दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया
- दिल्ली सरकार ने कॉलेजों को गवर्निंग बॉडी बनाने को कहा था
- कॉलेजों ने तय समय सीमा में यह काम नहीं किया
- दिल्ली सरकार ने इसके बाद फंड रोकने का फैसला किया
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नई दिल्ली:
दिल्ली सरकार ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के 28 कॉलेजों के फंड पर रोक लगा दी है. दिल्ली सरकार का यह कदम दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी नहीं बनाए जाने के बाद उठाया गया है. दिल्ली सरकार ने इन कॉलेजों को गवर्निंग बॉडी बनाने के निर्देश दिए थे. उपमुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि शिक्षा के नाम पर सरकार के पैसों के इस्तेमाल में भ्रष्टाचार नहीं होने देंगे. इसी वजह से फंड रोकने का फैसला लिया गया है.
जानकारी के अनुसार दिल्ली सरकार से वित्तपोषित इन कॉलेजों को प्रतिवर्ष 350 करोड़ रुपये का फंड मिलता है. जिन कॉलेजों का फंड रोका गया है, उन्होंने सितंबर 2016 के बाद से गवर्निंग बॉडी का गठन नहीं किया है. दिल्ली सरकार इन कॉलेजों पर केंद्र सरकार के एचआरडी मंत्रालय के इशारे पर काम करने का आरोप लगाती रही है. दिल्ली सरकार पहले कह चुकी है कि डीयू पर केंद्र सरकार के दबाव में गवर्निंग बॉडी के गठन में देरी कर रही है. मनीष सिसोदिया ने कहा कि जानबूझकर और गलत नीयत से गवर्निंग बॉडी के गठन में देरी की जा रही है.
सितंबर 2016 में दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने डीयू के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर गवर्निंग बॉडी के पैनल के सदस्यों के लिए नाम मांगे थे. नवंबर में फिर रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर नाम भेजने को कहा गया. डीयू प्रशासन का जवाब न मिलने पर शिक्षा विभाग ने दिसंबर और फिर 1 फरवरी 2017 को रजिस्ट्रार को पत्र लिखा. 14 फरवरी को रजिस्ट्रार ने गवर्निंग बॉडी के लिए मनोनीत सदस्यों वाली सूची दिल्ली सरकार को भेजी. मार्च में गवर्निंग बॉडी के सदस्यों की मंजूर सूची सरकार ने डीयू के एग्जीक्यूटिव काउंसिल को भेजी.
इस पर डीयू ने सरकार से दोबारा विस्तृत जानकारी मांगी. मई में सरकार ने गवर्निंग बॉडी के सदस्यों की सूची मंजूरी के लिए डीयू की एक्जिक्यूटिव काउंसिल के पास भेजी, जिस पर डीयू ने मंजूरी नहीं दी. 6 जुलाई को एग्जीक्यूटिव काउंसिल की प्रस्तावित बैठक भी टाल दी गई थी. 14 जुलाई को एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में सूची पर चर्चा तो हुई, लेकिन मंजूरी नहीं मिली. डीयू की एक कमेटी ने इन नामों पर पुनर्विचार के लिए सरकार के पास भेज दिया. पूरी प्रक्रिया में लगभग 10 महीने की देरी की वजह से उपमुख्यमंत्री ने वित्त विभाग को आदेश दिया कि 28 कॉलेजों को मिलने वाले फंड पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए.
गौरतलब है कि सरकार ने डीयू के 28 कॉलेजों को 31 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया था. इसमें कहा गया था कि अगर 31 जुलाई तक गवर्निंग बॉडी नहीं बनाई गई तो वह अगस्त से इन कॉलेजों को मिलने वाले फंड पर रोक लगा देंगे.
विधानसभा में नेता विपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने इस पूरे प्रकरण पर कहा कि दिल्ली सरकार का दिल्ली विश्वविद्यालय के 28 कॉलेजों की फंडिंग रोकना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. इससे 50,000 निर्दोष विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है. जिस दिल्ली सरकार ने 20 नए कॉलेज खोलने का वायदा किया था वह एक भी नया कॉलेज तो खोल नहीं पाई, उलटे वह 28 कॉलेजों को बन्द करने के कगार पर ले आई है.
वहीं, इस संबंध में दिल्ली विवि शिक्षक संघ (डूटा) दिल्ली सरकार को पत्र लिखने की तैयारी कर रहा है. इस पूरे प्रकरण पर डूटा अध्यक्ष नंदिता नारायण का कहना है कि इस मामले में पूरी गलती विवि प्रशासन की है, लेकिन इसका खामियाजा शिक्षकों को उठाना पड़ेगा और उनके वेतन पर संकट आ जाएगा. इस बात को ध्यान में रखते हुए हम दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर कॉलेजों का फंड नहीं रोकने का निवेदन करेंगे. शिक्षकों के संगठन एकेडेमिक्स फॉर एक्शन एंड डेवलपमेंट (एएडी) व डीयू कार्यकारी परिषद के सदस्य डॉ जेएल गुप्ता और डॉ राजेश झा का कहना है कि किसी भी हाल में वित्तीय अनुदान को प्रशासनिक मुद्दों से नहीं जोड़ा जा सकता है.
जानकारी के अनुसार दिल्ली सरकार से वित्तपोषित इन कॉलेजों को प्रतिवर्ष 350 करोड़ रुपये का फंड मिलता है. जिन कॉलेजों का फंड रोका गया है, उन्होंने सितंबर 2016 के बाद से गवर्निंग बॉडी का गठन नहीं किया है. दिल्ली सरकार इन कॉलेजों पर केंद्र सरकार के एचआरडी मंत्रालय के इशारे पर काम करने का आरोप लगाती रही है. दिल्ली सरकार पहले कह चुकी है कि डीयू पर केंद्र सरकार के दबाव में गवर्निंग बॉडी के गठन में देरी कर रही है. मनीष सिसोदिया ने कहा कि जानबूझकर और गलत नीयत से गवर्निंग बॉडी के गठन में देरी की जा रही है.
सितंबर 2016 में दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने डीयू के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर गवर्निंग बॉडी के पैनल के सदस्यों के लिए नाम मांगे थे. नवंबर में फिर रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर नाम भेजने को कहा गया. डीयू प्रशासन का जवाब न मिलने पर शिक्षा विभाग ने दिसंबर और फिर 1 फरवरी 2017 को रजिस्ट्रार को पत्र लिखा. 14 फरवरी को रजिस्ट्रार ने गवर्निंग बॉडी के लिए मनोनीत सदस्यों वाली सूची दिल्ली सरकार को भेजी. मार्च में गवर्निंग बॉडी के सदस्यों की मंजूर सूची सरकार ने डीयू के एग्जीक्यूटिव काउंसिल को भेजी.
इस पर डीयू ने सरकार से दोबारा विस्तृत जानकारी मांगी. मई में सरकार ने गवर्निंग बॉडी के सदस्यों की सूची मंजूरी के लिए डीयू की एक्जिक्यूटिव काउंसिल के पास भेजी, जिस पर डीयू ने मंजूरी नहीं दी. 6 जुलाई को एग्जीक्यूटिव काउंसिल की प्रस्तावित बैठक भी टाल दी गई थी. 14 जुलाई को एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में सूची पर चर्चा तो हुई, लेकिन मंजूरी नहीं मिली. डीयू की एक कमेटी ने इन नामों पर पुनर्विचार के लिए सरकार के पास भेज दिया. पूरी प्रक्रिया में लगभग 10 महीने की देरी की वजह से उपमुख्यमंत्री ने वित्त विभाग को आदेश दिया कि 28 कॉलेजों को मिलने वाले फंड पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए.
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गौरतलब है कि सरकार ने डीयू के 28 कॉलेजों को 31 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया था. इसमें कहा गया था कि अगर 31 जुलाई तक गवर्निंग बॉडी नहीं बनाई गई तो वह अगस्त से इन कॉलेजों को मिलने वाले फंड पर रोक लगा देंगे.
विधानसभा में नेता विपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने इस पूरे प्रकरण पर कहा कि दिल्ली सरकार का दिल्ली विश्वविद्यालय के 28 कॉलेजों की फंडिंग रोकना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. इससे 50,000 निर्दोष विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है. जिस दिल्ली सरकार ने 20 नए कॉलेज खोलने का वायदा किया था वह एक भी नया कॉलेज तो खोल नहीं पाई, उलटे वह 28 कॉलेजों को बन्द करने के कगार पर ले आई है.
वहीं, इस संबंध में दिल्ली विवि शिक्षक संघ (डूटा) दिल्ली सरकार को पत्र लिखने की तैयारी कर रहा है. इस पूरे प्रकरण पर डूटा अध्यक्ष नंदिता नारायण का कहना है कि इस मामले में पूरी गलती विवि प्रशासन की है, लेकिन इसका खामियाजा शिक्षकों को उठाना पड़ेगा और उनके वेतन पर संकट आ जाएगा. इस बात को ध्यान में रखते हुए हम दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर कॉलेजों का फंड नहीं रोकने का निवेदन करेंगे. शिक्षकों के संगठन एकेडेमिक्स फॉर एक्शन एंड डेवलपमेंट (एएडी) व डीयू कार्यकारी परिषद के सदस्य डॉ जेएल गुप्ता और डॉ राजेश झा का कहना है कि किसी भी हाल में वित्तीय अनुदान को प्रशासनिक मुद्दों से नहीं जोड़ा जा सकता है.
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