बिहार में बाढ़ की त्रासदी के बीच आम लोगों की पीड़ा, बेबसी और छठी मइया के प्रति अटूट आस्था को स्वर देता भोजपुरी गीत ‘बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार' आज रिलीज हुआ. लोकप्रिय अभिनेत्री-गायिका अक्षरा सिंह की भावपूर्ण आवाज में प्रस्तुत यह गीत बाढ़ से जूझते बिहार की परिस्थितियों को लोक आस्था और उम्मीद से जोड़ता है. गीतकार मनोज भावुक ने बाढ़ की विभीषिका के बीच घर-परिवार, खेत-खलिहान और आम जनजीवन की पीड़ा को सहज और मार्मिक शब्द दिए हैं. संकट की इस घड़ी और पूजा के माहौल में सब देवी-देवता - दुर्गा मइया और छठी मइया आदि से बिहार की नैया पार लगाने की पुकार गीत का केंद्रीय भाव है. मधुकर आनंद ने गीत की संवेदना के अनुरूप करुणा, प्रार्थना और उम्मीद से भरा संगीत रचा है. भावुक के संवेदनशील शब्दों और आनंद के भावप्रधान संगीत को अक्षरा सिंह की सशक्त गायकी ने प्रभावी स्वर दिया है.
अक्षरा सिंह की इस प्रस्तुति को इसलिए भी विशेष माना जा रहा है कि बाढ़ के दौरान वह स्वयं बिहार पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों की मदद में जुटी थीं. लोगों की तकलीफ को करीब से महसूस करने वाली यह भी पढ़ें | Bigg Boss 20 की रीति तिवारी को मिला अक्षरा सिंह का सपोर्ट, बोलीं- गाली भी दे रहे हैं और गाना भी गा रहे हैं की आवाज में इस गीत की पीड़ा और प्रार्थना स्वाभाविक रूप से और गहरी हो गई है. अपनी कला के साथ मानवीय संवेदना के लिए भी पहचानी जाने वाली अक्षरा ने गीत को केवल गाया नहीं, बल्कि उसके भाव को आत्मीयता से जिया है.
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सुप्रसिद्ध कवि मनोज भावुक इससे पहले भी ‘पलायन के दर्द, सुन ए छठी मइया' और ‘जागे यूपी-बिहार' जैसे छठ गीतों में प्रवास, पलायन और बिहार के सामाजिक सरोकारों को स्वर दे चुके हैं. इसी संवेदनशील रचनात्मक यात्रा की अगली कड़ी है 'हारमोनिया रिकार्ड्स' से रिलीज ‘बाढ़ में बिहार, छठी मइया खेवनहार'- जिसमें आपदा का दर्द, लोकजीवन की संवेदना और विपत्ति के बीच उम्मीद का विश्वास एक साथ सुनाई देता है.
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