- केरल सरकार ने आईएएस अनु कुमारी को तिरुवनंतपुरम कलेक्टर पद से हटाकर पर्यटन विभाग का निदेशक नियुक्त किया है
- अनु कुमारी ने यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक दो हासिल की और बिना कोचिंग के सफलता प्राप्त की थी
- उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के दौरान अपने ढाई साल के बेटे को परिवार के पास छोड़कर अकेले मेहनत की थी
IAS Anu kumari: केरल कैडर की चर्चित आईएएस अधिकारी अनु कुमारी एक बार फिर चर्चा में हैं. हाल ही में केरल सरकार ने 35 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तबादले करते हुए 2018 बैच की आईएएस अनु कुमारी को तिरुवनंतपुरम जिला कलेक्टर के बाद अब पर्यटन विभाग के निदेशक के रूप में नियुक्त किया है. इस बीच उनका एक दिलचस्प इंटरव्यू भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने अपने हिंदू कॉलेज के सहपाठी, लोकप्रिय यूट्यूबर और कॉमेडियन डॉ. ललित शौकीन के साथ कॉलेज के दिनों से लेकर यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक-2 हासिल करने तक की यात्रा को याद किया.
17 साल बाद मिले दोनों दोस्तों ललित शौकीन और अनु कुमारी ने हिंदू कॉलेज दिल्ली के दिनों के मजेदार किस्से याद किए, तो कभी यूपीएससी, नौकरी और परिवार से जुड़े संघर्षों पर गंभीर चर्चा की. बातचीत के दौरान दोनों कई बार पुराने दिनों को याद कर ठहाके लगाते भी नजर आए. अनु कुमारी हरियाणा के सोनीपत से हैं, जबकि ललित शौकीन का पैतृक गांव दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र के पास दिचाऊं कलां है.
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IAS अनु कुमारी ने कॉमेडियन क्लासमेट ललित शौकीन के साथ इंटरव्यू में शेयर किए संघर्ष और सक्सेस स्टोरी. Photo Credit: LShokeen Films Youtube
हिंदू कॉलेज के दिनों की यादें
IAS अनु कुमारी और ललित शौकीन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में वर्ष 2003 से 2006 के बीच फिजिक्स ऑनर्स की पढ़ाई साथ की थी. इंटरव्यू में दोनों ने कॉलेज के दिनों के कई रोचक किस्से साझा किए. अनु ने बताया कि वह अपनी क्लास में अकेली छात्रा थीं जो रोज ट्रेन से सोनीपत से कॉलेज आती थीं. कॉलेज में उनका एक "गर्ल्स गैंग" भी था. ललित शौकीन ने मजाकिया अंदाज में परीक्षा का एक किस्सा सुनाया.
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि एक मैथ्स टेस्ट में उन्होंने अनु से कॉपी दिखाने के लिए कहा था. अनु ने जवाब दिया कि उस समय वह खुद भी ज्यादा तैयारी नहीं करती थीं. उन्होंने बताया कि उस परीक्षा में ललित को 40 में ठीक-ठाक अंक मिले थे, जबकि उनके केवल 5 नंबर आए थे. इस पर ललित ने हंसते हुए कहा कि अगर देखना ही था तो उनकी कॉपी से देख लेतीं. बातचीत के दौरान दोनों ने अपनी सहपाठी कासिमा और नेहा को भी याद किया. नेहा बाद में ललित शौकीन की पत्नी बनीं. कासिमा के बारे में दोनों ने मजाक में कहा कि वह परीक्षा के दौरान किसी को कॉपी नहीं दिखाती थीं.
MBA के बाद की नौकरी और कॉर्पोरेट करियर
कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद अनु कुमारी ने एमबीए किया और निजी क्षेत्र में नौकरी शुरू की. उन्होंने करीब नौ साल तक फाइनेंस और बिजनेस प्लानिंग से जुड़े क्षेत्रों में काम किया. उन्होंने बताया कि तीन साल मुंबई, तीन साल गुरुग्राम और तीन साल दिल्ली में नौकरी की. उस समय उनका लक्ष्य किसी सरकारी नौकरी में जाना था और उन्हें लगता था कि जरूरत पड़ने पर कर्मचारी चयन आयोग जैसी परीक्षाओं के जरिए सरकारी सेवा में प्रवेश किया जा सकता है.
टीना डाबी की खबर ने बदल दी जिंदगी
अनु कुमारी ने बताया कि उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने अखबार में टीना डाबी की सफलता की खबर पढ़ी. उन्होंने कहा कि उस समय वह निजी नौकरी कर रही थीं. एक दिन अखबार में पढ़ा कि टीना डाबी ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया है. यह खबर पढ़कर उनके भाई ने कहा कि अगर कोई मेहनत करके ऐसा कर सकता है तो वह भी कर सकती हैं. अनु के अनुसार, उसी समय भाई ने बिना बताए उनका यूपीएससी का फॉर्म भर दिया. नौकरी छोड़ने और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करने का फैसला यहीं से हुआ.
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IAS अनु कुमारी का क्लासमेट ललित शौकीन से इंटरव्यू, कॉलेज की यादों के साथ खुली UPSC सफलता की कहानी. Photo Credit: LShokeen Films Youtube
पहले प्रयास में एक नंबर से चूकीं
जब उन्होंने तैयारी शुरू की, तब प्रारंभिक परीक्षा (प्री) में केवल दो महीने का समय बचा था. उन्होंने पूरी मेहनत से तैयारी की, लेकिन पहले प्रयास में सिर्फ एक नंबर से प्री परीक्षा पास करने से चूक गईं. अनु कहती हैं कि बाद में उन्हें लगा कि यह उनके लिए अच्छा ही हुआ. यदि उस वर्ष प्री निकल जाती तो मुख्य परीक्षा की पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिल पाता. असफलता ने उन्हें एक पूरा वर्ष दिया, जिसे उन्होंने पूरी तरह तैयारी में लगाया.
ढाई साल के बेटे को छोड़कर की थी तैयारी
यूपीएससी की तैयारी के दौरान अनु कुमारी का बेटा करीब ढाई साल का था. उन्होंने बताया कि पढ़ाई के समय बेटा अक्सर उनकी गोद में आकर बैठ जाता था और उसका आसपास रहना स्वाभाविक रूप से पढ़ाई को प्रभावित करता था. इसी दौरान उनकी मौसी ने परिवार को सुझाव दिया कि यदि गंभीर तैयारी करनी है तो उन्हें अलग माहौल दिया जाए. इसके बाद अनु ने एक बेहद कठिन फैसला लिया और अपने छोटे बेटे को परिवार के पास छोड़कर हरियाणा के सोनीपत स्थित पुरखास गांव में मौसी के घर चली गईं. उन्होंने वहीं रहकर पूरी एकाग्रता के साथ तैयारी की. अनु मानती हैं कि यह निर्णय भावनात्मक रूप से बेहद कठिन था, लेकिन सफलता की दिशा में निर्णायक साबित हुआ.

क्लासमेट ललित शौकीन के इंटरव्यू में IAS अनु कुमारी ने बताया, टीना डाबी की खबर ने कैसे बदल दी किस्मत? Photo Credit: LShokeen Films Youtube
UPSC इंटरव्यू को लेकर क्या बोलीं अनु कुमारी?
सोशल मीडिया पर यूपीएससी इंटरव्यू को लेकर बनने वाले मीम्स और मिथकों पर भी अनु कुमारी ने खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि यूपीएससी इंटरव्यू में बेतुके या अजीब सवाल नहीं पूछे जाते. बोर्ड उम्मीदवार के ज्ञान, सोच, व्यक्तित्व और दृष्टिकोण को समझने के लिए प्रश्न पूछता है. उनके अनुसार, उम्मीदवारों को इंटरव्यू से डरने की जरूरत नहीं है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इंटरव्यू में झूठ न बोलें और जरूरत से ज्यादा चालाक बनने की कोशिश न करें. अनु ने बताया कि उनसे इंटरव्यू में पूछा गया था कि निजी क्षेत्र में नौ साल का करियर होने के बावजूद उन्होंने यूपीएससी का रास्ता क्यों चुना. इसके अलावा छात्रों की आत्महत्या जैसे सामाजिक मुद्दों पर भी सवाल पूछे गए थे.
यूपीएससी अभ्यर्थियों को दी यह सलाह
युवाओं, खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि की लड़कियों के लिए अनु कुमारी का संदेश बेहद प्रेरणादायक रहा. उन्होंने कहा कि कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि गांव से होने, आर्थिक स्थिति कमजोर होने या अंग्रेजी नहीं आने के कारण सफलता नहीं मिलेगी. जरूरी केवल मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य है. अनु ने बताया कि उन्होंने हरियाणा के गांव में बैठकर तैयारी की थी, जहां उस समय 'द हिंदू' अखबार तक नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होता था. इसके बावजूद उन्होंने ऑनलाइन संसाधनों की मदद से तैयारी की और किसी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया.

बिना कोचिंग हासिल की ऑल इंडिया रैंक-2
अनु कुमारी ने वर्ष 2017 की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया स्तर पर दूसरी रैंक प्राप्त की थी. महिलाओं में उनका स्थान पहला था. उनकी सफलता की कहानी उन अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा मानी जाती है जो नौकरी, परिवार और सीमित संसाधनों के बीच यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं.
यूपीएससी, उम्र सीमा और सैलरी पर क्या कहा?
इंटरव्यू के दौरान यूपीएससी से जुड़े कुछ सामान्य सवालों के जवाब भी अनु कुमारी ने दिए. उनके अनुसार सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा 32 वर्ष है, जबकि आरक्षित वर्गों को आयु में अतिरिक्त छूट मिलती है. सिविल सेवा परीक्षा में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम छह प्रयास मिलते हैं.
उन्होंने बताया कि एक आईएएस अधिकारी का शुरुआती मूल वेतन लगभग 56 हजार रुपये से शुरू होता है और सेवा के दौरान यह बढ़ता जाता है. हालांकि उनका मानना है कि इस सेवा की सबसे बड़ी ताकत केवल वेतन नहीं, बल्कि समाज में मिलने वाला सम्मान और प्रभाव है.
आईएएस बनने के बाद कौन-कौन सी जिम्मेदारियां मिलती हैं?
भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अनु कुमारी ने बताया कि आईएएस अधिकारी का करियर आमतौर पर असिस्टेंट कलेक्टर (अंडर ट्रेनिंग) के रूप में शुरू होता है. इसके बाद सब-कलेक्टर, जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट जैसी जिम्मेदारियां मिलती हैं. आगे चलकर राज्य की राजधानी या केंद्र सरकार में सचिव स्तर तक की जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिलता है. उन्होंने कहा कि नेताओं द्वारा बनाई गई नीतियों को धरातल पर लागू करने की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों की होती है. यही कारण है कि प्रशासनिक सेवा देश की शासन व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है.
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