
बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने लगातार चौथी बार ओडिशा का मुख्यमंत्री बनकर आज इतिहास के पन्नों में नया अध्याय जोड़ दिया। नवीन के साथ 21 मंत्रियों ने भी शपथ ली, जिनमें पांच नए चेहरे भी शामिल हैं।
पिछली सरकार के पांच सदस्यों को चुनाव मैदान में नहीं उतारा गया था। राज्यपाल एससी जमीर ने राजभवन में पटनायक तथा उनके नए मंत्रिमंडल के सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इन मंत्रियों में 11 कैबिनेट रैंक के मंत्री भी शामिल हैं।
भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लेने के लिए आज सुबह पुरी गए 67-वर्षीय नवीन ने शपथ ग्रहण करने के बाद कहा, हम ओडिशा की समृद्धि और बेहतरी के लिए एक टीम के रूप में काम करेंगे। कैबिनेट मंत्रियों के रूप में शपथ लेने वालों में प्रदीप कुमार अमात, डॉ दामोदर राउत, देबी प्रसाद मिश्रा, प्रदीप महारथी, बिजयश्री राउत्रे, बिक्रम केशरी आरूख, उषा देवी, लाल बिहारी हिमिरिका, जोगेन्द्र बेहरा, बद्री नारायण पात्रा और पुष्पेंद्र सिंहदेव शामिल हैं।
अपने पिता बीजू पटनायक का रिकॉर्ड तोड़ने के साथ साथ नवीन ने खुद को डॉ हरेकृष्ण महताब और जेबी पटनायक जैसे राज्य के अन्य नेताओं से आगे खड़ा कर दिया। 5 मई, 2000 से लगातार नवीन ओडिशा के मुख्यमंत्री पद पर हैं। डॉ महताब और जेबी पटनायक ने राज्य में इस पद पर तीन-तीन बार अपनी सेवाएं दीं। विश्वनाथ दास, महाराज कृष्णचंद्र गजपति नारायण देव, नवकृष्ण चौधरी, बीजू पटनायक, नंदिनी सत्पथी और हेमानंद बिस्वाल ने दो-दो बार राज्य की बागडोर संभाली।
महाराज राजेंद्र नारायण सिंहदेव, बीरेन मित्रा, सदाशिव त्रिपाठी, बिनायक आचार्य, नीलमणि राउत्रे और गिरधर गमांग को मुख्यमंत्री बनने का अवसर एक-एक बार ही मिला। वर्ष 1937 से कम से कम 15 नेता ओडिशा का नेतृत्व करने के लिए 27 मौकों पर शपथ ले चुके हैं।
कृष्ण चंद्र गजपति और विश्वनाथ दास ने 1937 से 1944 तक प्रधानमंत्री के तौर पर राज्य का कार्यभार संभाला और 13 अन्य ने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। फिलहाल असम के राज्यपाल जेबी पटनायक ने करीब 12 साल तक राज्य के मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभाला। कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता का कार्यकाल बाधित भी हुआ। पहली बार 1980 में उन्होंने केवल एक साल पूरा किया। वर्ष 1985 और 1995 में भी उनका कार्यकाल बाधित हुआ।
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