आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि ऑटो कंपनियों मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर और हीरो मोटोकॉर्प का ये कहना कि ई-10 वाहन में ई-20 के इस्तेमाल से कोई नुकसान नहीं होगा, ये सही नहीं है. क्योंकि टोयोटा, मारुति सहित अन्य कंपनी ने ओनर मैनुअल में ही माना है कि 10 फीसदी से ज्यादा एथेनॉल इस्तेमाल नहीं करना है, फिर भी दिक्कत आए तो इसे भी नहीं करना है. उन्होंने कहा कि मैं सभी ऑटो कंपनियों को चिट्ठी लिखूंगा और लिखित में मांगूंगा कि ई-20 से गाड़ी की माइलेज गिरने या पार्ट्स खराब होने की भरपाई करने का आश्वासन दें.
मंगलवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर केजरीवाल ने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये कंपनियां कहती हैं कि ई-20 इस्तेमाल कर लें, ई-10 में कोई दिक्कत नहीं होगी. मैं इन तीनों कंपनियों को चिट्ठी लिखूंगा और उनसे कहूंगा कि उनका ओनर मैनुअल तो यह कहता है और वे प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ और कहते हैं. वे लिखित में दे दें कि अगर किसी गाड़ी की माइलेज 10 फीसदी से ज्यादा कम हो जाती है, तो क्या वे उस व्यक्ति को माइलेज के लिए मुआवजा देंगे? अगर ई-20 इस्तेमाल करने से गाड़ी खराब हो जाती है या टूट-फूट होती है, तो क्या वे उस गाड़ी के पुर्जे को बदलने का मुआवजा देंगे?

अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि मैं दूसरी कंपनियों को भी चिट्ठी लिखूंगा, कि एक बार स्पष्ट कर दें कि क्या वे भी मानते हैं कि ई10 में ई20 पेट्रोल इस्तेमाल किया जा सकता? अगले हफ्ते प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखूंगा कि वे यह बता दें कि अगर लोगों की गाड़ी का माइलेज कम होता है, तो हर्जाना उनकी सरकार देगी या कंपनी देगी?
आप संयोजक ने कहा कि सरकार कह रही है कि भारत कोई पहला देश थोड़ी है जो एथेनॉल इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन बाकी देशों में जो एथेनॉल इस्तेमाल हो रहा है, वह ई10 से कम हो रहा है. नॉर्मल गाड़ियां भी ई10 तक तो इस्तेमाल कर लेती हैं, उससे ज्यादा नहीं कर पातीं. जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस और थाईलैंड में अभी तक ई10 से कम इस्तेमाल होता है. जापान में ई3 इस्तेमाल होता है और वहां ई10 का टारगेट 2030 रखा गया है. उन्होंने 7-8 साल का फेज आउट पीरियड दिया है. ई3 से ई10 तक जाने के लिए जापान ने 7 साल रखे हैं. ई20 का टारगेट जापान ने 2040 रखा है. आज से 16 साल बाद ई20 में जाने के लिए जापान 16 साल का समय लेगा. थाईलैंड ने 2008 में ट्रायल और पायलट बेसिस पर कुछ पेट्रोल पंपों पर ई20 ट्राई किया था. आज 2026 हो गया है, 18 साल बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक वहां दोनों विकल्प मौजूद हैं. लोग ई20 ले सकते हैं या ई10 ले सकते हैं. वहां 18 साल का फेज आउट पीरियड चल रहा है.

केजरीवाल ने बताया कि पूरी दुनिया में ब्राजील अकेला देश है जहां ई100 इस्तेमाल होता है, यानी जीरो पेट्रोल. वहां इन गाड़ियों को फ्लैक्सी फ्यूल व्हीकल कहा जाता है. ब्राजील ने ट्रांजिशन के लिए 50 साल लिए. 1931 में ब्राजील में ई5 लाया गया था और 1985 में ई20 लाया गया. उन्हें 50 साल लग गए. 1975 में ब्राजील ने ट्रांजिशन शुरू किया और 1975 से 1985 के बीच 10 साल का समय लिया. 1985 से आज तक उन्होंने और समय लिया. अब ब्राजील में लोगों को विकल्प मिलता है कि वे ई100 ले लें, ई20 ले लें या ई30 ले लें. वहां ई30 बेसिक है. उन्होंने इतने सालों में अपने सारे वाहनों को इसके अनुकूल बना लिया है.
उन्होंने कहा कि देश में 22 करोड़ मोटरसाइकिलें ऐसी हैं जो ई20 के अनुकूल नहीं हैं और वे ई20 इस्तेमाल नहीं कर सकतीं. 8 करोड़ कारें ऐसी हैं जो ई20 के अनुकूल नहीं हैं और वे ई20 इस्तेमाल नहीं कर सकतीं. इन 30 करोड़ वाहनों का कबाड़ा हो जाएगा.
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