदगाह और मस्जिदों में तैयारी जारी हैं. ईदगाह और मस्जिदों में अदा की जाने वाली ईद-उल-अजहा नमाज का समय जारी हो गया है.
Bakrid 2026 LIVE: बकरीद पर इस संदेश से दें अपनों को मुबारकबाद
ईद का दिन है, अल्लाह का इनाम है,
कुर्बानी से भरपूर, यह प्यार का पैगाम है.
ईद-उल-अजहा की मुबारकबाद!
Eid-Al-Adha 2026 LIVE Updates: भाईचारा, आपसी एकता की भावना को बढ़ाने का प्रतीक है बकरीद का पर्व
एनडीटीवी ने मौलाना सूफीयान और मौलाना इरफान साहब से खास बातचीत की. मौलाना इरफान साहब ने बताया कि गोश्त खाना ही बस बकरीद का उद्देश्य नहीं है. उन्होंने बताया कि यह त्योहार मुख्य रूप से इस बात का प्रतीक है कि एक सच्चे आस्तिक को अल्लाह की रजा (इच्छा) के लिए अपनी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी देने से भी पीछे नहीं हटना चाहिए. कुर्बानी के गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है.एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों के लिए,दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए, तीसरा हिस्सा अपने परिवार के लिए रखा जाता है. इस त्योहार का उद्देश्य सिर्फ मांस बांटना या रस्म निभाना नहीं है, बल्कि इंसानों के बीच भाईचारा, आपसी एकता और समाज के गरीब तबके की मदद करने की भावना को बढ़ावा देना है.
कुर्बानी को लेकर क्या नियम हैं?
मौलाना सूफियान और मौलाना इरफान साहब दोनों ने कुर्बानी के नियम को लेकर अपनी बात रखी है. एनडीटीवी से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि किस तरह के जानवरों की कुर्बानी के लिए लाया जाता है. उन्होंने बताया कि कुर्बानी के लिए खास तौर पर बकरा,भैंस और गाय प्रयोग में लाए जाते हैं. गाय काटने को लेकर देश में प्रतिबंध है इसलिए भैंस और बकरे को ही हम लोग बकरीद पर कुर्बानी के लिए लाते हैं.
क्यों मनाई जाती है ईद-उल-अजहा
ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार मुसलमानों के लिए बहुत खास होता है और इसे पूरी दुनिया में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह दिन हजरत इब्राहिम की उस कुर्बानी और अल्लाह के प्रति उनकी निष्ठा को याद करता है, जब वे अल्लाह के हुक्म का पालन करने के लिए अपने बेटे की कुर्बानी देने को तैयार हो गए थे. इस्लामी मान्यता के अनुसार, हजरत इब्राहिम को सपने में अल्लाह का आदेश मिला था कि वे अपने बेटे की कुर्बानी दें.
उन्होंने अल्लाह के आदेश को मानने का फैसला किया, लेकिन कुर्बानी से पहले ही अल्लाह ने उनकी आस्था को स्वीकार कर लिया और उनके बेटे की जगह एक जानवर कुर्बानी के लिए भेज दिया. तभी से मुसलमान इस दिन को नमाज, कुर्बानी, दान और परिवार के साथ मिलकर मनाते हैं. साथ ही आज भी दुनिया भर के मुस्लिम बकरी, भेड़, या ऊंट की कुर्बानी करते हैं. कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है- एक अपने परिवार के लिए, एक रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए, और एक गरीबों के लिए ताकि इस त्योहार में आपसी भाईचारा, मदद और इंसानियत की भावना बनी रहे.
बकरीद का दूसरा नाम क्या है
बकरीद का सबसे प्रचलित दूसरा नाम ईद-उल-अजहा (Eid-al-Adha) है. इसे विभिन्न क्षेत्रों और भाषाओं में कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे ईद-उल-जुहा (Eid-ul-Zuha), बकरा ईद (Bakra Eid) और कुर्बानी की ईद.
Eid LIVE: कैसे मनाई जाती है बकरीद?
- बकरीद पर लोग सुबह जल्दी उठकर नहाते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं.
- परिवार के बड़े पुरुष साफ और पारंपरिक कपड़े पहनकर मस्जिद जाते हैं और नमाज पढ़ते हैं.
- नमाज के बाद जानवर की कुर्बानी दी जाती है और अल्लाह का शुक्रिया अदा किया जाता है.
- इसके बाद लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलते हैं, गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करते हैं.
Bakrid LIVE Updates: मुख्य रूप से साल में मनाई जाती हैं 2 ईद
इस्लाम धर्म में मुख्य रूप से दो ईद मनाई जाती हैं. एक ईद-उल-फ़ितर और दूसरी ईद-उल-अजहा. ईद-उल-फितर को मीठी ईद के नाम से जाना जाता है. ये इस्लाम धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जो रमजान के पवित्र महीने के समापन और शव्वाल महीने की शुरुआत का प्रतीक होता है. वहीं, बकरीद यानी ईद-उल-अजहा इस्लाम कैलेंडर के आखिरी महीने 'जुल-हिज्जा' में मनाई जाती है.
Eid ul Adha LIVE Updates: क्या है नमाज का टाइम?
ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नमाज आमतौर पर सुबह 6:15 बजे से 10:00 बजे के बीच अदा की जाती है. अलग-अलग शहरों में मस्जिद और सूर्योदय के समय के अनुसार इसमें 15-30 मिनट का अंतर हो सकता है.
Bakra Eid 2026 LIVE Updates: बकरीद का महत्व
ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार मुसलमानों के लिए बहुत खास होता है और इसे पूरी दुनिया में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह दिन हजरत इब्राहिम की उस कुर्बानी और अल्लाह के प्रति उनकी निष्ठा को याद करता है, जब वे अल्लाह के हुक्म का पालन करने के लिए अपने बेटे की कुर्बानी देने को तैयार हो गए थे. इस्लामी मान्यता के अनुसार, हजरत इब्राहिम को सपने में अल्लाह का आदेश मिला था कि वे अपने बेटे की कुर्बानी दें.
उन्होंने अल्लाह के आदेश को मानने का फैसला किया, लेकिन कुर्बानी से पहले ही अल्लाह ने उनकी आस्था को स्वीकार कर लिया और उनके बेटे की जगह एक जानवर कुर्बानी के लिए भेज दिया. तभी से मुसलमान इस दिन को नमाज, कुर्बानी, दान और परिवार के साथ मिलकर मनाते हैं. साथ ही आज भी दुनिया भर के मुस्लिम बकरी, भेड़, या ऊंट की कुर्बानी करते हैं. कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है- एक अपने परिवार के लिए, एक रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए, और एक गरीबों के लिए ताकि इस त्योहार में आपसी भाईचारा, मदद और इंसानियत की भावना बनी रहे.