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This Article is From May 11, 2016

दिल्ली में डीजल टैक्सियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, लेकिन नए रजिस्ट्रेशन पर रोक

दिल्ली में डीजल टैक्सियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, लेकिन नए रजिस्ट्रेशन पर रोक
सांकेतिक तस्वीर
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि राष्ट्रीय राजधानी में डीजल से चलने वाली टैक्सियों का कोई नया पंजीकरण नहीं होगा, लेकिन ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली कैब को उनके परमिट के समापन तक राष्ट्रीय राजधानी में चलने देने की राहत भी दी।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.एस. ठाकुर की अगुवाई वाली एक पीठ ने कहा, 'दिल्ली में नई डीजल टैक्सियों का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। सिटी टैक्सियों के सारे पंजीकरण केवल तभी होंगे जब वे वाहन द्वैध ईंधन (सीएनजी-पेट्रोल) या विशुद्धत: सीएनजी या पेट्रोल पर चलेंगे। हम यह स्पष्ट करते हैं कि नए डीजल वाहनों का सिटी टैक्सियों के तौर पर पंजीकरण नहीं हो सकता।'

शीर्ष अदालत ने वर्तमान ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (एआईटीपी) वाली डीजल टैक्सियों को उनके परमिट, जो पांच सालों के लिए जारी किया गया है, के समापन तक राष्ट्रीय राजधानी में चलने की इजाजत दी और कहा कि उनका कोई नवीकरण नहीं होगा।

बदला जाएगा ऑल इंडिया परमिट का नाम
अदालत ने कहा कि नई एआईटीपी परमिट को एआईटीपी-एन के नाम से जाना जाएगा तथा उसके धारक एनसीआर में प्वाइंट-टू-प्वाइंट सेवाओं के लिए अधिकृत नहीं होंगे, जबकि वर्तमान एआईटीपी को एनसीआर में प्वाइंट-टू-प्वाइंट सेवा के लिए 'एआईटीपी-ओ' परमिट के रूप में बदला जाएगा, जैसा कि बीपीओ कंपिनयों में उपयोग में आने वाले परमिट वाहन हैं।

हालांकि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि डीजल कैबों, जिन्हें चलने की इजाजत दी जा रही है, उन पर सक्षम अधिकारियों द्वारा प्रदत्त संरक्षा, सुरक्षा, मूल्य निर्धारण संबंधी और अन्य अनापत्तियां लागू होंगी। पीठ ने कहा, 'संरक्षा और सुरक्षा एक महत्वपूर्ण पहलू है जैसा कि आपने अवश्य ही हाल की कुछ घटनाओं में देखा होगा।'

पिछले आदेश में किया संशोधन
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि एआईटीपी टैक्सी को एनसीटी के अंदर ही प्वाइंट-टू-प्वाइंट सेवा चलाने की इजाजत होगी। पीठ ने अपने पिछले आदेशों में संशोधन किया, जिसमें एनसीआर में डीजल टैक्सियों के चलने पर रोक लगा दी गई थी। इस पीठ में न्यायमूर्ति ए.के. सिकरी और न्यायमूर्ति आर. बानुमति भी हैं।

शीर्ष अदालत का नया आदेश इस मामले में अदालत मित्र के रूप में नियुक्त वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे के पीठ से यह कहने के बाद आया कि प्रतिबंध आदेश से 64,500 टैक्सियों को सड़कों से हटना पड़ा, जिससे रातों रात संकट पैदा हो गया।

साल्वे ने सुझाव दिया कि केंद्र को ऑल इंडिया परमिट वाली टैक्सियों के विनियमन के लिए नियम बनाना चाहिए तथा उसे गैर डीजल कैबों के वास्ते आगे का रास्ता तय करना चाहिए।

उन्होंने कहा, 'केंद्र को नया पर्यटन परमिट देना चाहिए तथा टैक्सियों को एनसीआर के अंदर प्वाइंट-टू-प्वाइंट यात्रा सेवाएं देने की अनुमति देनी चाहिए। इसी बीच वर्तमान स्थिति को तब तक चलने देना चाहिए, जब तक केंद्र उनके विनियमन के लिए नया नियम लेकर आता है।'

एनसीआर आधारित नियम बनाना मुश्किल
सॉलीसीटर जनरल रंजीत कुमार ने दलील दी कि एनसीआर आधारित नियम बनाना मुश्किल होगा क्योंकि एआईटीपी नियम पूरे देश के लिए हैं। आईटी उद्योग निकाय नेशनल एसोसिएशन सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज ने अदालत को आश्वासन दिया कि उनके सारे भावी अनुबंध सुनिश्चित करेंगे कि कैब केवल गैर डीजल चालित कैब हों।

तीस अप्रैल को शीर्ष अदालत ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ओला और उबर जैसे बड़ी कैब कंपनियों समेत डीजल टैक्सियों के लिए कम प्रदूषणकारी सीएनजी में तब्दील करने की निर्धारित समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया था।

टेक्नोलॉजी उपलब्ध है, बदलाव करें
पीठ ने यह दलील ठुकरा दी थी कि इससे गरीब ड्राइवरों की आजीविका प्रभावित होगी और कहा था कि वह समय बढ़ाते नहीं रह सकती है, जबकि तब्दील के लिए प्रौद्योगिकी उपलब्ध है। पिछले साल 16 दिसंबर को अदालत ने साल्वे की इस दलील पर गौर किया था कि सभी डीजल टैक्सियों को तर्कसंगत समय सीमा के अंदर सीएनजी ईंधन अपनाने दिया जाए, लेकिन वह एक मार्च, 2016 के बाद का समय न हो।

शीर्ष अदालत ने कहा था, 'हम अतएव निर्देश देते हैं कि दिल्ली के एनसीटी में ओला और उबर जैसी कैब कंपनियों सहित सिटी परमिट के तहत चलने वाली सभी टैक्सियां सीएनजी की ओर बढ़ेंगी लेकिन एक मार्च से बाद की तारीख न हो।' बाद में शीर्ष अदालत ने समय सीमा 30 अप्रैल तक बढ़ा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट की राहत का नासकॉम ने स्वागत किया
आईटी और बीपीएम उद्योग के संगठन नास्कॉम ने डीजल टैक्सियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई राहत का स्वागत किया है और कहा है कि संगठन सार्वजनिक परिवहन के संवर्धन और गैर-प्रदूषणकारी वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देता रहेगा।

नास्कॉम ने पिछले सप्ताह कहा था कि दिल्ली एनसीआर में डीजल से चलने वाली टैक्सियों पर रोक यदि दो-तीन सप्ताह जारी रहती है तो बिजनेस प्रासेस मैनेजमेंट (बीपीएम) क्षेत्र को एक अरब डॉलर तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

संगठन ने कहा कि टैक्सियों पर रोक से आईटी और बीपीएम क्षेत्र भारी दबाव में आ गया और वैश्विक स्तर पर उसकी छवि को भी नुकसान पहुंचने का खतरा पैदा हो गया। टैक्सी संग्राहक कंपनी ओला ने भी शीर्ष अदालत के डीजल टैक्सियों के बारे में मंगलवार को दिए गए फैसले का स्वागत किया।

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)

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