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'27 साल बीत चुके हैं, कर्ज नहीं भूलेंगे' सहवाग-जाधव ने कारगिल विजय दिवस पर जवानों को दी श्रद्धांजलि

भारतीय सैनिकों की बहादुरी, अनुशासन और पेशेवर तरीके की दुनियाभर में सराहना हुई. कारगिल की यह जीत आज भारत की सैन्य शक्ति का प्रतीक मानी जाती है और इसके बाद देश ने अपनी रक्षा तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया

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भारत के पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग और केदार जाधव ने कारगिल विजय दिवस पर भारतीय सशस्त्र बलों के बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए सैनिकों के असाधारण साहस, बलिदान और अटूट समर्पण को याद किया.  देश आज कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ मना रहा है. यह दिन 1999 के कारगिल युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत की याद दिलाता है. यह दिन उन 527 सैनिकों को सम्मान देता है जिन्होंने 'ऑपरेशन विजय' के दौरान अपनी जान गंवाई और उन हजारों जवानों के साहस और दृढ़ता को भी याद करता है जिन्होंने दुनिया के सबसे कठिन युद्धक्षेत्रों में लड़ाई लड़ी.

वीरेंद्र सहवाग ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "16,000 फीट की ऊंचाई. बर्फ से ढकी चोटियां. दुश्मन ऊपर बैठा था, हमारे बहादुर सैनिक नीचे से ऊपर चढ़ रहे थे. हर कदम देश के लिए. अगर दुनिया में निस्वार्थ लोग खोजने हों, तो दूर जाने की जरूरत नहीं है. बस एक सैनिक की जिंदगी को देखिए. वह सिर्फ एक चीज चाहता है कि उसके पीछे का देश सुरक्षित रहे. 527 सैनिकों ने अपनी जान दी, ताकि हम आज चैन से सो सकें, खुलकर सांस ले सकें. 27 साल बीत चुके हैं. हम उनका कर्ज कभी नहीं भूलेंगे. उन सभी को सलाम. जय हिंद."

वहीं, केदार जाधव ने लिखा,"कारगिल विजय दिवस. हमारे उन बहादुर सैनिकों को विनम्र श्रद्धांजलि, जिन्होंने कारगिल के युद्धक्षेत्र में वीरता, बलिदान और देशभक्ति की अमर गाथा लिखी. उनकी वीरता के कारण ही आज तिरंगा गर्व से लहरा रहा है."

कारगिल युद्ध मई से जुलाई 1999 तक चला. यह भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ा गया एक पारंपरिक युद्ध था. यह लड़ाई लद्दाख के कारगिल, द्रास, बटालिक, मुश्कोह और काक्सर जैसे पहाड़ी इलाकों में 5,000 मीटर से भी अधिक ऊंचाई पर लड़ी गई.

कड़ाके की ठंड, कठिन पहाड़ों और ऊंची चोटियों पर दुश्मन की मजबूत मौजूदगी के बावजूद भारतीय सेना ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी. सेना ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार किए बिना ही पाकिस्तानी घुसपैठियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया.

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