Benefits of different types Hanuman statue: हिंदू धर्म में हनुमान जी एक ऐसे देवता है, जिन्हें शक्ति का पुंज माना जाता है. पवनपुत्र हनुमान की साधना करने वाले साधक को जीवन में कभी भी कोई भय, रोग या शोक नहीं सताता है. शायद यही कारण है कि देश के कोने-कोने में आपको हनुमान जी के छोटे-बड़े मंदिर मिल जाएंगे, जहां पर बजरंगी कहीं बाल रूप में तो कहीं विराट स्वरूप धारण किए हुए विराजमान हैं. आज हनुमत कृपा बरसाने वाला ज्येष्ठ मास का तीसरा बड़ा मंगल का पावन पर्व है. ऐसे में सवाल उठता है कि आज उनके किस स्वरूप की पूजा करने पर कौन सी कामना पूरी होती है? बाल हनुमान से लेकर पंचमुखी हनुमान तक के दिव्य स्वरूप का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व जानने के लिए पढ़ें ये लेख.
बाल हनुमान

हिंदू मान्यता के अनुसार बाल हनुमान जी की पूजा अत्यंत ही शुभ और मंगलदायी मानी गई है. मान्यता है कि बजरंगी के बाल स्वरूप की साधना करने पर साधक की संतान सुख की कामना शीघ्र ही पूरी होती है. वहीं जिन लोगों की संतान होती है, उनकी हनुमत सभी प्रकार से रक्षा करते हुए उन्हें सुख-समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करते हैं. बजरंगी के बाल स्वरूप की पूजा करने पर बच्चों को किसी भी प्रकार की बुरी नजर लगने का खतरा नहीं रहता है. हनुमत कृपा से संतान हमेशा सुखी और स्वस्थ रहती है. हिंदू मान्यता के अनुसार बाल हनुमान जी की पूजा से बच्चों को बल, बुद्धि और विवेक का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
दास हनुमान

जिन मंदिरों में हनुमान जी अपने स्वामी यानि प्रभु श्री राम के चरणों में हाथ जोड़कर बैठे या खड़े नजर आते हैं, उस मंदिर में हनुमत साधना करना अत्यंत ही शुभ और फलदायी मानी गई है. मान्यता है कि जिस घर में राम दरबार के समक्ष हाथ जोड़कर बैठे हुए हनुमान जी की साधना होती है, उस घर के लोगों के भीतर का अहंकार दूर होता है और आपसी प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है. हनुमत कृपा से परिवार के सदस्यों के बीच बेहतर तालमेल बना रहता है.
वीर हनुमान

जिन मंदिरों में हनुमान जी अपने हाथ में पर्वत उठाए हुए होते हैं या फिर गदा आदि धारण किए होते हैं, उस मंदिर में बजरंगी की साधना करने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है. हनुमत कृपा से साधक के सारे संशय दूर होते हैं और वह निर्भय होकर अपने जीवन के सभी बड़े निर्णय लेने में सक्षम होता है. वीर हनुमान की पूजा करने पर साधक को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विजय और सफलता प्राप्त होती है.
पंचमुखी हनुमान

हिंदू मान्यता के अनुसार पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति की साधना सभी कष्टों को हरने वाली मानी गई है. बजरंगी का यह स्वरूप सबसे ज्यादा शक्तिशाली और प्रभावी माना गया है. हनुमान जी के इस दिव्य स्वरूप में उनके पांच मुख - वानर, सिंह, गरुड़, वराह और अश्व का होते है. हिंदू मान्यता के अनुसार पंचमुखी हनुमान की पूजा करने पर हनुमत सभी दिशाओं से आने वाली बाधाओं को दूर करके साधक की रक्षा करते हैं. पंचमुखी हनुमान की पूजा करने वाले साधक को कभी भी तंत्र और मंत्र का भय नहीं रहता है. पंचमुखी हनुमान की पूजा करने पर वह अपने सभी शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है. पंचमुखी हनुमान की पूजा करने पर साधक को कोट-कचहरी के मामलों में विजय प्राप्त होती है.
ध्यान मग्न हनुमान

हनुमान की ध्यान मुद्रा वाली प्रतिमा या चित्र को उनके शांति का स्वरूप माना जाता है. ऐसे चित्र में वे अपने प्रभु श्री राम का ध्यान करते हुए अपनी आंखें बंद करके बैठे हुए होते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार ध्यान मग्न हनुमान की साधना करने पर साधक को असीम मानसिक सुख और शांति प्राप्त होती है. हनुमान जी की ध्यान मग्न वाली प्रतिमा की पूजा करने पर जीवन से जुड़ा सारा अवसाद दूर होता है और व्यक्ति की एकाग्रता और मानसिक शक्ति बढ़ती है.
दक्षिणमुखी हनुमान

हिंदू मान्यता के अनुसार जिन मंदिरों में हनुमान जी का मुख दक्षिणा दिशा की ओर होता है, उसे दक्षिणमुखी हनुमान कहा जाता है. हिंदू धर्म में ऐसी प्रतिमा की पूजा करना अत्यंत ही शुभ माना गया है.
हिंदू मान्यता के अनुसार हनुमान जी ने अपनी शक्तियों का सबसे ज्यादा प्रदर्शन दक्षिण दिशा में किया था, इसलिए दक्षिणमुखी हनुमान जी की पूजा करने पर साधक की कामनाएं शीघ्र ही पूरी होती है. दक्षिणमुखी हनुमान जी की पूजा करने पर साधक को किसी भी प्रकार का भय नहीं होता है, क्योंकि हनुमान जी उसके सारे संकट हर लेते हैं.
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