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This Article is From Jul 08, 2018

NDTV Special: बुराड़ी केस की अभी तक की कहानी, कब और क्या-क्या हुआ?

दिल्ली के बुराड़ी का इलाका अमूमन बहुत भीड़भाड़ वाला है. कहानी इस इलाक़े की गली नंबर 4 ए की इस दुकान से शुरू होती है. जो अमूमन सुबह 6 बजे खुल जाया करती थी, लेकिन एक जुलाई की सुबह 7 बजे तक बंद थी.

NDTV Special: बुराड़ी केस की अभी तक की कहानी, कब और क्या-क्या हुआ?
बुराड़ी में आत्‍महत्‍या करने वाले परिवार के 11 लोगों की फाइल फोटो
नई दिल्ली: दिल्ली के बुराड़ी का इलाका अमूमन बहुत भीड़भाड़ वाला है. कहानी इस इलाक़े की गली नंबर 4 ए की इस दुकान से शुरू होती है. जो अमूमन सुबह 6 बजे खुल जाया करती थी, लेकिन एक जुलाई की सुबह 7 बजे तक बंद थी. पड़ोसी गुरचरण सिंह वहां दूध लेने पहुंचे थे. उन्होंने दरवाज़े पर दस्तक दी, दरवाज़ा खुल गया. कोई मिला नहीं तो वो घर की पहली मंज़िल पर पहुंचे. वहां एक बेहद ख़ौफ़नाक मंज़र उनका इंतज़ार कर रहा था. एक दो नहीं, बल्कि 10 लाशें फांसी के फंदे से झूल रही थी तो 11 वां शव एक कमरे में पड़ा हुआ था. 

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बुराड़ी में रहने वाले गुरुचरण सिंह सुबह 7 बजकर 35 मिनट पर पुलिस कंट्रोल रूम को कॉल की. जब दिल्ली पुलिस को कॉल मिली तो उसके भी हाथ पैर फूल गए. एक घर में एक साथ 11 लोगों की मौत की कॉल. दिल्ली पुलिस को इससे पहले कभी नहीं मिली, लिहाज़ा तुरंत बड़ी संख्या में मौका ए वारदात पर भारी संख्या में पुलिस बल रवाना कर दिया गया.
 
burari deaths

पुलिसवालों के लिए भी सिहरा देने वाला मंज़र था. इस जाल से झूल रहे थे नौ शव. मरने वाले ज़्यादातर लोगों की आंखों और मुंह पर पट्टी थी, हाथ-पांव और कमर तक बंधे हुए थे. कुछ चुन्नी से, कुछ तार से, कुछ दूसरे कपड़ों से. शवों के नीचे 6 स्टूल पड़े हुए थे. आंगन से सटे एक कमरे में जब पुलिस घुसी तो एक बुज़ुर्ग महिला औंधे मुंह पड़ी हुई थी, ऐसा लग रहा था जैसे उसका गला घोंटा गया था. अगर इस घर में कोई ज़िंदा था तो जैकी नाम का ये कुत्ता, जो बंधा हुआ था. 

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इसके बाद इस इलाके में ही नहीं बल्कि पूरे देश में ये खबर आग की तरह फैल गयी,घर के आसपास लोगों का जमावड़ा बढ़ना शुरू हो गया. दिल्ली पुलिस के तमाम आला अधिकारी फोरेंसिक एक्सपर्ट के साथ मौके पर पहुंच गई और अपने आप में इस अनोखे केस की जांच शुरू हो गई. 
 
burari family tree

मृतकों की पहचान कुछ इस तरह हुई.
- नारायणी 75 साल
- बेटा भुवेश 42 साल 
- बेटा ललित 40 
- बेटी प्रतिभा 55 साल
- भुवेश की पत्नी सविता 42 साल
- भुवेश की बेटी नीतू 24 साल
- बेटी मोनू 22 साल
- बेटा ध्रुव 12 साल
- ललित की पत्नी टीना 38 साल
- ललित का बेटा शिवम 12 साल
- प्रतिभा की बेटी प्रियंका 30 साल

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burari

ये समझना आसान नहीं था कि ये हत्या है या सामूहिक आत्महत्या.
हत्या ?
- लटके हुए शवो के आंख
- हाथ बंधे होना
- एक अलग कमरे में बुज़ुर्ग महिला का शव पड़ा होना
- घर के सभी दरवाजे खुले होना
- किसी सुसाइड नोट का न मिलना
- पहली नज़र में ये साफ इशारा कर रहा था की ये मामला हत्या का है.
आत्महत्या ?
लेकिन वहीं दूसरी तरफ कोई लूटपाट न होना
- किसी के शरीर पर गले के अलावा कोई चोट के निशान न होना 
- घर बिल्कुल व्यवस्थित होनासभी के मोबाइल साइलेंट मोड में एक जगह रखे होना और किसी बाहरी आदमी के आने के कोई सबूत न मिलना आत्महत्या की तरफ सोचने पर मजबूर कर रहे थे.

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पड़ोसी नवनीत ने कहा कि पड़ोसियों और रिश्तेदारों से भी कोई सुराग नहीं मिल रहा था. सबका कहना था कि ये परिवार बहुत सज्जन था, ये लोग बहुत ज़्यादा पूजा पाठ करते थे, किसी से ऊंची आवाज़ में बात नहीं करते थे. तो हत्या या आत्महत्या- गुत्थी इतनी भर नहीं थी- सवाल ये भी था कि इन मौतों के पीछे वजह क्या है? हत्या हो या आत्महत्या- इसकी नौबत क्यों आई?

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ये बात लगातार साबित हो रही थी कि परिवार कुछ अतिरिक्त धार्मिक है. दिन में तीन बार पूजा करता है. सुबह 8 बजे, दोपहर 12 बजे और फिर रात 10 बजे. पूरा परिवार इस पूजा में एक साथ बैठता था. हर रोज़ घर के बाहर तख्ती पर एक श्लोक लगाता था. मौत से पहले गले में पूजा वाली चुन्नियां लिपटीं मिलीं. क्या ये धार्मिकता परिवार को कहीं और ले गई? इस सवाल का जवाब तब मिलना शुरू हुआ जब पुलिस को तलाशी के दौरान दो रजिस्टर मिले- एक पूरा भरा हुआ, एक आधा. इन रजिस्टरों ने पुलिस को पहला ठोस सुराग दिया कि ये सामूहिक ख़ुदकुशी का मामला हो सकता है. 
 
burari diary

एक रजिस्टर के एक पन्ने पर मौत का तरीक़ा भी दर्ज था.
- सात दिन तक पूजा लगातार करनी है
- थोड़ा लगन और श्रद्धा से
- कोई घर में आ जाए तो अगले दिन
- गुरुवार या रविवार को चुनें
- बेबे (मां नारायणी) खड़ी नहीं हो सकतीं अलग कमरे में लेट  सकती हैं
- सबकी सोच एक जैसी होनी चाहिए
- पहले से ज्यादा दृढ़ता से, ये करते ही तुम्हारे आगे के काम दृढ़ता से शुरू होंगे
- मध्यम रोशनी का प्रयोग करें
- हाथों की पट्टियां बच जाएं तो उसे आंखों में डबल कर लें
- मुंह की पट्टी को भी रूमाल से डबल कर लें
- जितनी दृढ़ता और श्रद्धा दिखाएंगे उतना ही उचित फल मिलेगा
- इस क्रिया को बड़ क्रिया नाम दिया गया, यानी बरगद के पेट की जटाओं की तरह फैलना
- ये करने के दिन खाना भी बाहर से लाने का जिक्र है, इसलिए उस रात खाना बाहर से मंगाया गया था.

लेकिन यही रजिस्टर बताता है कि परिवार जो कर रहा था, वो ख़ुदकुशी का इरादा नहीं था. लोगों को भरोसा था कि उन्हें कोई आकर बचा लेगा. पुलिस ने जब घर की और तलाशी ली तो और भी रहस्यमय चीजें मिलीं. मसलन, घर की एक दीवार पर बेवजह निकली ये 11 पाइपें. ये पाइपें न पानी के लिए थीं न हवा के लिए. फिर इनका क्या काम था?

घर से कुल मिला कर कुल 11 रजिस्टर बरामद हुए. रजिस्टरों में पहली इंट्री जून 2013 की है और आखिरी  30 जून
2018 की. यानी मौत से कुछ ही वक्त पहले की. ये आखिरी एंट्री जैसे सबकुछ बयान कर देती है. इसमें एक-एक ब्‍यौरा दर्ज है. जैसे:-
-भगवान का रास्ता
-9 लोग जाल पर
-बेबी मंदिर के पास स्टूल पर
-10 बजे खाने का ऑर्डर
-मां रोटी खिलाएगी
-एक बजे क्रिया होगी
-शनिवार-इतवार की रात होगी क्रिया
-मुंह में ठूंसा होगा गीला कपड़ा
-हाथ बंधे होंगे
-आखिरी पंक्ति है- एक कप में पानी रखना, जैसे ही ये रंग बदलेगा और मैं प्रकट होउंगा और तुम्हें बचा लूंगा. 

सवाल है, वो कौन था जो प्रकट होकर इन्हें बचा लेता?

VIDEO: बुराड़ी केस की अभी तक की कहानी
 
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