दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, कैंपस में छात्र राजनीति की सरगर्मी तेज होती जा रही है. 47 कॉलेजों और पांच विभागों में होने वाले चुनाव को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और आइसा-एसएफआई गठबंधन अपने-अपने मुद्दों और अभियानों के जरिए छात्रों तक पहुंच बनाने में जुटे हैं. चुनावी प्रचार के बीच विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों की संस्कृति को केंद्र में रखकर कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं.
पूर्वांचल के छात्रों को जोड़ने की कोशिश
इसी क्रम में ABVP ने नॉर्थ कैंपस स्थित रामजस कॉलेज में ‘पूर्वांचल स्पंदन' कार्यक्रम का आयोजन किया. कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले छात्रों को सांस्कृतिक जुड़ाव के जरिए संगठन और चुनावी अभियान से जोड़ना रहा.
कार्यक्रम में भोजपुरी अभिनेता और भाजपा सांसद मनोज तिवारी, अभिनेत्री अक्षरा सिंह, उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और ABVP के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान मौजूद रहे. DUSU पैनल से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार यश डाबस, उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार ईशु मौर्य, सचिव पद की उम्मीदवार रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार लक्ष्य राज सिंह भी कार्यक्रम में शामिल हुए.

अक्षरा सिंह के गीतों पर झूमे छात्र
कार्यक्रम में अक्षरा सिंह की मौजूदगी छात्रों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रही. उन्होंने छठ पर्व से जुड़े गीतों के साथ कुछ लोकप्रिय सांस्कृतिक भोजपुरी गीत भी प्रस्तुत किए. उनके मंच पर पहुंचते ही छात्रों में उत्साह देखने को मिला. अक्षरा सिंह ने छात्रों से बातचीत भी की और ABVP के उम्मीदवारों के समर्थन में मतदान की अपील की.

कार्यक्रम की एक खास बात यह रही कि इसका संचालन भोजपुरी और पूर्वांचल की स्थानीय भाषा में किया गया. वहीं मनोज तिवारी ने अपने परिचित अंदाज में ‘जिया हो बिहार के लाला' गीत पर प्रस्तुति दी, जिस पर बड़ी संख्या में छात्र झूमते नजर आए.
ABVP के लिए उपाध्यक्ष पद का चुनावी समीकरण इस कार्यक्रम से इसलिए भी जुड़ता है क्योंकि उसके उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार ईशु मौर्य वाराणसी से आते हैं. ऐसे में पूर्वांचल से जुड़े छात्रों तक पहुंच बनाने के लिहाज से कार्यक्रम को अहम माना जा रहा है.
हालांकि, चुनावी प्रचार केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है. छात्र संगठन अपने-अपने घोषणापत्रों के जरिए भी छात्रों के बीच प्रमुख मुद्दों को लेकर पहुंच बना रहे हैं.
घोषणापत्र में मुद्दों की अलग-अलग प्राथमिकताएं
घोषणापत्रों में अलग-अलग छात्र संगठनों ने आवास, सुरक्षा, शिक्षा और छात्र कल्याण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी है. ABVP ने अपने घोषणापत्र में छात्र आवास, महिला सुरक्षा, शैक्षणिक सुविधाओं और रोजगार के अवसरों पर जोर दिया है. संगठन ने नए छात्रावासों के निर्माण, छात्राओं के लिए पर्याप्त हॉस्टल, PG और हॉस्टलों की सुरक्षा जांच तथा अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन का वादा किया है.
NSUI का फोकस सुविधाओं और छात्र कल्याण पर
NSUI ने अपने घोषणापत्र में मेट्रो कंसेशन पास, सस्ते और सुरक्षित PG तथा किराये के मकानों के लिए DU पोर्टल और पांच दिवसीय क्लास सप्ताह का वादा किया है. संगठन ने 24 घंटे लाइब्रेरी, सब्सिडी वाली कैंटीन, बेहतर वाई-फाई और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी अपनी प्राथमिकताएं सामने रखी हैं.
AISA-SFI ने सुरक्षा और जवाबदेही को बनाया आधार
आइसा-एसएफआई गठबंधन ने अपने चुनावी अभियान को छात्र सुरक्षा, जवाबदेही, समानता और छात्र अधिकारों के मुद्दों से जोड़ने की कोशिश की है. गठबंधन ने सत्य निकेतन हादसे और जंतर-मंतर छात्र आंदोलन को अपने राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाया है.
गठबंधन का कहना है कि DUSU की मौजूदा राजनीति में बदलाव की जरूरत है और छात्र सुरक्षा तथा अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. फिलहाल गठबंधन की ओर से बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए प्रचार करने की योजना सामने नहीं आई है. घोषणापत्रों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के समानांतर चुनावी माहौल में सियासी टकराव भी तेज हो रहा है.
प्रचार में बढ़ी तल्खी, पुराने वीडियो भी चर्चा में
DUSU चुनाव का प्रचार अब धीरे-धीरे अधिक आक्रामक होता जा रहा है. सोशल मीडिया पर उम्मीदवारों के पुराने वीडियो सामने लाकर सवाल उठाए जा रहे हैं और विभिन्न छात्र संगठन एक-दूसरे के दावों पर जवाब दे रहे हैं. NSUI और ABVP के बीच कई मुद्दों पर आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिल रहे हैं.
सत्य निकेतन हादसा भी चुनावी विमर्श का एक प्रमुख मुद्दा बन चुका है. छात्र सुरक्षा और विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही को लेकर अलग-अलग संगठन अपने-अपने पक्ष छात्रों के सामने रख रहे हैं.
कुल मिलाकर, DUSU चुनाव में इस बार मुकाबला केवल पदों तक सीमित नहीं दिख रहा है. सांस्कृतिक पहचान, छात्र सुविधाएं, सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और सोशल मीडिया पर चल रहा प्रचार—सभी चुनावी अभियान का हिस्सा बन चुके हैं. आने वाले दिनों में जैसे-जैसे मतदान का समय करीब आएगा, इन मुद्दों के साथ उम्मीदवारों और संगठनों का प्रचार अभियान और तेज होने की संभावना है.
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