BCCI vs Bangladesh Cricket Board: बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है, खासकर अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ, उसका सबसे बड़ा असर बांग्लादेश और भारत के क्रिकेट संबंधों पर पड़ा है. बात शुरू हुई आईपीएल की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाड़ी मुस्तफिजुर को लेकर उठे विवाद से. भारत में कुछ लोग, जिन्हें शायद क्रिकेट से कोई लेना देना नहीं था, केकेआर के मालिक शाहरुख़ खान के पीछे पड़ गए कि उनकी टीम में बांग्लादेश का खिलाड़ी क्यों है या उन्होंने बांग्लादेश के खिलाड़ी को क्यों खरीदा है. मामला यहां तक जा पहुंचा कि बीसीसीआई को दखल देना पड़ा. बीसीसीआई ने केकेआर के मैजेमेंट को कहा कि वह मुस्तफिजुर को रिलीज कर दे. इसी के साथ केकेआर ने इस खिलाड़ी को रिलीज कर दिया. हालांकि बांग्लादेश के ही साकिब अल हसन मुंबई इंडियंस दुबई की टीम में खेलते हैं उसका क्या होगा इस पर कोई निर्णय नहीं आया है. यहां यह भी बता देना जरूरी है कि मुस्तफिजुर इसके पहले सीएसके(चेन्नई),सनराइजर्स हैदराबाद और मुंबई के लिए खेल चुके हैं.
मुस्तफिजुर को केकेआर से हटाने का आदेश देने के बाद असली कहानी शुरू होती है जिसका शायद बीसीसीआई को अंदाजा नहीं था. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने मुस्तफिजुर को हटाने के बाद कुछ बड़े निर्णय लिए, जिसमें लिटन दास को कप्तान बनाना भी हैं. हालांकि लिटन दास को कप्तान बनाने के पीछे धर्म का कोई कारण नहीं है और उन्हें उनकी योग्यता पर टीम की कमान सौंपी गई है. लिटन दास बीते मई से इस फॉर्मेट में टीम की कमान संभाल रहे हैं. मगर इसके बाद जो फैसला बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने लिया उसके लिए शायद बीसीसीआई तैयार नहीं था.
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने सबसे पहले कहा कि उसकी टीम भारत में नहीं खेलना चाहती. उसके मैच श्रीलंका में शिफ्ट किए जांए. उस पर भारतीय बोर्ड ने कहा कि ऐसा होता आया है. भारत पाकिस्तान के मैच भी न्यूट्रल वेन्यू पर कराए जाते रहे हैं. यहां तक तक बात ठीक थी. मगर जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने कहा कि आईपीएल का प्रसारण बांग्लादेश में नहीं होगा तो भारतीय बोर्ड से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई सब जगह सन्नाटा छा गया. क्योंकि क्रिकेट में सारा पैसा आता है प्रसारण अधिकार को बेच कर.
भारतीय बोर्ड तभी मालामाल हुआ जब जगमोहन डालमिया ने इसे समझा और टेलीविजन राइट्स बेचने शुरू किए. आस्ट्रेलिया के कैरी पैकर इस बात को समझने वाले सबसे पहले व्यक्ति थे. वहीं से क्रिकेट में रंगीन कपड़े आए और अब हर आईपीएल मैच में 2 मिनट का स्ट्रेटिजिक टाइम आउट होता है, जो सिर्फ विज्ञापन के लिए बनाया गया है.
अब डिजिटल और टेलीविज़न के प्रसारण राइट्स अलग-अलग बिकते है, जो करीब 25 हज़ार करोड़ के आसपास होते हैं यानी दोनों की राइट्स 50 हज़ार करोड़. यदि व्लर्ड कप के मैच भारत से बाहर चले जाएं और किसी देश में मैच का प्रसारण ना हो, तो प्रसारण राइट्स खरीदने वालों का काफ़ी नुकसान हो जाएगा. यही वजह है कि फिलहाल बीसीसीआई चुप है और मामले का हल ढूंढने में लगा हुआ है.
बीसीसीआई करे भी तो क्या करे. एक तरफ देश है, लोगों की भावनाएं हैं, देश की विदेश नीति है तो दूसरी तरफ खेल है उससे जुड़ा हुआ अर्थशास्त्र. क्रिकेट जो भारत में ही नहीं इस पूरे भू भाग में धर्म से कम नहीं है, वहीं खेल धर्म से हार रहा है. चाहे वो बांग्लादेश में जो हो रहा है वो हो या उसकी प्रतिक्रिया में भारत में, जिसमें फंस गया है हमारा क्रिकेट बोर्ड. एक खेल प्रेमी होने के नाते उम्मीद करते हैं कि बीसीसीआई कोई ना कोई ऐसा हल निकालेगी, जिससे विश्व कप का मजा किरकिरा ना हो.
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