Sankat Mochan Hanuman Ashtak Significance: सनातन परंपरा में हनुमान जी संकटमोचक कहा जाता है क्योंकि सच्चे मन से की जाने वाली उनकी साधना सभी संकटों से शीघ्र ही मुक्ति दिलाती है। पवनपुत्र हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार का दिन बेहद शुभ माना गया है, लेकिन इसकी शुभता तब और भी ज्यादा बढ़ जाती है, जब यह ज्येष्ठ मास में पड़ता है और बड़ा मंगल या फिर बुढ़वा मंगल कहलाता है। मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति इस पावन दिन हनुमान जी के गुणों का गान करने वाला हनुमाष्टक का गान करता है तो बजरंगबली उसके सभी संकटों को शीघ्र ही दूर करके अनंत सुख प्रदान करते हैं। आइए संकट मोचन हनुमान अष्टक के पाठ का धार्मिक महत्व और इसके लाभ के बारे में विस्तार से जानते हैं।
क्या है हनुमानाष्टक?
हिंदू मान्यता के अनुसार जब पवनपुत्र हनुमान जामवंत और अंगद के साथ सीता माता की खोज में गये तो जामवंत ने उन्हें उनकी शक्तियों का भान कराया था। हनुमान जी की शक्तियों को याद दिलाते हुए उनकी महिमा का गान गोस्वामी तुलसीदास जी ने जिन 8 पदों के जरिए की है, उसे ही सनातन परंपरा में हनुमानाष्टक कहा गया है। हिंदू मान्यता के अनुसार हनुमानाष्टक का पाठ जीवन से जुड़ी सभी मुश्किलों से उबारने वाला माना गया है।
कब और कैसे करें हनुमानाष्टक का पाठ?

हिंदू मान्यता के अनुसार मारुतिनंदन कहलाने वाले हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमानाष्टक का पाठ मंगलवार के दिन सबसे उत्तम माना गया है। हालांकि इसे आप शनिवार या फिर अन्य किसी भी दिन कर सकते हैं। हनुमत साधक को अपने कष्टों को दूर और कामनाओं को पूरा करने के लिए बड़ा मंगल वाले दिन तन और मन से पवित्र होकर किसी हनुमत धाम अथवा घर के पूजा स्थान पर लाल रंग का आसन बिछाकर सबसे पहले हनुमान जी की धूप, दीप, चंदन, पुष्प, फल, भोग आदि को अर्पित करते हुए विधि—विधान से पूजा करनी चाहिए। इसके बाद साधक को हनुमानाष्टक का श्रद्धा एवं भक्ति के साथ पाठ करना चाहिए। मान्यता है कि हनुमानाष्ट के साथ चालीसा का पाठ करने से इसकी शुभता और भी बढ़ जाती है।
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संकट मोचन हनुमानाष्टक पाठ के लाभ
हिंदू मान्यता के अनुसार संकट मोचन हनुमानाष्ट का पाठ सबसे उत्तम दिन मंगलवार और शुभ समय प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त या फिर संध्याकाल होता है। मान्यता है कि जो कोई व्यक्ति इस हनुमानाष्टक का लगातार 21 या 40 दिन तक पाठ करता है तो उसके सभी संकट हनुमान जी हर लेते हैं और वह भय और चिंता मुक्त हो जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार हनुमानाष्टक का पाठ सभी प्रकार के रोग और शोक को दूर करके सुख—सौभाग्य को दिलाने वाला माना गया है। हनुमानाष्टक पाठ के पुण्यफल से साधक के जीवन से जुड़े सारे कर्ज खत्म और धन प्राप्ति में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं। हनुमानाष्टक का पाठ साधक के भीतर आत्मविश्वास और आत्मबल बढ़ाता है।
संकटमोचन हनुमानाष्टक

बाल समय रबि भक्षि लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारो .
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो .
देवन आन करि बिनती तब, छांड़ि दियो रबि कष्ट निवारो .
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो .1.
बालि की त्रास कपीस बसै गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो .
चौंकि महा मुनि शाप दिया तब, चाहिय कौन बिचार बिचारो .
के द्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के शोक निवारो .
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो .2.
अंगद के संग लेन गये सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो .
जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाय इहाँ पगु धारो .
हेरि थके तट सिंधु सबै तब, लाय सिया-सुधि प्राण उबारो .
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो .3.

रावन त्रास दई सिय को सब, राक्षसि सों कहि शोक निवारो .
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मारो .
चाहत सीय अशोक सों आगि सु, दै प्रभु मुद्रिका शोक निवारो .
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो .4.
बाण लग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सुत रावण मारो .
लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो .
आनि सजीवन हाथ दई तब, लछिमन के तुम प्राण उबारो .
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो .5.

रावण युद्ध अजान कियो तब, नाग कि फांस सबै सिर डारो .
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयोयह संकट भारो .
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो .
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो .6.
बंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पाताल सिधारो .
देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि, देउ सबै मिति मंत्र बिचारो .
जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावण सैन्य समेत संहारो .
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो .7.
काज किए बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो.
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसों नहिं जात है टारो.
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो.
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो .8.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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