टीम इंडिया एक तरफ टी20 सीरीज में आज अजेय बढ़त हासिल करने पर नजर गड़ाए है, तो वहीं न्यूजीलैंड ए के खिलाफ भारत ए के लिए खेल रहे कई खिलाड़ियों ने टेस्ट सीरीज के लिए बड़ा पॉजिटिव हासिल किया है. और इनमें सबसे पहला नाम दोहरे शतक से एक रन से चूक गए देवदत्त पडिक्कल का है, जिन्होंने अब नंबर-3 बल्लेबाज की रेस में चोटिल होकर बाहर गए साई सुदर्शन को अब पीछे छोड़ दिया है. घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया 'ए' के खिलाफ निराशाजनक प्रदर्शन के बाद, देवदत्त पडिक्कल ने न्यूजीलैंड के तूफानी हालातों में अपनी लय पा ली है। ब्लैक कैप्स (न्यूजीलैंड) के खिलाफ भारत की दो मैचों की टेस्ट सीरीज से पहले, 26 वर्षीय बल्लेबाज ने झटकों, खुद पर शक और सफलता से भरे अपने सफर के बारे में और शतकीय पारी के बाद देवदत्त पडिक्कल ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में डिटेल से अपने दिल की बात की.
'तेज हवा बनेगी बड़ी चुनौती'
इंटरव्यू में देवदत्त ने न्यूजीलैंड सीरीज के लिए तैयारी के सवाल पर कहा, 'मैं आने से पहले घर (भारत) में कुछ सेशन किए और ऑस्ट्रेलिया A के खिलाफ भारत A के लिए दो मैच खेले. लेकिन वहां हालात अलग थे और यहां परिस्थितियां अलग हैं. लेकिन अहम बात यह है कि मैं लगातार रेड-बॉल फॉर्मेट खेलता रहा. अब जो बचा है, वह यह है कि कुछ छोटे-मोटे बदलाव करने हैं.' इन छोटे-मोटे बदलाव पर पडिक्कल ने कहा, यहां चलने वाली तेज हवा बड़ी भूमिका निभाने वाली है. खासकर वेलिंगटन में. ऐसे में हालात बहुत ही चैलेंजिंग हो सकते हैं. और इन हालात को समझने के लिए भारत A के मैच अहम रोल निभांगे.'
बैटिंग में किया यह बदलाव
लेफ्टी बल्लेबाज ने तैयारी के लिए वीडियो एनालिस्ट के अहमियत पर कहा, 'मैंने न्यूजीलैंड में खेले गए मैचों और वहां हुई इंग्लैंड सीरीज (2024) को भी देखा है. जब हम मैदान पर उतरते हैं तो परिस्थितियां अलग हो सकती हैं. यह जरूरी है कि मैं जल्दी से खुद को ढाल सकूं. मैं उन चीजों का अभ्यास करता हूं जिन पर मुझे तकनीकी रूप से काम करने की जरूरत है. मैं यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता हूं कि मैं गेंद को लेट खेलूं, स्विंग के साथ खेलूं.
और जब मैं घर वापस आऊं तो उन बारीक चीजों को सही कर सकूं. एक बार जब मैं मैदान पर उतरता हूँ, तभी मैं हालातों को समझने की कोशिश करता हूं और उसके अनुसार खुद को ढालता हूं.'
'हर खिलाड़ी इस दौर से गुजरा'
साल 2024 में धर्मशाला से अभी तक खेले सिर्फ चार टेस्ट में आए उतार-चढ़ाव पर पडिक्कल ने कहा, 'हर क्रिकेटर किसी न किसी रूप में इस दौर से गुजरा है. उनके जीवन में भी वह दौर आया होगा जब वे जवाब तलाशने की कोशिश कर रहे थे. मेरे लिए, पिछले कुछ साल यह समझने की कोशिश करने में बीते कि मेरा खेल किस स्थिति में है और मुझे यह सुनिश्चित करने के लिए किस चीज़ पर काम करने की जरूरत है कि जब मुझे दोबारा मौका मिले, तो मैं तैयार रहूं.'
क्या टीम के सीनियर खिलाड़ियों के साथ आपकी कोई बातचीत हुई? इस पर देवदत्त ने कहा, 'मुझे याद है कि जब मैं ऑस्ट्रेलिया में था, तब मैंने केएल (राहुल) से इस बारे में बात की थी कि मैं आगे क्या कर सकता हूं और मुझे किस चीज पर काम करने की जरूरत है. वह बातचीत बस आपके खेल को विकसित करने और हर दिन बेहतर बनाने के बारे में थी.'
अलग-अलग फॉर्मेट से तालमेल बैठाना आसान नहीं
क्या पिछले साल इंग्लैंड दौरे से चूकने से आपको निराशा हुई थी?, पर पडिक्कल ने कहा, 'निश्चित तौर पर निराशा हुई. मेरे जैसे युवा खिलाड़ी के लिए विदेशी दौरे हमेशा शानदार अनुभव होते है.लेकिन अलग- अलग-अलग फॉर्मेट के बीच तालमेल बैठाना आसान नहीं होता. जब आप फॉर्मेट बदलते हैं तो आपको बहुत सी चीजों को अलग-अलग हिस्सों में बांटना पड़ता है. रणजी ट्रॉफी स्तर पर, आपके पास फॉर्मेट्स के बीच फिर भी सात से आठ दिन का ब्रेक होता है. अगर आप रेड-बॉल क्रिकेट और व्हाइट-बॉल क्रिकेट को मिलान की कोशिश करेंगे, तो उससे ज्यादा सफलता नहीं मिलेगी.'
F.A.Q: पडिक्कल के बारे में Frequently Asked Questions सें जाने तमाम बातेें
प्र:- देवदत्त पडिक्कल का टेस्ट करियर अब तक कैसा रहा है और उनके कुल आंकड़े क्या हैं?
उ.:- देवदत्त पडिक्कल ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत शानदार अंदाज में की है. उन्होंने अब तक भारत के लिए 5 टेस्ट मैचों (6 पारियों) में बल्लेबाजी करते हुए 418 रन बनाए हैं. उनका टेस्ट औसत लगभग 69.67 का है और उनका स्ट्राइक रेट 60.10 रहा है. उनके नाम टेस्ट फॉर्मेट में 2 शतक और 1 अर्धशतक दर्ज है, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर 167 रन है.
प्र:- देवदत्त पडिक्कल ने अपने टेस्ट करियर का पहला शतक कब और किस टीम के खिलाफ बनाया था?
उ.:- पडिक्कल ने अपने टेस्ट करियर का पहला शतक 15 अगस्त 2026 को श्रीलंका के खिलाफ गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए टेस्ट मैच में बनाया था. इस मैच में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 230 गेंदों में 167 रनों की बेहतरीन शतकीय पारी खेली थी, जो उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का भी पहला शतक था.
प्र:- क्या देवदत्त पडिक्कल विदेशी दौरों और कठिन परिस्थितियों में रन बनाने में कामयाब रहे हैं?
उ.:- बिल्कुल। घरेलू मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ अपने टेस्ट डेब्यू (65 रन) के बाद, उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ विदेशी जमीन पर अपनी काबिलियत पूरी तरह साबित की है. श्रीलंका दौरे पर उन्होंने गॉल में 167 रन और कोलंबो (एसएससी) में 117 रन (193 गेंद) की शानदार शतकीय पारी खेलकर यह साबित कर दिया है कि वे विदेशों में भी भारतीय मध्य/शीर्ष क्रम की रीढ़ बन सकते हैं.
प्र:- टेस्ट मैचों में देवदत्त पडिक्कल आमतौर पर किस बल्लेबाजी क्रम पर उतरते हैं?
उ.:- क्रिकइन्फो के आंकड़ों के अनुसार, देवदत्त पडिक्कल मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेट में नंबर 3 की पोजीशन पर बल्लेबाजी करते हैं। भारतीय टेस्ट टीम में टॉप-ऑर्डर या नंबर 3 पर उतरकर उन्होंने पारी को संभालने और बड़ी पारियां खेलने की अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है.
प्र:- क्या बल्लेबाजी के अलावा देवदत्त पडिक्कल टेस्ट मैचों में गेंदबाजी या फील्डिंग में भी योगदान देते हैं?
उ.:- आंकड़ों के अनुसार, पडिक्कल मुख्य रूप से एक विशेषज्ञ शीर्ष क्रम के बल्लेबाज और बेहतरीन फील्डर हैं। उन्होंने टेस्ट मैचों में अब तक 6 कैच लपके हैं. हालांकि जरूरत पड़ने पर उन्होंने गेंदबाजी में हाथ भी आजमाया है (जैसे श्रीलंका के खिलाफ मैच में 1 ओवर फेंका है), लेकिन मुख्य रूप से टीम में उनकी भूमिका एक भरोसेमंद स्पेशलिस्ट बल्लेबाज की ही है
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