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This Article is From Mar 18, 2014

टी-20 विश्वकप : हार के बावजूद टीम इंडिया पॉजिटिव मूड में

नई दिल्ली:

टीम इंडिया श्रीलंका के खिलाफ पहला अभ्यास मैच ज़रूर हार गई, लेकिन ये हार आखिरी ओवर में हुई, जब लसिथ मलिंगा की फुलर लेंथ और यॉर्कर गेंदों ने टीम इंडिया को आखिरी ओवरों में बारह रन नहीं बनाने दिया। मलिंगा ने आखिरी ओवर में दो विकेट झटक कर मैच का रुख बदल दिया।

इसके बावजूद भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी बहुत मायूस नहीं होंगे, क्योंकि हार के बावजूद कई पहलुओं में टीम इंडिया के बेहतर प्रदशर्न ने टीम से उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

रैना−युवी का दम
पिछले दस वन-डे मैचों में कोई अर्द्धशतक नहीं बना सके सुरेश रैना पिछले कुछ अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैचों में भी कुछ नाकाम ही रहे। ज़ाहिर तौर पर उनकी बल्लेबाज़ी को लेकर कई सवाल उठे, लेकिन अभ्यास मैच में वर्ल्ड नंबर वन श्रीलंकाई टीम के ख़िलाफ़ भारतीय ओपनर्स सस्ते में निपटे तो रैना ने अपने ऊपर दबाव नहीं बनने दिया। भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय टी-20 में इकलौता शतक लगाने वाले रैना अगर अगले कुछ मैचों में अपना बल्ला ऐसे ही चमका पाते हैं तो टीम इंडिया वर्ल्ड कप में अपना दबदबा कायम कर सकती है।

युवराज की काबिलियत
मैचविनर युवराज सिंह के छक्के इस बात का सबूत हैं कि सात साल पहले 2007 वर्ल्ड कप हो या 2011 का वर्ल्ड कप युवराज दो वर्ल्ड कप के ख़िताब में टीम के हीरो साबित हुए। सात साल पहले और और आज के युवराज में ज़्यादा फ़र्क नहीं आया है।
युवराज की काबिलियत पर कभी कोई सवाल नहीं रहा। इस वर्ल्ड कप को वो भी यादगार बनाने के इरादे से बांग्लादेश गए हैं। युवी का बल्ला चला तो दूसरी सभी टीमों की फ़िक्र बढ़ जाएगी।

आर अश्विन−अमित मिश्रा लय में
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान अनिल कुंबले से लेकर कैरीबियाई स्पिनर सुनील नरेन तक मानते हैं कि बांग्लादेश की पिचों पर स्पिनरों का रोल अहम रहेगा। ऐसे में पहले अभ्यास मैच में भारतीय स्पिनरों के प्रदर्शन से कप्तान एमएस धोनी ज़रूर राहत महसूस कर रहे होंगे। भारतीय स्पिनरों ने पहले अभ्यास मैच में 20 में से 12 ओवर गेंदबाज़ी की। अश्विन ने चार ओवर में तीन और अमित मिश्रा ने एक विकेट लेकर इन पिचों पर अपनी अहमियत साबित कर दी। अमित मिश्रा, आर अश्विन और रवीन्द्र जडेजा के अलावा पार्ट टाइम स्पिनर सुरेश रैना और युवराज सिंह टूर्नामेंट में टीम इंडिया की ताक़त साबित हो सकते हैं।

पेसर्स का कंट्रोल
स्पिनरों से भी ज़्यादा कप्तान धोनी और टीम मैनेजमेंट को राहत इस बात से पहुंची होगी कि वरुण एरॉन जैसे गेंदबाज़ ने तीन ओवर में 18 रन देकर एक विकेट भी अपने नाम किया। भुवनेश्वर कुमार ज़रूर महंगे साबित हुए, लेकिन मो. शमी और
वरुण एरॉन के गेंद पर कंट्रोल ने टीम मैनजमेंट का कंट्रोल नहीं बिगड़ने दिया।

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