Rohit Sharma V/S Ishan Kishan: अफगानिस्तान के खिलाफ खेली जा रही तीन मैचों की वनडे सीरीज भले ही एकतरफा हो, लेकिन इसने अगले साल खेले जाने वाले फिफ्टी-फिफ्टी वर्ल्ड कप 2027 के लिए नीति तैयार करने के आधार के लिए एक मजबूत विजन अगरकर एंड कंपनी को शुरुआती दो मैचों से दे दी है. इस दिशा में आगे बढ़ने के लिहाज से पूर्व कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) को पिछले साल के आखिर में कप्तानी से हटाना अगर प्लान का पहला कदम था, तो इस प्लान को झारखंडी विकेटकीपर इशान किशन (Ishan Kishan) दो ही मैचों में अगले स्तर पर ले गए हैं. और अफगानिस्तान के खिलाफ इशान किशन के प्रदर्शन ने समस्या रोहित के लिए ही नहीं, बल्कि बहुत हद तक यशस्वी जायसवाल के लिए भी खड़ी कर दी है. क्यों? टीम के लिए साल 2027 के लिए अनिवार्य़ रूप से जरूरी नए संतुलन को कड़ी दर कड़ी समझिए.

'T-20 संतुलन' को याद कीजिए, वनडे भी चाह रहा नया संतुलन!
इस साल की लगभग शुरुआत में हुए टी20 विश्व कप से ठीक पहले मेगा इवेंट से पहले टीम इंडिया के ऐलान की प्रेस कॉन्फ्रेंस याद कीजिए. गिल टीम से गए, तो एकदम से ही इशान किशन की एंट्री हुई. PC में कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा, 'हम पारी की शुरुआत के लिए विकेटकीपर (संजू सैमसन) चाहते थे'. इसके बाद खिताबी जीत अपने आप में एक इतिहास है. और अब आप इसी सोच को वनडे से जोड़ दीजिए! अब इशान किशन के हालिया प्रदर्शन ने अगले साल खेले जाने वाले विश्व कप टीम चयन के लिए भी ठीक वैसी ही स्थिति पैदा कर दी है. वर्तमान वनडे टीम भी 'नए संतुलन' की मांग कर कर रही है, यह संतुलन में बदलाव चाह रही है. अगर कोई विकेटकीपर पारी की शुरुआत करेगा, तो कप्तान को कोई एक अलग-अलग अतिरिक्त विकल्प को XI में खिलाने का मौका मिलेगा. यह कुछ भी भी हो सकता है. कोई बल्लेबाज, स्पिनर, ऑलराउंडर या जरूरत के हिसाब से कुछ भी. अगले साल खेले जाने वाले फिफ्टी-फिफ्टी विश्व कप तक टीम इंडिया करीब 25 वनडे मैच खेलेगी. और अगरकर एंड कंपनी को मेगा इवेंट के लिए इन्हीं मैचों से "नया अनिवार्य संतुलन" साधना है.
...यहीं से शुरू होती है रोहित के लिए समस्या
और समय के हिसाब से अगर प्रबंधन विश्व कप 2027 की दिशा में आगे बढ़ते हुए ओपनिंग का एक छोर इशान किशन को देने का फैसला करता है (यह संतुलन के स्तर को और ऊपर ले जाएगा), तो रोहित पूरी तरह से प्लानिंग से बाहर हो जाएंगे. मतलब एक छोर पर इशान किशन, दूसरे छोर पर कप्तान शुभमन गिल के होने का मतलब है XI में जरूरत के हिसाब से किसी भी भी एक और खिलाड़ी को जगह मिलने की उपलब्धता. अफगानिस्तान के खिलाफ रोहित के गिरते और इशान के चढ़ते प्रदर्शन ने इस 'जरूरी संतुलन' की मांग का स्तर ऊंचा कर दिया है. यहां से साफ-साफ महसूस किया जा सकता है कि प्रबंधन (कप्तान गिल, कोच गंभीर और चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर) भविष्य में किस नीति की ओर बढ़ सकता है. और यहां रोहित की उम्र और राह में आने वाले चुनौतियों को भी आप बिल्कुल न भूलें !
विराट आएंगे, तो इशान का क्या?
अभी विराट कोहली रेस्ट पर हैं. लेकिन जब वह किसी बड़ी सीरीज में नंबर-3 पर वापस लौटेंगे, तो समस्या यहां से रोहित के लिए और बढ़ेगी ही बढ़ेगी. ऐसे में विश्व कप की दिशा में आगे बढ़ते हुए गंभीर एंड कंपनी के पास संतुलन का स्तर ऊंचा करने के लिए इशान किशन से पारी कराने के अलावा कोई दूसरा विक्लप नहीं ही होगा. फिर ऐसे में रोहित का क्या होगा? बहरहाल, रोहित का जो होगा, सो होगा, लेकिन इशान किशन फिलहाल जैसी फॉर्म में हैं और जैसा प्रदर्शन उन्होंने किया है, उसे देखते हुए अगर उन्हें इलेवन से दूर रखा जाता है, तो यह जरूर विश्व कप की भविष्य की तैयारी और जरूरी संतुलन से जरूर समझौता करने करने जैसा होगा.

मुश्किलें जायसवाल की भी बढ़ जाएंगी
अगर विश्व कप के लिए तुलनात्मक रूप से XI को और मजबूत बनाने या संतुलन का स्तर और ऊंचा करने के लिए प्रबंधन इशान किशन को बतौर ओपनर खिलाता है (यह दायां-बांया संयोजन भी होगा), तो फिर यहां तीसरे ओपनर की जंग रोहित और जायसवाल के बीच होगी. और इस ओपनर को तभी मौका मिलेगा, जब इशान किशन फ्लॉप होंगे, क्योंकि गिल तो कप्तान हैं ही. ऐसे में इशान किशन ने समस्या रोहित के लिए ही नहीं, बल्कि यशस्वी जायसवाल के लिए भी पैदा कर दी हैं.
'अनिवार्य संतुलन' का नया तुरुप का इक्का!
अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज खत्म होनी अभी बाकी है, लेकिन सीरीज की सबसे बड़ी देन मिल गए हैं. गुरनूर बराड़! क्या कोई बता सकता है कि आखिरी बार कब किसी ने भारत के निचले क्रम में ऐसा बॉलिंग ऑलराउंडर देखा था? मतलब जो इस स्तर की गेंदबाजी करता हो, और जरूरत पड़ने पर उपयोगी बल्लेबाजी करने में सक्षम हो. कुछ याद आया? वास्तव में गुरनूर बरार के रूप में भारतीय टीम को वह खिलाड़ी मिल गया है, जिसकी उसे पिछले करीब दो या तीन दशक से तलाश थी. अगले साल विश्व कप के लिए रोहित की जगह भले ही पक्के न हो या बहस का विषय बन चली हो, लेकिन इस लगभग 7 फीट के गेंदबाज को लेकर रत्ती भर भी शक नहीं है. अगर अफगानिस्तान के खिलाफ दिखी गेंदों की लंबाई, पेस, स्विंग, सीम और टप्पा ऐसा ही रहा, तो कप्तान और उपकप्तान के बाद विश्व कप के लिए सेलेक्टर अगर किसी खिलाड़ी के नाम पर बिना विचार किए विश्व कप टीम में जगह देंगे, तो वह गुरनूर बरार होंगे क्योंकि बरार टीम के 'जरूरी संतुलन' को और ऊंचाई देते हैं, तो कप्तान को विकल्प भी. आप सोचिए कि हार्दिक पांड्या के साथ लगभग एक और ऑलराउंडर होगा, तो संतुलन कैसा होगा. और इस नए संतुलन को हिस्सा बनाने का दबाव भी रोहित के ऊपर अनिवार्य रूप से है.
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