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Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी के हर साधक को पता होना चाहिए पूजा से जुड़े ये 10 जरूरी नियम

Maa Baglamukhi Worship Rules: पंचांग के अनुसार आज वैशाख मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि पर बगलामुखी जयंती (Baglamukhi Jayanti) का पर्व मनाया जा रहा है. जीवन से जुड़े सभी भय, शोक और शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली आठवीं महाविद्या मां बगलामुखी की पूजा को सफल बनाने के लिए जिन नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है, उसे जानने के लिए पढ़ें ये लेख. 

Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी के हर साधक को पता होना चाहिए पूजा से जुड़े ये 10 जरूरी नियम
Baglamukhi Jayanti 2026: मां बगलामुखी को प्रसन्न के लिए किस विधि से करें साधना?
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Maa Baglamukhi Ki Puja Ke Niyam: सनातन परंपरा में मां बगलामुखी की साधना जीवन से जुड़े सभी भय को दूर करके शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली मानी गई है. चूंकि माता का रंग सोने के समान पीला है, इसलिए देवी के भक्त उन्हें पीतांबरा कहकर बुलाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार मां बगलामुखी की पूजा करने वाले भक्त को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में जीत हासिल होती है, लेकिन 10 महाविद्या में से आठवीं देवी मां बगलामुखी की पूजा के लिए शास्त्रों में कुछेक विशेष नियम बताए गये हैं, जिनका पालन किए बगैर देवी की साधना पूर्ण नहीं होती है. आइए मां बगलामुखी की पूजा से जुड़े जरूरी नियम जानते हैं. 

मां बगलामुखी की पूजा के नियम 

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  • 1. हिंदू मान्यता है कि मां बगलामुखी की पूजा या फिर कहें साधना किसी पवित्र स्थान पर किसी सिद्ध पुरुष के निर्देशन में करने पर शीघ्र सफल हो जाती है .
  • 2. मां बगलामुखी की साधना हमेशा किसी सिद्ध गुरु की आज्ञा के बाद उनके निर्देशन में ही करना चाहिए. साधना के दौरान गुरु के सभी निर्देश और पूजा के नियमों का पालन करना चाहिए. 
  • 3. हिंदू मान्यता के अनुसार मां बगलामुखी की साधना करने वाले साधक को देवी की पूजा और उनके लिए व्रत आदि रखते समय ब्रह्मचर्य का पूरी तरह से पालन करना चाहिए. 
  • 4. मां बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का विशेष प्रभाव माना गया है. ऐसे में देवी साधना करने वाले साधक को पूजा के दौरान पीले रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए. 
  • 5. मां बगलामुखी की पूजा में प्रयोग लाई जाने वाली अधिकांश सामग्री भी पीले रंग की होती है. 

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  • 6. मां बगलामुखी की साधना हमेशा गुप्त रूप से करनी चाहिए. माता की पूजा कभी भी खुले आकाश के नीचे नहीं करना चाहिए. 
  • 7. देवी के इस दिव्य स्वरूप की साधना और उनके मंत्रों का जप रात्रि के  10 से लेकर प्रात: 4 बजे के बीच ज्यादा प्रभावी माना गया है. बगलामुखी माता के मंत्रों का जप हमेशा हल्दी की माला से करना चाहिए. 
  • 8. किसी भी प्रकार की समस्या का समाधान पाने या फिर शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए मां बगलामुखी के यंत्र की विशेष रूप से पूजा करनी चाहिए. 
  • 9- बगलामुखी की साधना के दौरान साधक को एक समय बगैर शक्कर और नमक के उपवास रखना चाहिए. साधना के दौरान फलहार करें. 
  • 10. मां बगलामुखी की जयंती वाले दिन नाखून, दाढ़ी एवं बाल न कटवाएं. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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