(फाइल फोटो)
- शहर में चल रहे रिक्शे की कुल संख्या का आंकड़ा जुटाएं और उनका पंजीकरण कराए
- शहर की सड़कों पर चल रहे रिक्शा की संख्या 30,000 से कुछ ज्यादा है : निगम
- पीठ ने कहा, हलफनामे में 30,000 का आंकड़ा देना सही नहीं कहा जा सकता
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नई दिल्ली:
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को निकाय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह शहर में चल रहे रिक्शे की कुल संख्या का आंकड़ा जुटाएं और उनका पंजीकरण कराएं. नगर निगमों ने अदालत को सूचित किया था कि उनके अनुसार शहर की सड़कों पर चल रहे रिक्शा की संख्या 30,000 से कुछ ज्यादा है. इनमें पंजीकृत और गैर पंजीकृत दोनों शामिल हैं. इस सूचना के बाद अदालत का यह निर्देश आया है.
हालांकि पीठ ने साल 2010 में अदालत द्वारा दिए गए एक आदेश को संज्ञान में लिया जिसमें अदालत ने कहा था कि दिल्ली में चल रहे रिक्शा की संख्या छह लाख से ज्यादा होगी.
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पहले वाले आदेश का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और आईएस मेहता की एक पीठ ने कहा कि नगर निगमों द्वारा एक हलफनामे में 30,000 का आंकड़ा देना सही नहीं कहा जा सकता है क्योंकि 2010 के फैसले के बाद से सात साल गुजर चुके हैं. बता दें कि अदालत गैर सरकारी संगठन मानुषी और अन्य द्वारा साल 2007 में चांदनी चौक के पुनर्विकास और बिना मोटर वाले वाहन के लिए लेन बनाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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