विज्ञापन

आईपीएल 2026 में वैभव ने '20 साल' की उम्र में एंट्री की, 26 के बनकर निकले सूर्यवंशी!

Vaibhav Sooryavanshi: पिछले आईपीएल में मानो वैभव ने अपना परिचय दुनिया को दिया था, लेकिन दूसरे ही सीजन में उन्होंने खेल को अपने इर्द-गिर्द समेटते हुए तमाम दिग्गजों और क्रिकेट जगत को अपना मुरीद बना लिया है

आईपीएल 2026 में वैभव ने '20 साल' की उम्र में एंट्री की, 26 के बनकर निकले सूर्यवंशी!
Vaibhav Sooryavanshi: वैभव सूर्यवंशी ने मानो टी20 में नया रंग भर दिया है
source: social media

तारीख: 19 अप्रैल 2025

जगह: सवाई मानसिंह स्टेडियम जयपुर

उम्र: 14 साल, 23 दिन

वैभव सूर्यवंशी के आईपीएल करियर की पहली और शार्दूल ठाकुर के फेकें पहले ही ओवर की चौथी गेंद..एकदम स्टंप की सीध में..गुडलेंग्थ पर टप्पा! पर ये क्या!! वैभव ने थोड़ा जगह बनाई..एक पीछे से मदहोश भरी, अंगड़ाई लेती हुई बैकलिफ्ट..बल्ले का फेस ऊपर की ओर..एकदम सटीक जगह गेंद से बल्ले का मिलन..और "नो-लुक" कवर के ऊपर से छक्का!! विश्व क्रिकेट जगत अवाक..स्टूडियो में कमेंटेटर सन्न..आकाश चोपड़ा के शब्द कुछ पलों के लिए गले में फंसे रह गए..एक ऐसा नजारा मानो कुछ सेकेंड के लिए किसी बॉलीवुड मूवी में बड़े पर्दे पर दिखाया गया कोई द्रश्य कुछ सेकेंड के लिए फ्रीज हो गया हो. और जब यह द्रश्य "अनफ्रिज" हुआ, तो मानो दुनिया की टी20 क्रिकेट में मानो एक नए रिवोल्यूशन (क्रांति) का आगाज हो गया. यह छक्का हमेशा के लिए इतिहास में अमर हो गया. यह महज छक्का भर नहीं था. यह अपने आप में हस्ताक्षर के साथ एक बड़ा बयान था. यह छक्का वैभव का दुनिया से परिचय, उनके टेम्परामेंट, तेवर, साहस और इन सबसे ऊपर कॉन्फिडेंस का सबूत था. तब से लेकर करीब डेढ़ साल के सफर में सूर्यवंशी की दुनिया 360 डिग्री पर बदल चुकी है.  

और जब वैभव अपने आईपीएल करियर के आगाज से 1 साल, 15 दिन या 410 दिन बाद जब 29 मई 2026 को राजस्थान की गुजरात के हाथों 7 विकेट से हार के साथ उनके सफर पर 'एक साल का ब्रेक' लगा, तो सीजन की आखिरी 96 रन की (सभी पारियों में सबसे परिपक्व (हालांकि काफी जोखिम से भरी) पारी) पारी से वैभव ने  साबित कर दिया कि वह दिन विशेष पर दर्जन भर छक्कों से सजी सुनामी पारी ही खेलना ही नहीं जानते, बल्कि संकट के समय टीम के लिए उन्हें अपनी आक्रामकता को कुंद करना और 'गीयर बदलना' भी बखूबी आता है. उम्मीद है चीफ सेलेक्टर ने आखिरी पारी के इस गुण को डायरी में कहीं नोट कर लिया होगा.

यहां से वैभव "इस संतुलन" को जितना ज्यादा और जितनी 'पैनी धार' से साधेंगे, यह उतना ही ज्यादा भविष्य में रेड-बॉल फॉर्मेंट में उनके काम आएगा. 


विश्व क्रिकेट की नई सनसनी 15 साल के वैभव  सूर्यवंशी भले ही उम्र में 'बालक' हों, लेकिन उन्होंने बतौर बल्लेबाज करीब '20-21 साल की परिपक्व मनोदशा (टेम्प्रामेंट, साहस, समझ, शॉट, शॉट चयन, पिच पर आत्मविश्वास.. संवाद..आदि) के साथ साल 2026 आईपीएल में एंट्री की थी. पिछले सीजन में शतक जड़ने वाले और सिर्फ 7 ही मैच 14 साल के वैभव बैटिंग परिपक्वता के पहलू से टूर्नामेंट खत्म होते-होते 18-19 वर्ष के  पिछले ही साल हो चुके थे. और जब बात सिर्फ टी20 की आती है, तो वतर्मान संस्करण की लगभग समाप्ति और इसमें आखिरी 96 रन की पारी रूपी 'फिनिशिंग नोट' के साथ वैभव इस सीजन से करीब वह 25-26 साल के बनकर निकले हैं! वैभव की 16 मैचों की 15 पारियां एक तरफ और क्वालीफायर-2 में मुल्लनपुर में खेली 96 रन की पारी एक तरफ.

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: BCCI/IPL

चेन्नई के खिलाफ 17 गेंदों पर 52 रन की पारी से सीजन का आगाज करने वाले वैभव ने मैच दर मैच खुद को किसी न किसी पहलू से सीखने की प्रक्रिया और पिछली गलती से आगे निकलकर अगले मुकाबले में बेहतर करने की मजबूत इच्छाशक्ति के दायरे में रखा. कभी टीम के प्लान के तहत शुरुआती चंद गेंदों को रोककर इंतजार किया, तो हैदराबाद के खिलाफ मिडऑन और लांग-ऑफ से छक्के जड़कर दिखाया कि वह बड़े शॉटों के लिए ऑन साइड और हुक-पुल पर ही निर्भर नहीं हैं. पिछले करीब डेढ़ महीने के भीतर वैभव खेल, बैटिंग परिपक्वता (खेल, शॉट चयन, धैर्य, समझ और यहां तक कि संवाद) के हिसाब से 20 से 25-26 साल के हो गए हैं, तो वहीं आंकड़ों से इतर प्रदर्शन ने उन्हें सीजन का सबसे बड़ा बल्लेबाज बना दिया है. हालांकि, मैदान के बाहर और मैदान पर बाकी गतिविधियों में उनकी मासूमियत 15-16 साल के लड़के जैसी ही है, लेकिन पैड ग्लव्स और हेलमेट धारण कर पिच पर उनकी मनोदशा ( सोचने की प्रक्रिया, परिपक्वता, खेलने का तरीका, शॉट चयन..आदि) किसी 25 साल के बल्लेबाज जैसा हो चला है. वह जो कर रहे हैं या जो उन्होंने आईपीएल 2026 में किया है, वह पहले इस स्तर की क्रिकेट में उनसे दोगुनी उम्र के बल्लेबाजों ने भी नहीं किया.

महान क्रिकेटर और पंडित अपनी-अपनी 'नजर' से वैभव को तौल रहे हैं. सबसे ज्यादा चर्चा का विषय उनकी बैकलिफ्ट और बैटस्पीड को लेकर चल रही है और वास्तव में ज्यादातर यह इन दो बिंदुओं के इर्द-गिर्द सिमट गई है! दुनिया भर की हजारों अकादमियों में खेल रहे लाखों बच्चों की बैकलिफ्ट  और बैट स्पीड ऐसी होगी. कौन जानता है कि इससे भी तेज और बेहतर हो? लेकिन क्या सिर्फ बैकलिफ्ट और बैटस्पीड से ही कोई वैभव सूर्यवंशी बन जाता है? नहीं, बिल्कुल नहीं! सबसे पहली बात कौशल है और इसके बाद से ही वे तमाम दूसरी तमाम बातें शुरू होती हैं, जो चर्चा के केंद्र में हैं.

कौशल भी दो तरह का होता है. एक नैसर्गिक (सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, विव रिचर्ड्स आदि) और दूसरा  सालों की कड़ी मेहनत (राहुल द्रविड़, मोहम्मद कैफ) से तराशा, सजाया-संवारा गया  कौशल. किसी मामले में नैसर्गिक कौशल 70 प्रतिशत होता है, तो कहीं 40-50 प्रतिशत कौशल में करीब इतना ही कड़ी मेहनत का समावेश होता है. मेहनत में नेट प्रैक्टिस, अलग-अलग ड्रिल्स, तकनीक, आदि बातें शामिल हैं. इसमें त्याग, अनुशासन आदि बातें भी अनिवार्य रूप से शामिल होती ही है. और व्हाइट-बॉल फॉर्मेट में वैभव सूर्यवंशी भी एक बहुत ही उच्च स्तरीय क्षमतावान नैसर्गिक बल्लेबाज हैं. और वर्तमान स्तर तक पहुंचने में पिछले 4-5 साल में उनकी कड़ी मेहनत से ज्यादा नैसर्गिक प्रतिभा का योगदान कहीं ज्यादा है. 

बहुत छोटी उम्र से ही घर के पास बनवाई गई पिच पर हर दिन करीब 600 गेंद (100 ओवर) खेलने की प्रैक्टिस करने वाले (पिता संजीव सूर्यवंशी के अनुसार) वैभव ने न जाने कितने घंटे शॉर्ट रेंज ड्रिल (17-18 की दूरी) से प्रैक्टिस होगी, न जाने कितने हजारों पर बिना बॉल के पुल शॉट की ड्रिल और फिर शॉर्ट रेंज से पुल शॉट की प्रैक्टिस के साथ ही बाकी तमाम शॉटों के अभ्यास की फल होगा कि आज वैभव के पास दिग्गज बॉलरों के खिलाफ खेलने के लिए कई बड़े नाम वाले बल्लेबाजों से कहीं ज्यादा माइक्रो सेकेंड का समय है. और यह भी कोई न भूले कि 10-14 साल की उम्र में वैभव ने बिहार और यूपी के अलग-अलग जिलों में शायद ही किसी जूनियर या सीनियर टूर्नामेंट में रनों की मीनार न खड़ी की हो. उदाहरण के तौर पर  13 साल की उम्र में समस्तीपुर जिले की अंडर-19 टीम की कप्तानी करते हुए साल के वैभव का टीम के 298 के स्कोर में लगभग 220 के आस-पास रन बना देना, या 50 ओवर के मैच में कई दोहरे शतक बना देना. 

Latest and Breaking News on NDTV

इन टूर्नामेंटों में खेलना और शतक-दोहरे शतकों से जन्मा कॉन्फिडेंस एक बहुत बड़ा पहलू है कि हैदराबाद के खिलाफ 97 पर आउट होने के बाद वैभव हर्षा भोगले से बात करते हुए कहते हैं, "फील्डर को देखने के बाद प्वाइंट के ऊपर से मारने की कोशिश की. अगर फील्डर के ऊपर से ही मार देता, तो यह छक्का हो जाता." 'इस मंच' पर ऐसा आत्मविश्वास से भरा ऐसा जवाब देते हुए आपने आखिरी बार कब, किस और किस उम्र के बल्लेबाज को  देखा था? यह कॉन्फिडेंस यूं ही पैदा नहीं होता. यह कई सालों की ट्रेनिंग, कई सौ मैचों में बड़ी-पड़ी पारियों, शतक-दोहरे शतक से रनों का अंबार लगाने के बाद पैदा होता है. यह कॉन्फिडेंस का स्तर ही है कि जब वैभव को राजस्थान रॉयल्स के ट्रॉयल के लिए बुलाया गया, तो नेट पर उन्हें एक ओवर में 18 रन बनाने का लक्ष्य दिया गया. और सूर्यवंशी ने शुरुआती 3 गेंदों पर ही छक्के जड़कर मानो फ्रेंचाइजी के क्रिकेट ऑपरेशन के हेड और वैभव के लिए नीलामी में दस करोड़ रुपये अलग से रखने के लिए कहने के भरोसे पर भी मुहर लगा दी.

हालांकि, यह बात अलग है कि इतना क्षमतावान बल्लेबाज राजस्थान को 1 करोड़ 10 लाख रुपये में ही मिल गया. ये तमाम मिली-जुली बातें और और कई साल की ऐसी ही निरंतर प्रक्रिया बाद कोई वैभव सूर्यवंशी जैसा प्रोडक्ट तैयार होता है. और जब  इस प्रोडक्ट की चकाचौंध से क्रिकेट जगत की आंखें खुलती हैं, तो फिर यहां से तकनीकी विश्लेषण शुरू होता है! लेकिन तकनीक से पहले कौशल आता है और कौशल के पीछे "बहुत कुछ" छिपा होता है. 

व्हाइट-बॉल और खासकर टी20 में टीम इंडिया में जगह पाने के लिए वैभव ने सारे टेस्ट पास कर लिए हैं. और वह समय ज्यादा दूर नहीं है, जब वह इस फॉर्मेट में टीम इंडिया की जर्सी में दिखाई पड़ेंगे. लेकिन बहुत ही हैरानी की बात है कि पंडितों ने उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर से करनी शुरू कर दी है. साल 1987-88 में राष्ट्रीय नक्शे पर चर्चा का विषय बने सचिन ने मुंबई की प्रतिष्ठित स्कूली ट्रॉफी हैरिस शील्ड में शारदाश्रम स्कूल के लिए खेलते हुए रेड-बॉल और तीन दिनी फॉर्मेट मैच सीजन में 14 साल और 10 महीने की उम्र में 1025 रन बनाए थे. यह वही टूर्नामेंट था, जिसमें सचिन ने कांबली के साथ नाबाद 664 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी करके पूरे विश्व क्रिकेट का ध्यान अपनी ओर खींचा था. तब सचिन का स्कोर 21*, 125, 207*, 326* और 346* रन था. सचिन सिर्फ एक बार ही आउट हए और उनका औसत रहा 1025! आप रुकिए, ठहरिए और इस औसत के बारे में कल्पना कीजिए!  यह औसत बहुत और बहुत कुछ कहता है. निश्चित तौर पर 14 साल की उम्र में वैभव ने भी रेड-बॉल फॉर्मेट में कई अच्छी पारियां खेली होंगी, लेकिन इस बात को इसी प्वाइंट के साथ खत्म करते हैं कि उस ऐतिहासिक स्कूली प्रदर्शन से सचिन के लिए रणजी ट्रॉफी का रास्ता अगले साल खुला. फिर पहले ही रणजी ट्रॉफी, पहले ही दलीप मैच में उनके शतक की अलग कहानी है. लेकिन वैभव के साथ एक तथ्य है कि 8 फर्स्ट क्लास  मैचों की 12 पारियों में वैभव ने 17.25 के औसत से 207 रन बनाए हैं. विद्वानों को सचिन के साथ वैभव की तुलना नहीं ही करनी चाहिए.  

जब इस साल का रणजी ट्रॉफी सीजन शुरू होगा, तो हर मैच में तमाम पंडितों, वैश्विक मीडिया की नजरें लगातार बहुत ही बारीकी से  उन पर नजरें गड़ाए होगी. यही तमाम पंडित उनकी शैली, उनके फुटवर्क, बैकलिफ्ट, आक्रामकता, आईपीएल सीजन की आखिरी पारी में दिखाए गए 'संतुलन', उनके चारदिनी मैच के जरूरी मिजाज सहित तमाम पहुलओं का 'सूक्ष्मदर्शी' के साथ समीक्षा करेंगे, जो उनकी सचिन के साथ तुलना कर रहे हैं! 

वैभव की सूनामी पारियों से इतर सबसे अच्छी बात उनका सीखने पर बहुत जोर देने पर है. साथ ही उनमें खुद को साबित करने की गजब की इच्छाशक्ति भी दिखती है. सीजन में खासतौर पर आखिरी मुकाबले में वैभव टीम हित में आक्रामकता का गीयर भी बदलने की शानदार कोशिश करते दिखे और इसमें बहुत हद तक सफल भी रहे. यहां से सूर्यवंशी को रेड-बॉल पंडितों से घिरा रहना ही होगा. ठीक वैसे ही, जैसे वह राजस्थान रॉयल्स के कोचिंग स्टॉफ से घिरे हैं, जिसका वैभव सूर्यवंशी को अगले स्तर पर ले जाने में बहुत बड़ा योगदान है. और जब बात रेड बॉल की आती है, तो फिर 'पूर्व गुरु' राहुल द्रविड़ से बेहतर मार्गदर्शक कौन हो सकता है! बहरहाल, रेड बॉल सीजन जब शुरू होगा, तब होगा, जब चुनौतियां आएंगी, तब आएंगी. फिलहाल आप वैभव के व्हाइट-बॉल स्वरूप का खुलकर मजा लीजिए. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. आगे कब होगा, पता नहीं कब होगा? इतिहास रचा जा रहा है. यह अभी शुरुआती दौर में आ है. इसका अगला पड़ाव वैभव को टीम इंडिया की जर्सी के साथ के साथ होगा. तब भी वैभव इतिहास में कुछ नए सुनहरे अध्याय जोड़ेंगे.  ऑफिस से, काम से समय निकालते रहिए, वैभव की बैटिंग का लु्त्फ उठाते रहिए. वास्तव में अभी तो 'पार्टी' शुरू हुई है!

मनीष शर्मा एनडीटीवी में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत है...

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com