- कश्मीर के पुलवामा के मोहम्मद ओवैस भट ने लगातार तीन प्रयासों में CDS परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 107 हासिल की है
- ओवैस ने महंगी कोचिंग की बजाय केवल 399 रुपये में AI सब्सक्रिप्शन लेकर परीक्षा के प्रश्न पैटर्न का विश्लेषण किया
- उन्होंने सिलेबस को गहराई से समझकर रणनीति बनाई और बिना दिखावे के अध्ययन सामग्री व समय प्रबंधन पर जोर दिया
कश्मीर के दक्षिणी जिले पुलवामा के डेंजरपोरा क्षेत्र के रहने वाले 22 वर्षीय मोहम्मद ओवैस भट इन दिनों युवाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं. उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित CDS परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 107 हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे इलाके का नाम रोशन किया है. यह सफलता उन्हें पहली या दूसरी कोशिश में नहीं मिली. ओवैस ने लगातार चार साल से अधिक समय तक तैयारी की और दो बार असफल होने के बाद तीसरे प्रयास में यह मुकाम हासिल किया. परिणाम घोषित होते ही उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया.
AI बना तैयारी का नया हथियार
ओवैस की सफलता की सबसे दिलचस्प बात उनकी तैयारी का तरीका है. जहां अधिकांश अभ्यर्थी महंगी कोचिंग पर निर्भर रहते हैं, वहीं उन्होंने एआई को अपना सहायक बनाया.उनके अनुसार, उन्होंने 399 रुपये का एक पेड AI सब्सक्रिप्शन लिया और उसमें पूरा सिलेबस अपलोड कर परीक्षा के बदलते ट्रेंड्स का विश्लेषण कराया. AI की मदद से वे प्रश्नों के पैटर्न समझ पाए और संभावित विषयों की पहचान कर सके. ओवैस का कहना है कि इससे उन्हें परीक्षा में आने वाले करीब 20 से 40 प्रश्नों के स्वरूप का पहले से अंदाजा लगाने में मदद मिली. उनके मुताबिक, आज के दौर में ChatGPT जैसे टूल्स सही दिशा में इस्तेमाल किए जाएं तो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को अधिक प्रभावी बना सकते हैं.
पढ़ाई शुरू करने से पहले सिलेबस समझें
सफलता का मंत्र पूछे जाने पर ओवैस सबसे पहले सिलेबस को समझने की सलाह देते हैं. उनका मानना है कि बिना सिलेबस को जाने तैयारी शुरू करना ऐसे है जैसे किसी व्यक्ति को अथाह समुद्र में छोड़ दिया जाए. वे कहते हैं कि अगर अभ्यर्थी पहले सिलेबस को गहराई से समझ लें और फिर उसी के अनुसार रणनीति बनाएं तो वही बड़ा समुद्र छोटे-छोटे तालाबों में बदल जाता है, जिन्हें आसानी से पार किया जा सकता है.

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महंगी कोचिंग नहीं, सही रणनीति जरूरी
ओवैस का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं है. उनके अनुसार, कई छात्र दो से ढाई लाख रुपये तक कोचिंग संस्थानों पर खर्च कर देते हैं, जबकि इंटरनेट और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म की मदद से बहुत कम लागत में भी बेहतर तैयारी की जा सकती है. वे युवाओं को सलाह देते हैं कि दिखावे से दूर रहकर अध्ययन सामग्री, अभ्यास और समय प्रबंधन पर ध्यान दें.
20 किलो वजन बढ़ा, फिर दो महीने में घटाया
CDS की तैयारी केवल लिखित परीक्षा तक सीमित नहीं होती. इसमें शारीरिक दक्षता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. ओवैस बताते हैं कि लिखित परीक्षा की तैयारी के दौरान उनका वजन 20 किलो से ज्यादा बढ़ गया था. हालांकि, जब शारीरिक परीक्षण का समय आया तो उन्होंने कड़ी मेहनत की और केवल दो महीने के भीतर 20 किलो वजन कम कर लिया. इसके लिए उन्हें रोजाना कड़ा वर्कआउट और अनुशासित दिनचर्या अपनानी पड़ी.
सेना के इस अधिकारी से मिली प्रेरणा
ओवैस ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के निरंतर सहयोग को दिया है. उनका कहना है कि परिवार ने हर परिस्थिति में उनका साथ निभाया और उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया. प्रेरणा के स्रोत के बारे में पूछने पर वे भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी ब्रिगेडियर एस.एस. शेखावत का नाम लेते हैं. ओवैस कहते हैं कि उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व और उपलब्धियों ने उन्हें हमेशा प्रेरित किया.
अब IMA में शुरू होगी नई पारी
CDS परीक्षा में सफलता के बाद ओवैस जनवरी में देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी में प्रशिक्षण के लिए शामिल होंगे. करीब डेढ़ वर्ष के प्रशिक्षण के बाद उन्हें भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन मिलेगा. पुलवामा के इस युवा की कहानी यह साबित करती है कि सीमित संसाधन, असफलताएं और चुनौतियां सफलता की राह में बाधा नहीं बनतीं. स्पष्ट लक्ष्य, लगातार मेहनत और तकनीक का सही उपयोग किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकता है.
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