
Puja niyam : हिन्दू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है. इस दौरान आपको विशेष नियमों का पालन करना जरूरी होता है, तभी पूजा का पूर्ण लाभ मिलता है. इन नियमों में एक महत्वपूर्ण नियम है पूजा करते समय आलती-पालती मारकर बैठने का. आपको बता दें कि पूजा से जुड़े हर नियम के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व जुड़ा हुआ होता है. ऐसे में आज हम आपको यहां पर आलती-पालती मारकर ही क्यों की जाती है पूजा, इसके बारे में विस्तार से बताएंगे..
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आलती-पालती मारकर बैठकर क्यों करते हैं पूजा
आलती-पालती मारकर पूजा करने का धार्मिक महत्वपूजा के दौरान आलती-पालती मारकर बैठने की परंपरा ऋषि मुनियों ने शुरू की थी.दरअसल, पुराने समय में ऋषि मुनि जमीन पर बैठकर ध्यान, पूजा, स्नान और अन्य धार्मिक काम किया करते थे. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जमीन पर बैठकर पूजा करने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है. वहीं, इस प्रकार पूजा-पाठ करने से किसी तरह का विघ्न पूजा में नहीं आता है. ऐसा माना जाता है कि इस आसन में पूजा करने से शक्ति में वृद्धि होती है.
आलती-पालती मारकर ज्योतिष महत्वइसके अलावा आलती-पालती मारकर बैठने से सात चक्र जागृत होते हैं. इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. साथ ही आलती-पालती मारकर बैठने से नकारात्मक दूर होती है. इससे ग्रहों की भी स्थिति सुधरती है और मन शांत होता है.
आलती-पालती मारकर पूजा करने का वैज्ञानिक महत्वआलती-पालती मारकर बैठने के कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं. यह शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत फायदेमंद होता है. असल में जब व्यक्ति इस स्थिति में बैठता है, तो उसे आराम की अनुभूति होती है. इससे चिंता, अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है. यह ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन रेग्यूलर करने का काम करता है और श्वास संबंधी परेशानियों से निजात दिलाता है. इसके अलावा ऐसे बैठकर पूजा करने से मेटाबॉलिज्म भी मजबूत होता है. साथ ही आपके दिमाग को भी मजबूती मिलती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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