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IPL 2026: 'प्लान B' पर लौटे पंत, फिर से कम्पटीशन रिंग में फेंक दिया 'घेरा', 1 जगह के लिए 5 विकेटकीपरों में घमासान

Indian Premier League: ऋषभ पंत के बल्ले ने बदले प्लान के साथ ही फिर से बोलना शुरू कर दिया है, लेकिन उनकी टीम इंडिया में वापसी की राह बहुत ही ज्यादा मुश्किल है

IPL 2026: 'प्लान B' पर लौटे पंत, फिर से कम्पटीशन रिंग में फेंक दिया 'घेरा', 1 जगह के लिए 5 विकेटकीपरों में घमासान
IPL 2026: स्टार विकेटकीपरों की रेस टी20 में भारत की ताकत बताने के लिए काफी है
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कुछ महीने पहले टी20 विश्व कप से ठीक पहले कप्तान सूर्यकुमार ने जितेश शर्मा का प्लानिंग से 'पत्ता साफ' करते हुए कहा था, 'प्रबंधन अब ऐसा विकेटकीपर चाहता है, जो ओपनर हो.' टीम इंडिया के चयन के मानक बदले, तो उसका असर अब आईपीएल (2025) में साफ-साफ दिखाई पड़ रहा है. जहां ज्यादातर टीमों के विकेटकीपर ओपनर या टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज बन चुके हैं, तो वहीं अब यहां से टी20 में टीम इंडिया के भविष्य के विकेटकीपर की जंग बहुत ही तीव्र और उच्च स्तर की हो चली है. और यही वजह है कि रेस में खासे दूर चले गए ऋषभ पंत वापसी की पुरजोर कोशिश में प्लान 'बी' पर लौट आए हैं. इंडियन प्रीमियर लीग में खेले दूसरे ही मैच से उनके बल्ले ने भी फिर से बोलना शुरू कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय टी20 टीम में उनकी वापसी का रास्ता बहुत ही ज्यादा मुश्किल है क्योंकि टीम इंडिया में जगह एक है और दावेदार कम से कम पांच हैं. हालांकि, यह भी एक सच है कि पांच मजबूत दावेदारों के बावजूद यहां किसी की भी जगह पक्की नहीं हैं. आप इस बारे में डिटेल से जानें कि पूरा गणित क्या है.

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ऋषभ पंत लौटे प्लान 'बी' पर

पिछले सीजन में लखनऊ की उम्मीदों पर बिल्कुल भी खरे न उतरने वाले कप्तान ऋषभ पंत चार या पांच और कुछ मैचों में इससे भी निचले क्रम पर चले गए, लेकिन अब जब टीम इंडिया की डिमांड 'नई' हो चली है, तो भारतीय टीम में वापसी के लिए पंत के पास भी नए मानकों को स्वीकार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं ही बचा है. अब जब नई पॉलिसी (विकेटकीपर ओपनर) ने स्थायी रूप ले लिया है, तो ऋषभ ने इस सीजन में खुद को ओपनर/टॉप ऑर्डर का बल्लेबाज बना लिया है.  दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ पंत सिर्फ 7 रन ही बना सके, लेकिन शनिवार को ही नंबर-3 पर 50 गेंदों पर नाबाद 68 रन बनाकर लेफ्टी बल्लेबाज ने नंबर-3 पर ही जीरो पर आउट हुए इशान किशन को संदेश दे दिया कि वह रेस से बाहर नहीं ही हुए हैं. 

यहां किसी की कोई गारंटी नहीं!

यह सही है कि पिछले महीने खत्म हुए टी20 विश्व कप में संजू सैमसन ने इतिहास रचते हुए मेगा टूर्नामेंट के आखिरी तीन मैचों में अर्द्धशतक जड़ते हुए खुद का नाम इतिहास में दर्ज करा लिया. सैमसन विश्व कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे थे. संजू ने 5 मैचों में 321 रन बनाए थे, लेकिन आईपीएल के शुरुआती तीन मैचों में वह दहाई का भी आंकड़ा नहीं छू सके हैं. यह सही है कि टीम इंडिया जब अगली बार मैदान पर उतरेगी, तो पहला मौका बतौर विकेटकीपर संजू सैसमन को ही मिलेगा. लेकिन जरा सा भी प्रदर्शन उनका आगे ऊपर-नीचे हुआ, तो 31 साल के सैमसन की जगह कोई भी विकेटकीपर ले सकता है. 

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जगह एक, दावेदार अनेक !

इसे आईपीएल के लगातार ऊंचा होता स्तर कहें या फिर टी20 में भारत की ताकत कि  इस दौर में भारतीय विकेटकीपर कई साल पहले वनडे में एडम गिलक्रिस्ट की तरह टीम का न केवल ओपनर बन चुका है, बल्कि बैक-अप विकेटकीपर के रूप में भी इशान किशन के रूप में भारत के पास ऐसा विकेटकीपर है, जो न केवल पारी शुरू कर सकता है, बल्कि बतौर बल्लेबाज नंबर-3 पर भी जगह बनाने में सक्षम है.

और अगर इस पर भी कुछ बाकी बचता है, तो इन दोनों के बाद ऋषभ पंत, पंजाब किंग्स के तूफानी स्ट्रोक मेकर और अगले विकेटकीपर-ओपनर के लिए प्रबल दावेदार प्रभसिमरन सिंह, इनके बाद बाद ऋषभ पंत और फिर इस सीजन में राजस्थान रॉयल्स के लिए नंबर-3 पर खेल रहे और भारतीय टेस्ट टीम के सदस्य ध्रुव जुरेल हैं. कुल मिलाकर टी20 टीम में एक विकेटकीपर की जगह के लिए 5 बहुत ही मजबूत दावेदार हो चले हैं. यहां आप घरेलू टी20 में कई रिकॉर्ड बनाने वाले उर्विल पटेल को बिल्कुल भी न भूलें! 

आखिर प्रबंधन ने क्यों चुना ओपनर-विकेटकीपर?

कुछ साल पहले वनडे क्रिकेट में जब एडम गिलक्रिस्ट ओपनर बने, तो  इसने टीमों को नया नजरिया दिया. दरअसल टीम में विकेटकीपर के ओपनर होने का सबसे बड़ा फायदा यह कि कप्तान को अतिरिक्त विकल्प मिलता है. मतलब इस सूरत में कोई भी कप्तान अतिरिक्त बॉलर, बल्लेबाज या ऑलराउंडर को तो खिला ही सकता है, तो वहीं टीम का संतुलन एक नए या चरम स्तर को हासिल करता है.

अब जब भारत में जहां प्रतिस्पर्धा हर दिन गुजरने के साथ बहुत ही ज्यादा कड़ी हो रही है. ऐसे में यशस्वी जायसवाल जैसा बल्लेबाज बाहर बैठा है, तो वैभव सूर्यवंशी का बल्ला आग उगल रहा है, तो रियान पराग जैसे ऑलराउंडर या देवदत्त पडिक्कल जैसे प्रदर्शन के लिए टीम में जगह बनाना मुश्किल हो रहा है, तो इसी दबाव के कारण भी भारतीय प्रबंधन और सेलेक्टरों ने ऐसे विकेटकीपर को XI का हिस्सा बनाने का फैसला किया, जो संजू सैमसन या इशान किशन की तरह न केवल पारी शुरू करने में समर्थ हो, बल्कि वह एक मैच जिताऊ बल्लेबाज भी हो. 


 

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