IPL के इस सीजन के 64 मैचों में से 53 बार टॉस जीतने वाली टीम के कप्तान ने कहा- We'll bowl first.. यानी करीब 83 फीसदी मैचों में कप्तानों ने चेज करना ज्यादा सुरक्षित और असरदार माना और अगर मैच के नतीजों को देखें तो वो भी यही बता रहे हैं कि उनका फैसला गलत नहीं था. पहले गेंदबाजी करने वाली टीमें लगातार ज्यादा मैच जीत रही हैं. पहले बैटिंग करने वाली टीम अब तक केवल 21 मैच ही जीत सकी है. यानी केवल 32.81% मैचों में ही पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम को जीत हासिल हुई.
आखिर क्यों बदल गया पूरा खेल?
इस ट्रेंड के पीछे सबसे बड़ा कारण है ओस, जिसने रात के मैच की दूसरी पारी में अहम भूमिका निभाई है. भीषण गर्मी और उमस के साथ ही ओस भी रात के मैचों में बड़ा फैक्टर रही है. भारत के ज्यादातर मैदानों में रात के मैचों के दौरान दूसरी पारी में ओस गिरती है. इससे गेंद गीली हो जाती है, स्पिनर्स की पकड़ कमजोर पड़ती है और तेज गेंदबाजों के लिए लाइन-लेंथ कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. वहीं बल्लेबाजों के लिए रन बनाना आसान हो जाता है. यानी अगर किसी टीम को पता हो कि दूसरी पारी में बल्लेबाजी करनी है, तो वह लक्ष्य का पीछा ज्यादा आत्मविश्वास से कर सकती है. यही वजह है कि IPL 2026 में कप्तानों ने रिस्क लेने के बजाय डेटा और परिस्थितियों पर भरोसा किया.

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आंकड़े जो पूरी कहानी बताते हैं
इस सीजन में 200 या उससे ज्यादा का स्कोर अब डराने वाला नहीं रहा. टूर्नामेंट की शुरुआत ही RCB के हैदराबाद के खिलाफ 201 रन चेज करने से हुई. फिर अगले ही मैच में मुंबई इंडियंस ने केकेआर के 220 रन को भी लांघ लिया. IPL 2026 में अब तक खेले गए 64 मैचों में 55 बार 200+ स्कोर बने. यानी 85% मैचों में 200 का स्कोर देखने को जरूर मिला. लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इतने बड़े स्कोर भी सुरक्षित साबित नहीं हुए. पिछले साल जहां 200+ स्कोर बनाने वाली टीमों का रिकॉर्ड 12 जीत और 11 हार का था, वहीं इस बार चेज करने वाली टीमों ने बड़े-बड़े लक्ष्य आसानी से हासिल किए हैं.
कुल मिलाकर सिर्फ 11 बार ही ऐसी टीमें मैच भी जीत सकीं जिन्होंने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी. बाकी ज्यादातर मुकाबलों में दूसरी पारी खेलने वाली टीम बाज़ी मार ले गई.

मुंबई और पंजाब ने बदल दी सोच
इस सीजन के कई मुकाबलों ने फील्ड फर्स्ट सोच को और मजबूत किया. मुंबई इंडियंस ने 29 अप्रैल को वानखेड़े में पहले बल्लेबाजी करते हुए 243/5 का विशाल स्कोर खड़ा किया. यह उनके IPL इतिहास का सबसे बड़ा फर्स्ट-इनिंग स्कोर था. लेकिन सनराइजर्स हैदराबाद ने उसे भी आठ गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया. चार दिन पहले ही 25 अप्रैल को पंजाब किंग्स ने दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 265 रन चेज करके T20 इतिहास की सबसे बड़ी सफल रन-चेज में से एक दर्ज की. उस मैच में केएल राहुल ने सिर्फ 67 गेंदों पर नाबाद 152 रन ठोके, लेकिन उनकी टीम पहले बल्लेबाजी कर रही थी और अंत में हार गई. इन मुकाबलों ने कप्तानों को साफ संदेश दे दिया कि पहले बल्लेबाजी करके बड़ा स्कोर खड़ा करना अब जीत की गारंटी नहीं रहा क्योंकि अब IPL में पहले बैटिंग करके 240 और 264 रन बनाना भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहा.

कप्तान अब ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते
क्रिकेट डेटा से चल रही है. टीम एनालिटिक्स ग्रुप हर मैदान का पैटर्न, ओस का असर, पिच का व्यवहार और चेजिंग रिकॉर्ड पहले से कप्तानों को बता देते हैं. यानी टॉस के बाद फैसले अब गट फीलिंग से कम और मौजूदा डेटा के आधार पर ज्यादा तय हो रहे हैं. कुछ साल पहले तक कप्तान विरोधी टीम पर दबाव बनाने के लिए पहले बल्लेबाजी चुनते थे. लेकिन IPL 2026 में यह तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. अब कप्तानों को लगता है कि लक्ष्य का पीछा करना ज्यादा सुरक्षित है, क्योंकि बल्लेबाजों को पता होता है कि कितनी तेजी से रन बनाने हैं और कब हमला करना है.

बल्लेबाजी का वर्चस्व
वैसे भी टी20 क्रिकेट लगातार बल्लेबाजों के पक्ष में जाता दिख रहा है. छोटे मैदान, फ्लैट पिचें, पावर-हिटिंग और इम्पैक्ट प्लेयर नियम ने मैचों को पूरी तरह बदल दिया है. अब कोई भी स्कोर मैच विनिंग नहीं लगता. यही कारण है कि कप्तान पहले गेंदबाजी करके मैच को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं. अगर शुरुआती विकेट मिल जाएं तो विपक्षी टीम को 200 के अंदर रोका जा सकता है, और अगर बड़ा स्कोर भी बन गया तो चेज करने का भरोसा अब लगभग हर टीम में दिख रहा है.
क्या आगे भी यही रहेगा ट्रेंड?
बेशक जब तक रात के मैचों में ओस बड़ी भूमिका निभाती रहेगी, तब तक IPL में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का ट्रेंड जारी रहेगा. पर जल्द ही प्लेऑफ मुकाबले आने वाले हैं, जहां दबाव अलग तरह का होता है और वहां कप्तान परिस्थितियों के हिसाब से फैसला बदल भी सकते हैं.
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