दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव इस बार कई मायनों में दिलचस्प हो गया है. अध्यक्ष से लेकर संयुक्त सचिव तक चार प्रमुख पदों पर अलग-अलग छात्र संगठनों ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं. ABVP और NSUI के बीच सीधी राजनीतिक टक्कर के साथ AISA-SFI ने संयुक्त पैनल उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रही है. वहीं, NSUI के बागी उम्मीदवारों और एक दृष्टिबाधित उम्मीदवार की मौजूदगी ने चुनावी मुकाबले में नए समीकरण जोड़ दिए हैं.
ABVP का पैनल: खिलाड़ी, छात्र नेता और संगठन का अनुभव
ABVP ने अध्यक्ष पद के लिए यश डबास को मैदान में उतारा है. कंझावला, दिल्ली के रहने वाले यश ने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की है. वह अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी हैं और स्पेन, ऑस्ट्रेलिया तथा सर्बिया में ITF प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं. यश CBSE नेशनल, SGFI नेशनल, खेलो इंडिया और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2023 में चयनित रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व नॉर्थ इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी किया है. फिलहाल डबास DU के डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज में पढ़ाई कर रहे हैं.
इशु मौर्य
उपाध्यक्ष पद के लिए ABVP ने वाराणसी के रहने वाले इशु मौर्य को उम्मीदवार बनाया है. इशु ने सत्यवती कॉलेज से स्नातक किया है और 2021 में ABVP से जुड़े. डिबेट में मौर्य की सक्रियता रही है. वह सत्यवती कॉलेज (Morning) इकाई के अध्यक्ष और स्टूडेंट्स फॉर सेवा के सह संयोजक भी रह चुके हैं. वर्तमान में वह DU के कैंपस लॉ सेंटर में कानून की पढ़ाई कर रहे हैं.
रिया छवाड़ी
सचिव पद पर रिया छवाड़ी ABVP की उम्मीदवार हैं. बदरपुर, दिल्ली के मोडबंद गांव से आने वाली रिया किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उन्होंने श्री अरविंदो कॉलेज से पढ़ाई की है और इंटर-कॉलेज स्तर पर बास्केटबॉल खेल चुकी हैं. वह फिलहाल बी.ए. प्रोग्राम के चौथे वर्ष में हैं.
लक्ष्य राज सिंह
संयुक्त सचिव पद पर ABVP ने राजस्थान के चूरू जिले से आने वाले लक्ष्य राज सिंह को उतारा है. उन्होंने SGTB खालसा कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया है. लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैंडबॉल खिलाड़ी हैं और भारत की ओर से एशियाई खेल और विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुके हैं. उन्होंने राजस्थान को राष्ट्रीय खेल और दिल्ली विश्वविद्यालय को ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी प्रतिनिधित्व किया है. फिलहाल वह कैंपस लॉ सेंटर, फैकल्टी ऑफ लॉ में कानून की पढ़ाई कर रहे हैं.

NSUI का पैनल: अध्यक्ष पद पर किसान परिवार के विजय शंकर मीणा
NSUI ने अध्यक्ष पद के लिए विजय शंकर मीणा को उम्मीदवार बनाया है. वह आदिवासी समाज से आते हैं और किसान परिवार की पृष्ठभूमि रखते हैं. उनका कहना है कि किसान परिवार के पहले बच्चे के तौर पर उन्होंने आम छात्रों के संघर्ष और समस्याओं को करीब से देखा और महसूस किया है. वह अपने परिचय में कहते हैं कि उनका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है और NSUI ने उन्हें छात्रों के हक की लड़ाई लड़ने का मौका दिया है.
NSUI के आधिकारिक पैनल में उपाध्यक्ष पद पर वीर चतरथ, जो की कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता मनीष चतरथ के बेटे हैं. सचिव पद पर नम्रता चौधरी और संयुक्त सचिव पद पर गोपाल चौधरी हैं. खास बात यह है कि NSUI के चारों उम्मीदवार डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज के छात्र है.इस बार DUSU की पूरी उम्मीदवार सूची में भी इसी विभाग के छात्रों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है.

NSUI में बगावत ने बढ़ाई हलचल
चुनाव से पहले NSUI के भीतर बगावत ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है. चार प्रमुख पदों में से तीन पर NSUI से अलग हुए उम्मीदवार मैदान में हैं. अध्यक्ष पद पर समर्थ बेनीवाल, उपाध्यक्ष पद पर हिमांशु शौकीन और संयुक्त सचिव पद पर विशेष यादव चुनाव लड़ रहे हैं. इन बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी से NSUI के आधिकारिक पैनल के सामने वोटों के बंटवारे की चुनौती खड़ी हो सकती है.
AISA-SFI का साझा मोर्चा
इस बार फिर AISA और SFI ने संयुक्त पैनल के साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया है. अध्यक्ष पद पर अनन्या रतूड़ी (AISA), उपाध्यक्ष पद पर अक्षत शिखर (AISA), सचिव पद पर स्टैंजिन डेस्क्यॉन्ग (SFI) और संयुक्त सचिव पद पर बी पारिजात (SFI) उम्मीदवार हैं. दोनों संगठनों ने इसे पैसे और बाहुबल की राजनीति के खिलाफ छात्र नेतृत्व वाला विकल्प बताया है.

अनन्या रतूड़ी उत्तराखंड से आती हैं और कैंपस में महिला मुद्दों को लेकर सक्रिय रही हैं. अक्षत शिखर इलाहाबाद से हैं और NEET-UG 2026 से जुड़े विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रहे. स्टैंजिन डेस्क्यॉन्ग हिंदू कॉलेज की पहली वर्ष की एमएससी गणित छात्रा हैं और रामजस कॉलेज छात्रसंघ की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं. वह लेह-लद्दाख के ST समुदाय से आती हैं और DUSU चुनाव लड़ने वाली पहली लद्दाखी छात्रा हैं. पिछली बार इसी पद पर पूर्वोत्तर के आदिवासी समुदाय से आने वाली छात्रा अभिनंदना को लगभग 9,600 वोट मिले थे. वहीं बी पारिजात हंसराज कॉलेज के MA इंग्लिश के प्रथम वर्ष के छात्र हैं और PGDAV कॉलेज में लिटरेरी सोसाइटी के अध्यक्ष रह चुके हैं.
एक और खास चेहरा: दृष्टिबाधित उम्मीदवार
सचिव पद के मुकाबले में एक और नाम खास है—पंकज कुमार. LLB के छात्र पंकज दिल्ली विश्वविद्यालय चुनाव में मैदान में उतरने वाले एकमात्र दृष्टिबाधित उम्मीदवार बताए जा रहे हैं. वह आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई ASAP के समर्थन से चुनाव लड़ रहे हैं. उनकी उम्मीदवारी ने चुनाव में प्रतिनिधित्व और दिव्यांग छात्रों के मुद्दों को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

सत्य निकेतन हादसे के बाद बदला चुनाव का रंग
डूसू चुनाव की तैयारियां शुरुआत में रंगारंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ आगे बढ़ रही थीं, लेकिन दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने और सात लोगों की दर्दनाक मौत के बाद चुनावी माहौल अचानक बदल गया. ABVP से लेकर NSUI तक छात्र संगठनों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किए. NSUI ने केंद्र और राज्य सरकार से सवाल पूछे, जबकि ABVP ने जिम्मेदारी तय करने और MCD कमिश्नर के इस्तीफे की मांग उठाई.
ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी से NDTV ने जब इस मुद्दे पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि संगठन जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है और हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. यानी इस बार DUSU चुनाव में कैंपस के पारंपरिक छात्र मुद्दों के साथ दिल्ली की नागरिक समस्याएं भी चुनावी बहस का हिस्सा बन गई हैं.

18 सितंबर को मतदान, 19 को फैसला
इस बार DUSU चुनाव में घटनाक्रम तेजी से बदले हैं. उम्मीदवारों की प्रोफाइल से लेकर संगठनों के बीच की खींचतान, NSUI में बगावत, AISA-SFI का गठबंधन और सत्य निकेतन हादसा—सबने चुनाव की दिशा को प्रभावित किया है. अब नजर 18 सितंबर के मतदान और 19 सितंबर के नतीजों पर है. नतीजे यह बताएंगे कि दिल्ली विश्वविद्यालय का Gen Z छात्र इस बार किस राजनीति, किस मुद्दे और किस चेहरे के साथ खड़ा होता है.
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