इंग्लैंड में क्रिकेट से इतर खेले जा रहे विंबलनडन टूर्नामेंट के आयोजक टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटरों को भी मैच देखने को न्योता भेज रहे हैं. और इस बहाने पूर्व क्रिकेटरों की आज के दौर के खिलाड़ियों से भी मुलाकात हो जा रही है. रविवार को जहां युवराज सिंह पूर्व चैंपियन इटली के सिनर और जर्मनी के फ्रेंच ओपन चैंपियन एलेक्जेंडर ज्वेरेव के बीच फाइनल मुकाबला देखने पहुंचे. इस दौरान युवी पहली बार अभिषेक शर्मा के साथ मैच देखने पहुंचे वैभव सूर्यवंशी से मुलाकात की और पूर्व दिग्गज ने सूर्यवंशी के बारे में अपने विचार रखे.
Yuvraj Singh, Abhishek Sharma and Vaibhav experience the magic of Wimbledon, as Yuvraj shares his first meeting with the young star he fondly calls "Boss Baby" and reflects on how the next generation of Indian cricket reminds him of tennis stars Jannik Sinner and Alexander… pic.twitter.com/lJb1KIIcEI
— Star Sports (@StarSportsIndia) July 12, 2026
'यह बॉलरों का बॉस बन चुका'
जियो स्टार के लिए मौके पर होस्ट बने सुनामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने जब सवाल किया कि उन्हें वैभव से मिलकर कैसा रहा लगा है? इस पर अपने समय के धाकड़ बल्लेबाज युवराज ने कहा, ' मुझे अच्छा लग रहा है कि मैं पहली बार वैभव से मिल रहा हूं. अभिषेक से तो मैं मिलता रहता हूं. मैं इसे बॉस बेबी बुलाता हूं. सब इसे बॉस बेबी बुलाने लग गए हैं क्योंकि ये बॉलरों का बॉस बन चुका है. एक व्यक्ति के रूप में वैभव से मिलकर अच्छा लगा. जब मैं सिनर और ज्वेरेव के बारे में सोचता हूं, तो उनको लेकर भी मुझे यही लाइन याद आती है.'
वैभव का ड्रॉप दिग्गजों को पसंद नहीं आया
वैसे सूर्यवंशी को लेकर बात करें, तो इंग्लैंड के खिलाफ चौथे मैच में प्रबंधन का उन्हें XI से ड्रॉप करना दिग्गजों को पसंद नहीं आया. जहां गावस्कर ने इस फैसले के लिए प्रबंधन को लताड़ लगाई, तो कई और ऐसे पूर्व खिलाड़ी रहे, जिन्होंने इस फैसले को सही नहीं बताया.
फिर आपने मौका ही क्यों दिया, गावस्कर ने उठाया सवाल
गावस्कर ने कहा, 'हम इस लड़के के साथ क्या कर रहे हैं? वह अभी सिर्फ 15 साल का है! जिस उम्र में बच्चे स्कूल बोर्ड की परीक्षाओं में बैठते हैं, वह उस उम्र में इंग्लैंड की नमी वाली और गेंद को मूव कराने वाली पिचों पर 145 किमी/घंटा की रफ्तार से जोफ्रा आर्चर का सामना कर रहा है. हां उसे शॉर्ट गेंद के खिलाफ बैक-फुट पर संघर्ष करना पड़ा, लेकिन उसकी उम्र के किसी भी खिलाड़ी के लिए यह पूरी तरह से अपेक्षित (स्वाभाविक) है. यदि आपके पास उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों को समझने के लिए 5 से 10 मैचों का सुरक्षित मौका देने का धैर्य नहीं था, तो उसे पहली बार में ही इतनी कठिन परिस्थितियों (फायरिंग लाइन) में उतारा ही क्यों? 15 साल के बच्चे को चयन की जटिल राजनीति से नहीं जूझना चाहिए. आप उसकी नींव (कोर) का परीक्षण तब कर रहे हैं जब वह अभी कानूनी रूप से कार चलाने की उम्र तक भी नहीं पहुँचा है!'
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