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This Article is From Oct 29, 2016

अदालत ने ओला और उबर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अर्जी सुनने से किया इनकार

अदालत ने ओला और उबर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अर्जी सुनने से किया इनकार
नई दिल्‍ली: दिल्ली की एक अदालत ने मीटर के आधार पर किराया बढ़ाने के लिए नियमों का पालन नहीं करने को लेकर ओला और उबर समेत एप्प आधारित कैब सेवा प्रदाताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की एक एनजीओ की अर्जी पर सुनवाई करने से आज इनकार कर दिया.

शिकायकर्ता ने आवेदन को लेकर दबाव नहीं डाला और उसे वापस लेने को वरीयता दी. उसके पश्चात मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अभिलाश मल्होत्रा ने उसे 'वापस ले लिए गए के तौर पर खारिज' कर दिया. अदालत ने कहा कि अर्जी में मोटर वाहन अधिनियम के तहत जिन अपराधों का आरोप लगाया गया है, वे गैर संज्ञेय हैं.

हालांकि अदालत ने गैर सरकारी संगठन न्यायभूमि को सीआरपीसी की धारा 200 के तहत शिकायत के पक्ष में सबूत पेश करने की अनुमति दे दी. मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने दावा किया कि ओला, उबर और 'टैक्सी फोर श्‍योर' डीजल से वाहन चलाकर तथा दिल्ली में प्वाइंट-टू-प्वाइंट सर्विस प्रदान कर कथित रूप से परमिट शर्तों उल्लंघन भी कर रहे हैं.

मजिस्ट्रेट ने कहा, 'सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत वर्तमान शिकायत आरोपी के खिलाफ दर्ज कराई गई है और एमवी अधिनियम की धारा 93 एवं एमवी अधिनियम की धाराओं 66.192 ए के तहत अपराध का आरोप लगाया गया है, जो प्रकृति में गैर संज्ञेय है. तद्नुसार शिकायतकर्ता सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत अपने आवेदन पर दबाव नहीं डाल रहा और उसने अनुरोध किया कि शिकायत को सीआरपीसी की धारा 200 के तहत शिकायत समझी जाए. इसने सीआरपीसी की धारा 200 के तहत सबूत पेश करने के लिए वक्त मांगा है'. मजिस्ट्रेट ने कहा, 'शिकायतकर्ता के वकील के बयान के मद्देनजर सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत आवेदन वापस ले लिए जाने के तौर पर खारिज किया जाता है. शिकायत की विचारनीयता पर दलीलों के लिए 10 नवंबर की तारीख तय की जाती है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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