- शाहीन बाग में ठंड लगने से एक चार महीने के मासूम की मौत
- बच्चे की मां ने कहा कि वे प्रदर्शन में जाती रहेंगी
- शाहीन बाग में सीएए और एनआरसी के खिलाफ महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं
शाहीन बाग में NRC के विरोध में चल रहे धरने में बैठी एक महिला के चार महीने के बच्चे की मौत हो गई है. हालांकि महिला का कहना है कि वो फिर भी NRC के विरोध में होने वाले प्रदर्शन में हिस्सा लेंगी. बच्चे के माता-पिता बाटला हाउस में रहते हैं. बच्चे के पिता अरशद और मां नाजिया अपने तीन बच्चों के साथ रोज़ाना पहले जामिया फिर शाहीन बाग प्रदर्शन करने जाते थे. 29 जनवरी को घर लौटते नाजिया के सबसे छोटे बच्चे मोहम्मद को ठंड लग गई और सुबह उसकी मौत हो गई. बच्चे की मां ने बताया, "बच्चा बीमार नहीं था, हमें लगा ठंड लगी होगी. हमने बच्चे को सुला दिया था रात को लेकिन सुबह नहीं उठा." बच्चे के पिता ने बताया कि तीन छोटे बच्चों को घर में अकेला नहीं छोड़ा जा सकता है इसलिए बच्चों को भी भेजते थे. "हम खुद बच्चों को प्रोटेस्ट के लिए भेजते थे क्योंकि हम हक पर थे इसलिए कभी रोका नहीं."
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इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को मिले एक पत्र ने धरने में बच्चों को ले जाने पर एक नई बहस शुरु कर दी है. मुंबई की 12 साल की बहादुरी अवार्ड से सम्मानित छात्रा जेन गुणरतन सदावर्ते ने पत्र में लिखा है कि धरने प्रदर्शन में बच्चों को शामिल न किया जाए, शिशुओं और बच्चों को ले जाना अत्याचार और क्रूरता के समान है, माता पिता के खिलाफ कार्रवाई हो, आयोजक बाल अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहे और इस वजह से विरोध प्रदर्शन में 4 महीने के बच्चे की मौत हो गई.
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बच्चे के माता पिता इसके लिए धरने को नहीं बल्कि NRC को ज्यादा दोषी मानते हैं. बच्चे की मां ने कहा, "अगर NRC का जिक्र नहीं होता तो हम क्यों जाते. बच्चे की मौत के बाद कल जामिया गई थी. आजकल में फिर शाहीन बाग जाऊंगी."
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